बर्लिन: जर्मनी (Germany) के बाडेन-वुर्टेमबर्ग (Baden-Württemberg) राज्य में स्कूलों में बुर्का (Burqa) पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा है कि बुर्का पहनने वालों को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. सरकार के इस कदम पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. साथ ही यह बहस भी शुरू हो गई है कि राष्ट्रीय स्तर पर बुर्का बैन किया जाना चाहिए?
अधिकांश जर्मन सांसदों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में निकाब और बुर्के को प्रतिबंधित करना सही है. हालांकि, कुछ लोगों को डर है कि इस कदम से समाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा. दरअसल, इस साल फरवरी में एक 16 वर्षीय स्कूली छात्रा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे नकाब पहनने के चलते स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था. इसके बाद कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाया. इसी के मद्देनजर सरकार ने अब कानून बनाकर बुर्का पर प्रतिबंध लगा दिया है.
इस घटना के बाद जर्मनी में बहस छिड़ गई थी कि क्या स्कूलों में बुर्का या नकाब पहनने की इजाजत दी जानी चाहिए. पड़ोसी राज्य श्लेस्विग-होल्स्टीन में भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बुर्का बैन करने की कोशिश हुई, लेकिन वामपंथी ग्रीन पार्टी ने इसका समर्थन नहीं किया. वैसे, ग्रीन पार्टी इस मुद्दे पर बंटी हुई है.
कई देशों में है प्रतिबंध
जर्मनी के पड़ोसी देश नीदरलैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रिया और डेनमार्क में बुर्के को लेकर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध हैं. फ्रेंच स्कूलों में 2004 से इस पर बैन लगा हुआ है. वहीं, फ्रांस, बेल्जियम और बुल्गारिया ने पहले ही यूनिवर्सल बैन लागू कर दिया है, जबकि नीदरलैंड और यूरोप के कुछ देशों में इस पर आंशिक प्रतिबंध है.

