DNA Indias diplomatic victory saudi arab breaks relation with pakistan | DNA ANALYSIS: भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि, सऊदी अरब ने पाकिस्तान से तोड़ी ‘रिश्तेदारी’

नई दिल्ली: आज हम भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि और पाकिस्तान के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अपमान का विश्लेषण करेंगे. इन दोनों ही बातों के केंद्र में सऊदी अरब है. सऊदी अरब ने भारत का साथ देते हुए कैसे पाकिस्तान का सबसे बड़ा कूटनीतिक अपमान किया है उसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि जब पाकिस्तान की सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तान की तरफ से माफी मांगने सऊदी अरब पहुंचे तो सऊदी अरब के शासक मोहम्मद बिन सलमान ने उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया. जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रमुख भी थे लेकिन सऊदी अरब ने पाकिस्तान के दो सबसे शक्तिशाली अधिकारियों का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और कई बार विनती के बावजूद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दोनों से नहीं मिले और आखिरकार दो दिनों तक सऊदी अरब की राजधानी रियाद में रहने के बाद उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा.

सऊदी अरब पाकिस्तान को ये सबक क्यों सिखा रहा है और कैसे ये इस्लामिक दुनिया में आया बहुत बड़ा बदलाव है. ये अब आपको समझना चाहिए.

दुनियाभर के 20 प्रतिशत मुसलमान अरब देशों में रहते हैं
पूरी दुनिया में 53 ऐसे देश हैं जहां इस्लाम सबसे बड़ा धर्म है और इन 53 इस्लामिक देशों में सबसे शक्तिशाली सऊदी अरब को माना जाता है. इसकी तीन बड़ी वजहें है. पहली ये कि सऊदी अरब के पास दुनिया का 18 प्रतिशत तेल भंडार है. दूसरी ये कि आर्थिक रूप से सऊदी अरब बहुत मजबूत है और सिर्फ अरब देशों की बात की जाए तो सऊदी अरब हर पैमाने पर दूसरे देशों से न सिर्फ बहुत आगे है, बल्कि पहले नंबर पर है.

चाहे बात अर्थव्यवस्था की हो, सेना की हो या फिर दुनिया की राजनीति में दखल की इस्लामिक देशों में बहुत कम देश ही सऊदी अरब को चुनौती दे सकते हैं. तीसरी वजह ये है कि सऊदी अरब पूरी दुनिया में इस्लाम धर्म का केंद्र है और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले मक्का और मदीना जैसे स्थान सऊदी अरब में ही हैं. इन्हीं वजहों से कतर, कुवैत और इराक को छोड़कर  सऊदी अरब के संबंध अरब लीग के सभी देशों के साथ बहुत अच्छे हैं और दुनियाभर के 20 प्रतिशत मुसलमान इन्हीं अरब देशों में रहते हैं.

पाकिस्तान इंडोनेशिया के बाद दूसरे नंबर पर
दूसरी तरफ पाकिस्तान है जो सऊदी अरब की तरह ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन Organisation of Islamic Cooperation यानी OIC का सदस्य है. मुसलमानों की आबादी के मामले में पाकिस्तान इंडोनेशिया के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है, पाकिस्तान दुनिया का अकेला ऐसा इस्लामिक देश है जिसके पास न्यूक्लियर हथियार हैं.

इसी वजह से दुनिया के कई इस्लामिक देश पाकिस्तान के खिलाफ जाने की हिम्मत आसानी से नहीं कर पाते थे और जरूरत पड़ने पर अक्सर उसकी मदद भी किया करते थे. लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं और सऊदी अरब जैसे देश न सिर्फ पाकिस्तान को दिया गया कर्ज वापस मांग रहे हैं, बल्कि बात-बात पर पाकिस्तान का अपमान भी कर रहे हैं और ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि भारत के मुद्दे पर पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश आमने सामने आ गए हैं और ये भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि है कि सऊदी अरब ने भारत की कीमत पर पाकिस्तान के साथ जाने से इनकार कर दिया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बयान ने बढ़ाई मुश्किलें
ये कैसे हुआ और भारत ने इस्लामिक दुनिया का नेतृत्व करने वाले सऊदी अरब को पाकिस्तान से कैसे छीन लिया. इसे समझने के लिए आपको पिछले कुछ दिनों में हुए घटनाक्रमों के बारे में जानना होगा.

