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नई दिल्‍ली: गलवान घाटी में चीन और भारत के बीच जारी गतिरोध को लेकर दोनों देश के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है.  इस साल लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल पर चीन (China) की तरफ से बड़ी तादाद में सेना की तैनाती बढ़ाई गई है. अब भी लद्दाख क्षेत्र में तैनात चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 40,000 से अधिक सैनिकों की भारी टुकड़ी मौजूद है. हालांकि चीन की सेना का सामना करने के लिए भारत की आर्मी और वायुसेना अपने परिवहन एयरक्राफ्ट की पूरी ताकत लगाने की तैयारी कर रही है.

सूत्रों के मुताबिक जानकारी मिली है कि ”अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे ये लगे कि चीन युद्ध न करने की स्थिति में है. बता दें कि चीन की PLA रेड आर्मी से भी पहचानी जाती है. PLA दुनिया की सबसे बड़ी सेना है और इसका बजट दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है. चीन अपनी जीडीपी का 1.9 प्रतिशत रक्षा में लगाता है.
 
चीन का पीएलए 5 अंगों में विभाजित है, पहला है थल सेना जिससे PLA कहा जाता है. इसका काम चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा विकास के मुद्दे देखना है. यह जमीन और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा का खास तौर पर खयाल रखती है. इसके पांच थिएटर कमान हैं जिसमें पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी और मध्य कमान शामिल हैं. इसके अलावा दो सैन्य कमान और हैं जिसे शिनजियांग सैन्य कमान और तिब्बत सैन्य कमान का जिम्मा भी इसी के हवाले हैं.

चीनी सेना का दूसरा हिस्सा है PLAN यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी. इसमें पनडुब्बी, सैन्य जहाज, एविएशन, मैरीन और समुद्री सीमा रक्षा बल शामिल हैं. इसके अंतर्गत डोंघाई, नन्हा और बेइहाई जहाजी बेड़े भी आते हैं. चीनी नेवी तब से बहुत ज्यादा चर्चा में है जब चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपना वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश की है. 

चीनी सेनी का तीसरा ताकत हिस्सा है वायुसेना जिसे PLAAF यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स कहा जाता है. भारत के साथ बड़े विवाद में चीन की एयर फोर्स का अहम योगदान है. चीन की वायुसेना में एविशन सिस्टम, हवा से हवा में, हवा से जमीन और जमीन से हवा में मार करने वाले अस्त्र, उन्नत किस्म के रडार, आधुनिक तकनीक से सुसज्जित सैन्य संचार व्यवस्था आदि शामिल है. उसके पांच एयर फोर्स थिएटर कमान हैं. जिसमें एयर बेस, एविएशन ब्रिगेड, रडार ब्रिग्रेड शामिल हैं.

चीन और भारत की सेनाओं में फर्क
दोनों देशों की रक्षा प्रणाली की तुलना करें तो चीन भारत से आगे है लेकिन फिर भी हिंदस्तान ड्रैगन का मुकाबला करने में सक्षम है.  बेलफर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स (BCSIA) के अनुसार, पश्चिमी थिएटर कमान और तिब्बत और शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत चीन के पास कुल 2,00,00-2,30,000 चीनी पैदल सैनिक हैं. जबकि भारत के पास करीब 2 लाख 25 हजार पैदल सैनिक हैं. बता दें कि 2019 में चीन ने रक्षा क्षेत्र पर 261 अरब डॉलर खर्च किए तो भारत का रक्षा बजट 71.1 अरब डॉलर का था. चीन के पास हथियार ज्यादा हैं जबकि सैन्य फोर्स भारत के पास ज्यादा है.  

हार्वर्ड केनेडी स्कूल बेलफर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स के मुताबिक, चीन की वायुसेना से अधिक शक्तिशाली है इंडियन एयरफोर्स. भारत के पास मिराज 2000 और सुखोई Su-30 जैसे जेट्स हैं जो चीन के J10, J11 और Su-27 विमानों के मुकाबले इंडियन एयरफोर्स को बढ़त दिलाते हैं. भारत के पास सभी मौसम में उड़ सकने वाले मल्टी रोल एयरक्राफ्ट हैं, जबकि चीन के J-10 के पास ही यह क्षमता है. 

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