WHO On Covid-19: कोरोना पर टेड्रोस की चेतावनी, इस लापरवाही से बढ़ रही मरीजों की संख्याअपने ताजा बयान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चीफ टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा है कि अमेरिका और एशिया के कुछ देश दुनिया में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए खास तौर पर जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही टेड्रोस ने यह भी याद दिलाया कि कोविड-19 को रोकने के लिए जिन नियमों के पालन की बात उसने इस बीमारी के प्रारंभिक काल में ही कही थी, उनका पालन ना करने के कारण दुनिया में आज भी लगातार कोरोना के मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है…
ये हैं डब्लूएचओ के सुझाए नियम
-जब कोरोना संक्रमण पूरी दुनिया के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा था और इसके ऐक्टिव केसेज की संख्या लगातर बढ़ रही थी, उस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी किए गए सुरक्षा नियमों में कहा गया था कि यदि इस संक्रमण को रोकना है तो पूरी दुनिया में सभी को मास्क का उपयोग करने, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और बार-बार हाथ धोने की आदत को विकसित करना होगा।
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-लेकिन शुरुआती स्तर पर ये आदतें विकसित करना हर किसी के लिए एक बड़ी चुनौती थी। खासतौर पर लंबे समय तक अमेरिका के राष्ट्रपति ने मास्क कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए मास्क की उपयोगिता को स्वीकार नहीं किया। हालांकि बाद में उन्होंने इसके महत्व को मानते हुए ना केवल खुद इस मास्क का उपयोग किया बल्कि बाकी लोगों को भी इसके उपयोग के लिए प्रेरित किया।
क्या है डब्लूएचओ का डर?
-एक तरफ अमेरिका जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीफ टेड्रोस पर कोरोना से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाता रहा है, वहीं अब ट्रेड्रोस इस संक्रमण के मामलों की बढ़ती संख्या के लिए खुलकर ट्रंप का नाम ले रहे हैं। ऐसे में आपके मन में यह सवाल आना जायज है कि आखिर ट्रंप को क्यों दोष दिया जा रहा है?
क्यों बढ़ रहा है कोरोना संक्रमण?
-दरअसल, इस साल अमेरिका में चुनाव होने हैं। इन चुनावों को ध्यान में रखते हुए ट्रंप ने लोगों के घरों में बंद रहने, मास्क लगाने और हर तरह की बंदिश में बंधकर जीवन जीने की स्थिति को स्वीकार नहीं किया। जब अमेरिका के लोग कोरोना संक्रमण काल में आराम से अपने काम और डेली लाइफ को जी रहे थे, उस बीच वहां इस बीमारी के मामले काफी तेजी से बढ़े थे।
-अब एक बार फिर अमेरिका में कोविड-19 के केसेज की संख्या बढ़ने लगी है। इसके साथ ही एशिया के कुछ देशों में भी कोरोना का प्रकोप बना हुआ है, जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बात पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए टेड्रोस ने कहा है कि इन देशों द्वारा डब्लूएचओ के जारी नियमों को ना मानने के कारण ही यहां कोविड-19 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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-अमेरिका के साथ ही ब्राजील के राष्ट्रपति भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क और लॉकडाउन का विरोध करते रहे हैं। अब क्योंकि वहां इस वायरस से मरनेवालों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक करीब 75 हजार है तो इसके लिए WHO ब्राजील के राष्ट्रपति को दोषी मान रहा है।
महत्वपूर्ण हैं ये तीनों नियम
-हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात को खुलकर स्वीकार कर रहे हैं कि भले ही मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना से बचने की गारंटी ना हों। लेकिन ये कोरोना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती हैं।
कोरोना पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन्स
-इन नियमों का पालन करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होता है तो उस व्यक्ति के शरीर में यह संक्रमण बहुत घातक स्तर पर नहीं पहुंच पाता है यदि समय रहते उसे इलाज मिल जाए।
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-ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यदि किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण कोरोना ड्रॉपलेट्स आपके शरीर में प्रवेश भी कर जाती हैं तो मास्क और सोशल डडिस्टेंसिंग के कारण उनकी संख्या बहुत मामूली होती है। इस कारण आपके शरीर की इम्यूनिटी ही उस वायरस को खत्म करने का काम कर सकती है।
-यदि आप इस वायरस के कारण बीमार भी पड़ते हैं तो आपको माइल्ड सिंप्टम्स होंगे और आपके जल्दी स्वस्थ होने की संभावना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करनेवाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक होगी।
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