5 अगस्त को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का एक वर्ष पूरा होने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक बयान दिया था. उन्होंने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर Organisation of Islamic Cooperation और इसका नेतृत्व करने वाला सऊदी अरब पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहा है. उन्होंने सऊदी अरब को धमकी देते हुआ कहा कि पाकिस्तान मक्का और मदीना के लिए हमेशा कुर्बानी देने को तैयार रहता है. लेकिन अगर सऊदी अरब पाकिस्तान की बात नहीं सुनता है तो इमरान खान को चाहिए कि वो बिना सऊदी अरब के ही इस मुद्दे पर आगे बढ़ें यानी सऊदी अरब पर भरोसा करना छोड़ दे.

इस बयान के बाद सऊदी अरब इतना नाराज हो गया कि उसने पाकिस्तान को दिया गया साढ़े सात हजार करोड़ रुपये का लोन फौरन चुकाने के लिए कह दिया. डूबती अर्थव्यवस्था की वजह से पाकिस्तान के पास इतने पैसे थे ही नहीं इसलिए पाकिस्तान ने चीन से उधार लेकर सऊदी अरब का ये कर्ज चुकाया. सऊदी अरब ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए वर्ष 2018 में उसे 46 हजार करोड़ रुपये का उधार दिया था लेकिन कर्ज का एक हिस्सा चुकाए जाने के बाद भी सऊदी अरब नहीं रुका और अब उसने पाकिस्तान से साढ़े सात हजार करोड़ रुपये की एक किस्त और वापस मांगी ली है, यानी पाकिस्तान को कुल 15 हजार करोड़ रुपए जल्द से जल्द सऊदी अरब को वापस लौटाने हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल पर जो बयान दिया था वो एक मिनट 19 सेकेंड का था. लेकिन इसमें उन्होंने सऊदी अरब को जो धमकी दी वो सिर्फ 15 सेकेंड की थी और अब इस 15 सेकेंड की धमकी के बदले में पाकिस्तान को 15 हजार करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं यानी सऊदी अरब के खिलाफ शाह महमूद कुरैशी का एक एक शब्द पाकिस्तान को एक हजार करोड़ रुपये का पड़ा. 

ये भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत कैसे है?
इसे आप भारत की भी बड़ी कूटनीतिक जीत मान सकते हैं क्योंकि, इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कश्मीर के मुद्दे पर अरब देशों ने पाकिस्तान की जगह, भारत का साथ दिया है. पाकिस्तान ने पूरा जोर लगा लिया लेकिन वो मुस्लिम देशों के संगठन OIC की हाई लेवल मीटिंग नहीं बुला सका और न ही इन देशों से कश्मीर के मामले में भारत की आलोचना करवा सका.

यानी भारत ने पाकिस्तान और अरब देशों को अलग करके, पुराने कूटनीतिक समीकरण बदल दिए और जो अरब देश, पहले पाकिस्तान का साथ देते थे, वो अब भारत के साथ खड़े हैं. सऊदी अरब के साथ भारत के बहुत करीबी रिश्ते हैं और इतिहास में पहली बार सऊदी अरब की अगुवाई में सभी अरब देश अब भारत के करीब आ गए हैं, जबकि हर देश से कर्ज मांगने वाला और कश्मीर में ही उलझा रहने वाला पाकिस्तान अलग थलग है.

बयान से पलटे शाह महमूद कुरैशी 
सऊदी अरब की नाराजगी के बाद शाह महमूद कुरैशी अपने बयान से पलट गए और वो सऊदी अरब के साथ अपने देश के ऐतिहासिक रिश्तों की दुहाई देने लगे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इसके बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को उधार में तेल बेचने का डेढ़ वर्ष पुराना कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म कर दिया.

इसके बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और पाकिस्तान के सेना प्रमुख और ISI चीफ को आनन फानन में सऊदी अरब भेजा गया और वहां इन दोनों के साथ क्या सलूक हुआ ये हम आपको बता चुके हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है पाकिस्तान चीन के इशारे पर सऊदी अरब से दुश्मनी मोल ले रहा है क्योंकि, चीन पाकिस्तान को इस्लामिक दुनिया का लीडर बनाना चाहता है. लेकिन एक बहुत मशहूर कहावत है, विनाश काले विपरीत बुद्धि.

