Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर रूस के वैज्ञानिकों की तरफ से दावा किया गया है कि उन्होंने कोरोना की वैक्सीन बना ली है और इसका ह्यूमन ट्रायल भी सफल रहा है। यह खबर इसलिए भी काफी सुकून देनेवाली है क्योंकि अभी तक कोरोना की जितनी वैक्सीन के बनकर तैयार होने की खबर आई है, उन सभी के साथ यह कंडीशन साफ थी कि इनका ह्यूमन ट्रायल होना बाकी है। लेकिन रूस की इस वैक्सीन से जुड़ी खबर ने एक खुशी की लहर दौड़ा दी है। आइए जानते हैं इस वैक्सीन से जुड़ी उम्मीदें और संभावनाएं…
कितनी प्रभावी हो सकती है वैक्सीन?
–हम सभी जानते हैं कि कोरोना एक वायरल संक्रमण है, जो हवा और सांस के जरिए फैल रहा है। लेकिन इस वायरस को खत्म करनेवाली दवा या इससे बचानेवाली वैक्सीन को लेकर मेडिकल सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स इसलिए आशंकित हैं क्योंकि इस वायरस के डीएनए में लगातार बदलाव हो रहा है। इस बात को अलग-अलग शोधों में इस तरह भी समझाने का प्रयास किया गया है कि कोल्ड हर साल और सबसे अधिक होनेवाली शारीरिक समस्या है लेकिन आज तक इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है।
अलग-अलग तरीकों से सेहत को प्रभावित कर रहा है कोरोना
-हालांकि रूस निर्मित वैक्सीन के सकारात्मक रिजल्ट के बाद लोगों ने चैन की सांस जरूर ली है। लेकिन इस बात को लेकर बहुत अधिक उम्मीदें ना बांधने की सलाह भी हेल्थ एक्सपर्ट्स की तरफ से दी जा रही है। इसकी वजह यह है कि कोरोना वायरस में लगातार म्यूटेशन हो रहा है। अभी तक की जानकारी और अलग-अलग रिसर्च से प्राप्त आकड़ों के आधार पर दुनियाभर में कोरोना की करीब 8 स्ट्रेन्स हैं। इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि एक कोरोना वायरस से अभी तक दुनियाभर में 8 अलग-अलग तरह के कोरोना वायरस बन चुके हैं।
जारी है म्यूटेशन
-कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रारंभिक काल में ही हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अलग-अलग देश और क्षेत्रों के मरीजों के लक्षणों को देखते हुए और कोरोना पर उस समय तक किए गए शोधों के आधार पर यह बात एकदम साफ कर दी थी कि कोरोना में लगातार म्यूटेशन हो रहा है। इस कारण इस वायरस को खत्म करने के लिए किसी भी एक दवाई को पूरी तरह प्रभावी नहीं कहा जा सकता।
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-यह म्यूटेशन (बदलाव) ही इस बात का मुख्य कारण है कि कोरोना के मरीजों में उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर तो अलग-अलग लक्षण मिल ही रहे हैं। साथ ही कोरोना के डीएनए में हो रहे बदलावों के कारण भी मरीजों में अलग-अलग तरह के लक्षण सामने आ रहे हैं।
रूस ने बनाई कोरोना की वैक्सीन
नहीं है कोई साइडइफेक्ट
-रूस द्वारा तैयार की गई जिस कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल सफल होने की बात कही जा रही है, वह ट्रायल इस आधार पर सफल माना जा रहा है कि जिन 30 से अधिक इंसानो को यह वैक्सीन दी गई, उन्हें देने के बाद करीब महीनेभर की समय सीमा के अंदर इन लोगों के शरीर में किसी तरह के साइड इफेक्ट्स देखने को नहीं मिले हैं। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 18 जून को कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल शुरू करने संबंधी जानकारी दी गई थी।
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-हालांकि इस वैक्सीन को डिवेलप करनेवाली टीम से जुड़े और इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसनैशनल मेडिसिन ऐंड बायोटेक्नॉलजी के निदेशक वादिम तारसोव का कहना है कि अब तक जितनी भी कोरोना वैक्सीन्स का ट्रायल दुनियाभर में किया गया है, उनमें यह पहली वैक्सीन होगी, जिसके ह्यूमन ट्रायल को भी सफलता पूर्वक पूरा होने के रिजल्ट आ रहे हैं।
-हालांकि तारसोव आगे यह भी कहते हैं कि प्रीक्लिनिकल स्टडीज, प्रोटोकॉल डिवेलपमेंट्स जैसी इस तैयार वैक्सीन को लेकर और अधिक क्लीनिकल ट्रायल्स का दौर फिलहाल जारी रहेगा।
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