नई दिल्ली: भारत (India) से दुश्मनी मोल लेना चीन (China) को काफी भारी पड़ रहा है. हर दिन उसे कोई न कोई झटका लग रहा है. थाईलैंड के बाद अब जापान (Japan) से उसके लिए बुरी खबर आई है. जापानी सरकार ने ड्रैगन को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. जापान की तरफ से कहा गया है कि वह उन जापानी कंपनियों को सब्सिडी प्रदान करेगा, जो चीन के बजाय आसियान (ASEAN) देशों में अपना सामान तैयार करेंगी. देशों की इस सूची में भारत और बांग्लादेश का नाम शामिल किया गया है. सीधे शब्दों में कहें तो चीन छोड़कर भारत आने वाली कंपनियों को जापानी सरकार पुरस्कृत करेगी.
Japan’s Ministry of Economy, Trade and Industry will provide subsidies to Japanese manufacturers which shift their manufacturing from China to ASEAN countries. It will add India and Bangladesh to the list of relocation destinations: Japanese media
— ANI (@ANI) September 4, 2020
थाईलैंड भी दे चुका है झटका
इससे पहले थाईलैंड बीजिंग को जोर का झटका दे चुका है. थाई सरकार ने पहले पनडुब्बी सौदा निलंबित किया फिर क्रा कैनाल परियोजना को रद्द करने की बात कही, जिस पर चीन लंबे समय से नजरें जमाए बैठा था. भारत के साथ हालिया विवाद के मद्देनजर दुनियाभर में चीन के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है. नई दिल्ली ने जहां डिजिटल स्ट्राइक करते हुए ड्रैगन के 100 से ज्यादा ऐप प्रतिबंधित किये हैं, वहीं की अन्य देश भी बीजिंग के खिलाफ आगे आये हैं. इस कड़ी में अब जापान का नाम भी जुड़ गया है.
सूची में भारत और बांग्लादेश शामिल
जानकारी के मुताबिक, जापान सरकार ने पूरक बजट में एक बड़ी राशि आवंटित की है, जिसका लाभ उन कंपनियों को दिया जाएगा जो चीन से बाहर भारत और आसियान क्षेत्र में अपनी कंपनी स्थानांतरित करेंगी. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि उन जापानी निर्माताओं को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा, जो चीन के बजाय आसियान देशों में अपना सामान तैयार करेंगे. भारत और बांग्लादेश को इस स्थानांतरण गंतव्य की सूची में शामिल किया है.
दोनों देशों के बीच है विवाद
मालूम हो कि जापान और चीन के बीच सेनकाकू द्वीपों को लेकर विवाद चल रहा है. चीन जापानी नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर अपना दावा जताता रहा है. इसके बावजूद जापानी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला चीन पर काफी निर्भर है. हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान इसमें कटौती की गई है और अब जापान चाहता है कि उसकी कंपनियां चीन के बजाय भारत और आसियान देशों का रुख करें.
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