पाकिस्तान के साथ ठीक ऐसा ही हो रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने झूठा दावा करते हुए कहा कि सऊदी अरब के साथ उनके देश के रिश्ते आज भी मजबूत हैं और वो मुस्लिम दुनिया को बांटने की नहीं बल्कि जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन इसी इंटरव्यू के दौरान इमरान खान से एक और कूटनीतिक भूल हो गई. उन्होंने इजरायल के मुद्दे पर कहा कि वो कभी भी इजरायल को स्वीकार नहीं कर सकते. इसके पीछे उन्होंने तर्क ये दिया कि अगर पाकिस्तान ने इजरायल को अपना लिया तो फिर उसे कश्मीर भी भारत को दे देना चाहिए.

इमरान खान ने इजरायल की तुलना कश्मीर से कर दी
इजरायल के अस्तित्व को नकारकर और इसकी तुलना कश्मीर से करके इमरान खान ने कैसे अपने ही पांव पर एक बार फिर से कुल्हाड़ी मार ली है, ये हम आपको बताते हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कल एक इंटरव्यू दिया था. पिछले हफ्ते ही अरब दुनिया के एक बड़े देश संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने इजरायल के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बाद इतिहास में पहली बार इजरायल और UAE के कूटनीतिक संबंध सामान्य हो गए हैं. अरब और मुस्लिम दुनिया के ज्यादातर देश इजरायल को अपना दुश्मन नंबर वन मानते हैं.

लेकिन अमेरिका की पहल पर UAE ने इजरायल के साथ समझौता करके इस्लामिक दुनिया के ज्यादातर देशों को बहुत बड़ा झटका दिया है और अब अमेरिका चाहता है कि UAE के बाद सऊदी अरब भी इजरायल के साथ अपने रिश्तों को सामान्य कर ले. सऊदी अरब के साथ अमेरिका के रिश्ते बहुत अच्छे और मजबूत हैं, इसलिए ये काम असंभव नहीं है.

इस्लामिक दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी?
अगर अमेरिका इस मुश्किल काम को अंजाम देने में सफल रहा तो इसके बाद इस्लामिक दुनिया दो हिस्सों में बंट जाएगी. एक तरफ इजरायल को मान्यता देने वाले देश होंगे और दूसरी तरफ इजरायल से नफरत करने वाले देश होंगे, जबकि भारत के संबंध इजरायल के साथ भी अच्छे हैं और ज्यादातर इस्लामिक देशों के साथ भी भारत के संबंध पहले से बहुत मजबूत और बेहतर हो चुके हैं.

ऐसे में इस्लामिक दुनिया में पाकिस्तान का अलग-थलग पड़ जाना उसकी डूबती अर्थव्यवस्था के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है.

पाकिस्तान पर इस समय 43 लाख करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय कर्ज है. ये अंतरराष्ट्रीय कर्ज पाकिस्तान की GDP का 90 प्रतिशत है. पाकिस्तान हर साल इस कर्ज पर 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये का ब्याज चुकाता है यानी पाकिस्तान को हर सेकेंड 51 हजार रुपये ब्याज के तौर पर देने पड़ते हैं. और इसी वजह से आज की तारीख में पाकिस्तान के हर नागरिक पर इस समय दुनिया के 92 हजार रुपये उधार हैं.

ऐसे में जो इस्लामिक देश पाकिस्तान की मदद करते हैं. उनसे नाराजगी पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ने वाली है. भारत में एक कहावत है कि  जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारने चाहिए. लेकिन हर सेकेंड अपने नागरिकों की जेब से दुनिया को 50 हजार रुपये का ब्याज चुकाने वाला पाकिस्तान अपनी चादर को कश्मीर तक फैलाना चाहता है और उसकी ये गलती उसे बर्बादी की कगार पर ले आई है.

संयुक्त राष्ट्र की महासभा में सिर्फ कश्मीर पर बोलते रहे इमरान
आपको याद होगा जब पिछले साल इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भाषण दिया था. तब उन्होंने सिर्फ कश्मीर की बात की थी. तब इमरान खान को भाषण देने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया था. लेकिन वो 50 मिनट तक सिर्फ और सिर्फ कश्मीर पर बोलते रहे और उन्होंने 12 बार नरेंद्र मोदी, 51 बार इस्लाम और 3 बार युद्ध शब्द का इस्तेमाल किया इन सबके केंद्र में सिर्फ कश्मीर था. लेकिन इसके बावजूद दुनिया के गिने चुने देशों को छोड़कर किसी ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया.

