मंत्री ने जवाब में कहा कि क्रय नीति तत्कालीन सरकार ने जो बनाई है, उसी का पालन हो रहा है. (सांकेतिक फोटो)
सत्तापक्ष के विधायक संतराम नेताम (MLA Santram Netam) ने सरकार से सवाल करते हुए कहा है कि बस्तर के लोगों की शिकायत है, वे जिस ब्रांड की शराब चाहते हैं वह यहां पर नहीं मिल रही है.
खास बात यह है कि विधायक ने इस दौरान मंत्री से और अन्य सवाल भी किए. उन्होंने पूछा कि प्रदेश में कितनी देशी और विदेशी शराब की दुकानें संचालित हैं. वर्ष 2019-20 तक शासन को शराब के विक्रय से कितना लाभ हुआ. वहीं, संचालित शराब दुकानों में विदेशी मदिरा आपूर्ति के लिए देशी-विदेशी मदिरा किन किन कंपनियों और फर्मों से खरीदी जा रही हैं. उनके नाम व स्थान सहित जानकरी दें. साथ ही क्रय नीति कब बनाई गई, इसके बारे में डिटेल्स दें.
वर्तमान में 337 देशी 321 विदेशी शराब की दुकानें संचालित हैं
वहीं, मंत्री ने जवाब में कहा कि क्रय नीति तत्कालीन सरकार ने जो बनाई है, उसी का पालन हो रहा है. कंपनी की तरफ से जो लिस्ट आती है उसी के आधार पर रेट तय होता है. मार्केटिंग कॉर्पेराशन खरीदता है सरकार नहीं खरीदती है. मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 337 देशी 321 विदेशी शराब की दुकानें संचालित हैं. 2019 – 20 तक शासन को शराब के विक्रय से 6000 करोड़ के आसपास का राजस्व प्राप्त हुआ है. जिस ब्रांड की शराब की डिमांड नहीं थी उसकी खरीदी क्यों
जानकारी के मुताबिक, विधायक संतराम नेताम के अलावा पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने भी सरकार से सवाल पूछा है. उन्होंने कहा है कि जिस ब्रांड की शराब की डिमांड नहीं थी, उसकी खरीदी कर उसे कालातीत कर दिया गया. यह बेहद गंभीर विषय है.किसी व्यक्ति को उपकृत करने के लिए शराब की खरीदी की गई, बाद में उसे कालातीत कर दिया गया. अजय चंद्राकर ने कहा कि एक कंपनी विशेष से अधिक और एक कंपनी विशेष से कम खरीदी की गई. कई ऐसी भी कंपनी इन से शराब खरीदी नहीं गई,
जवाब देने के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से टोकाटाकी पर अजय चंद्राकर ने जताई नाराजगी.
संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कवासी लखमा सक्ष्म मंत्री हैं. वह बेहतर ढंग से जवाब भी दे रहे हैं. वहीं, जवाब नहीं आने पर विधायक अजय चंद्राकार असंतुष्ट हो गए.

