नई दिल्ली: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल की मुलाकात हुई तो दोनों ने एक दूसरे का अभिवादन नमस्ते के साथ किया. दुनिया के कई नेता और हस्तियां अपने जीवन में नमस्ते को शामिल कर चुके हैं क्योंकि, कोरोना वायरस के दौर में किसी से हाथ मिलाना या गले मिलना खतरे से खाली नहीं है.
नमस्ते शब्द संस्कृत के नमह शब्द से बना है. नमस्ते में नमह का अर्थ है-झुकना और ते का अर्थ है-आपके लिए, यानी नमस्ते वो मुद्रा है जब आप किसी को झुककर प्रणाम करते हैं.
नमस्कार सबसे विनम्र तरीका
नमस्ते भारतीय संस्कृति और परंपरा में अभिवादन का सबसे प्रचलित तरीका रहा है. आप अपने दोस्तों से, बड़ों से या छोटों से नमस्ते कहकर मिल सकते हैं क्योंकि, ये एकमात्र ऐसा शब्द है, जो किसी से मिलते वक्त उम्र, वर्ग और रिश्ते का भेद नहीं करता, जबकि नमस्ते के अंग्रेजी संस्करण हैलो में ये स्वतंत्रता नहीं है. सोच कर देखिए, आप हर किसी से हैलो नहीं कह सकते लेकिन नमस्कार सबसे विनम्र तरीका है.
नमस्कार को तेलुगू में नमस्कारमुलु, कन्नड़ में नमस्कारगलु, तमिल में वणक्क्म, बांग्ला में नोमोश्कार और असमिया में नोमोस्कार कहते हैं. वैसे अगर आप चाहें तो बिना कुछ बोले भी नमस्ते कर सकते हैं. बात सिर्फ कोरोना की नहीं है, नमस्कार हमारे संस्कारों का हिस्सा है. हमारे DNA में है इसलिए आपको अभिवादन के इस तरीके को बढ़ावा देना चाहिए.
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