Obsessive Compulsive Disorder: Mental Disorder: विद्या बालन भी रही हैं OCD का शिकार, जानिए क्या बला है यह – vidya balan suffered with this mental disorder called ocd or obsessive compulsive disorder know the details in hindi

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें हम किसी व्यक्ति की सनक समझकर छोड़ देते हैं। उसका मजाक उड़ाते हैं या उस पर गुस्सा करने लगते हैं। लेकिन यह नहीं समझ पाते कि वह किसी मानसिक समस्या से ग्रसित हो रहा है और उसे सही इलाज के साथ ही हमारे सहयोग की आवश्यकता है। ओसीडी (Obsessive Compulsive Disorder) भी ऐसी ही एक समस्या है…

कुछ साल पहले मीडिया में यह खबर आई थी कि विद्या बालन ओसीडी से पीड़ित हैं और इसका उपचार करा रही हैं। ओसीडी यानी Obsessive Compulsive Disorder एक मानसिक समस्या है, जो मुख्य रूप से एक मनोविकार है और किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि काउंसलिंग और कुछ दवाओं के साथ इस समस्या पर आराम से नियंत्रण पाया जा सकता है।

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OCD से ग्रसित रोगी एक ही काम को करता है बार-बार

ये होते हैं ओसीडी के लक्षण

-ओसीडी से ग्रसित व्यक्ति को एक ही काम बार-बार करने की आदत होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह भूल जाता है कि उसने यह काम किया है या नहीं। साथ ही उसे यह भी लगता है कि उसे एक बार चेक जरूर करना चाहिए कि काम सही से हुआ है या नहीं। जैसे सफाई करने की आदत अगर किसी को हो जाती है तो वो बार-बार चीजों को साफ करता रहता है। तब तक साफ करता रहता है, जब तक कि उसके मन में यह संतुष्टि ना आ जाए कि चीजें ठीक से साफ हो गई हैं। हर मरीज के लिए ये काम अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को सफाई की सनक हो सकती है तो किसी को बार-बार ब्रश करने की।

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-कुछ लोगों को नहाने में बहुत समय लगता है। क्योंकि वे अपने शरीर पर कई-कई बार साबुन लगाते रहते हैं। कभी उन्हें लगता है कि अभी ठीक से साफ नहीं हुआ है। साथ ही कुछ लोगों को तो ये याद ही नहीं रहता है कि वे साबुन पहले भी लगा चुके हैं! इसलिए बार-बार साबुन लगाकर नहाते हैं। कुछ पेशंट्स को लगता है कि तीन बार साबुन लगाने के बाद ही उनका शरीर ठीक से साफ होगा…यानी वे काउंटिंग करके हर काम करते हैं। दो बार ब्रश करना है, तीन बार साबुन लगाना है आदि।

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-ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति पैसों को एक बार नहीं बल्कि कई-कई बार गिनते हैं। ताला लगाने के बाद उन्हें डाउट रहता है कि ताला ठीक से नहीं लगा है। वे ताला बार-बार खोलकर बंद करते हैं, ताले को खींचकर देखते हैं और फिर अपने साथवाले किसी व्यक्ति को बाद में भी ताला चेक करने के लिए कहते हैं। क्योंकि उन्हें खुद पर भी हर समय डाउट बना रहता है।

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ओसीडी से ग्रसित लोगों को हर समय रहता है डाउट

इन बातों का प्रभाव

-जिस व्यक्ति में भी इस तरह के डिसऑर्डर होते हैं, उसके सामाजिक जीवन के साथ ही करियर और पर्सनल लाइफ पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। क्योंकि उन्हें हर काम को करने में बहुत अधिक वक्त लगने लगता है। इस कारण कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता। इससे झुंझलाहट और स्ट्रेस की समस्या होने लगती है। साथ ही एक काम को बार-बार करने के कारण उनके रिश्ते भी खराब होने लगते हैं।

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उपचार से जुड़ी बातें


-ओसीडी का इलाज संभव हैं। आप इसके लिए किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक यानी सायकाइट्रिस्ट के पास जा सकते हैं। इस तरह की समस्याएं आज के समय में बहुत ही सामान्य हैं। क्योंकि बढ़ते तनाव के कारण शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा रहा है और मनोरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे पहले कि यह समस्या किसी बड़ी मानसिक बीमारी का रूप ले, आपको अपने इलाज पर ध्यान देना चाहिए।


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