संयुक्त राष्ट्र की महासभा के दौरान पाकिस्तान ने मलेशिया और टर्की के साथ मिलकर इस्लामिक दुनिया में एक नया गुट बनाने की कोशिश की थी. इस पर भी सऊदी अरब पाकिस्तान से बहुत नाराज हो गया था और सऊदी अरब के दबाव में पाकिस्तान ने आखिरी मिनट में मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था.

इस्लामिक देशों पर भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ा
इसके विपरीत भारत के संबध इस्लामिक देशों से बहुत मजबूत हो चुके हैं. इन देशों के साथ ना सिर्फ भारत का व्यापार और रणनीतिक साझेदारी बेहतर हुई है बल्कि मुस्लिम देशों के बीच भारत का प्रभाव कितनी तेजी से बढ़ रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 6 मुस्लिम देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं.

2016 में प्रधानमंत्री मोदी को सऊदी अरब ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया था जिसका नाम है King Abdulaziz Sash Award. इसके अलावा 2019 में Order of Zayed पुरस्कार देकर UAE भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित कर चुका है. इसके अलावा वर्ष 2019 में बहरीन और मालदीव्स, 2018 में फिलीस्तीन, और 2016 में अफगानिस्तान जैसे देश भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने यहां के सर्वोच्च सम्मान दे चुके हैं. ये सारे मेडल बताते हैं कि इन इस्लामिक देशों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के संबंध कितने घनिष्ठ हैं और नोट करने वाली बात ये है कि ये सम्मान हासिल करने के लिए भारत कभी धर्म को बीच में नहीं लाया.

मिडिल ईस्ट के देशों में काम करते हैं 70 लाख भारतीय
मिडिल ईस्ट के देशों में इस समय 70 लाख भारतीय काम करते हैं. ये लोग ना सिर्फ इन देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं बल्कि हर साल भारत में अपने घरों में भी लाखों करोड़ों रुपये की रकम भेजते हैं. इनमें सबसे आगे UAE में काम करने वाले भारतीय हैं जो हर साल 10 लाख करोड़ रुपये की धनराशि भारत भेजते हैं. 8 लाख 41 हजार करोड़ रुपये के साथ सऊदी अरब दूसरे नंबर पर है, तीसरे नंबर पर कुवैत है, जहां रहने वाले भारतीय हर साल 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा भारत भेजते हैं.

इसके विपरीत मिडिल ईस्ट के देशों में 40 लाख पाकिस्तानी काम करते हैं जो हर साल सिर्फ 80 हजार करोड़ रुपये अपने देश में भेज पाते हैं. लेकिन इतनी खराब स्थिति के बावजूद इमरान खान इस्लामिक देशों से अपने संबंधों को लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं और आंकड़े हर बार उनके दावों को झूठा साबित करते हैं. अब पाकिस्तान उधार चुकाने से लेकर अपने आप को बचाने तक के लिए चीन की तरफ देख रहा है और यही वजह है कि कल पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चीन की जमकर तारीफ की और यहां तक कह दिया कि कुछ इस्लामिक देश सिर्फ इसलिए भारत के साथ हैं. क्योंकि अमेरिका के इशारे पर ये देश, भारत को चीन के मुकाबले में खड़ा करना चाहते हैं.

लेकिन इमरान खान चीन में वीगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर कुछ नहीं बोलते. कल ही हमने आपको बताया था कि चीन कैसे अपने यहां रहने वाले ढाई करोड़ मुसलमानों को चाइनीज बनाने में जुटा है और इसके लिए वो इन मुसलमानों पर तरह तरह के अत्याचार कर रहा है. लेकिन जब भी इमरान खान से इस बारे में पूछा जाता है तो वो इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर देते हैं. भारत और कश्मीर के मुसलमानों के रहनुमा और ठेकेदार बनने वाले इमरान खान चीन में मुसलमानों के दमन के सवाल पर चुप हो जाते हैं.

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