DNA India china border dispute in ladakh near LAC | चीन समझता है सिर्फ ताकत की भाषा, विवाद सुलझाने के लिए भारत को करना होगा ये काम

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच बाजी पलट चुकी है. इस बात का एक और सबूत कल सुबह-सुबह देश के सामने आ गया. एक दिन पहले ही रूस में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात हुई थी जिसके बाद कल सुबह एक संयुक्त बयान जारी किया गया. यह बयान भारत-चीन के बीच के समीकरणों में बड़े बदलाव का दस्तावेज है. लद्दाख की घटनाओं के बाद भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की इस पहली बैठक में 5 मुद्दों पर सहमति जताई गई है.

– पहली बात यह कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि सीमा पर जारी तनाव किसी के हित में नहीं है. दोनों देशों को बातचीत जारी रखते हुए तेजी से डिस्इंगेजमेंट यानी विवादित इलाकों से सैनिक हटाने का काम करना चाहिए. इसमें जोर दिया गया है कि दोनों देशों के सैनिकों को एक दूसरे से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें.

– दूसरी बात भारत और चीन इस बात पर भी राजी हैं कि दोनों देशों के बीच जो सहमतियां हैं, उनके हिसाब से तनाव कम किया जाना चाहिए. आपसी मतभेदों का असर सैनिक तनाव के रूप में सामने नहीं आना चाहिए.

– तीसरी बात यह कि दोनों देश सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल को मानेंगे. Line of Actual Control यानी LAC के इलाकों में शांति बनाए रखते हुए ऐसी कार्रवाई से बचेंगे, जिससे दोबारा झड़प की स्थिति न पैदा हो.

– संयुक्त बयान के चौथे बिंदु में सीमा विवाद सुलझाने के लिए आपसी बातचीत को जारी रखने की बात कही गई है. इस बातचीत में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोवल भारत के प्रतिनिधि होंगे और चीन का पक्ष उनके विदेश मंत्री वांग यी रखेंगे. ताकि शांति बनी रहे और दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा कायम किया जा सके.

– पांचवीं और आखिरी बात यह कि दोनों देश आपसी विश्वास कायम करने के लिए नए तरीकों में तेजी लाएंगे.

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कूटनीति की भाषा
भारत और चीन के संयुक्त बयान की जो बातें हमने आपको बताईं, उसे कूटनीति की भाषा कहते हैं. इसमें शब्दों को बहुत सोच-समझकर लिखा जाता है. लेकिन अब हम आसान भाषा में इसका मतलब आपको बताते हैं. आपने ध्यान दिया होगा कि इस बयान में कहीं भी यथास्थिति यानी Status Quo शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है. यह बात काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले भारत और चीन के ऐसे संयुक्त बयानों में भारत का सारा जोर Status Quo बनाने पर होता था. क्योंकि चीन हमारे इलाके में घुस आता था और वापस जाने को तैयार नहीं होता था. अब भारत कह रहा है कि बातचीत करते रहो जबकि चीन का जोर इस बात पर है कि LAC पर पहले की स्थिति बहाल की जाए.

भारत और चीन के बीच समीकरणों में यह बदलाव 29 और 30 अगस्त के बाद से आया है. इसी दिन पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत ने कई पहाड़ियों को अपने अधिकार में ले लिया था. ये सारी पहाड़ियां वो हैं जो भारत के नक्शे में तो थीं, लेकिन वर्ष 1962 के युद्ध के बाद से आज तक भारतीय सैनिक कभी उस इलाके में नहीं गए थे. इसके बाद भारत ने फिंगर-4 इलाके में भी कई ऊंची पहाड़ियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

LAC पर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को क्या करना चाहिए…
गलवान घाटी से लेकर पैंगोंग झील तक जिस तरह से चीन के सैनिकों ने लगातार भारत के साथ तनाव बढ़ाने का काम किया है. ऐसा पिछले कई दशकों में नहीं हुआ. भारत चाहे तो चीन के साथ आगे बातचीत करने से पहले अपनी शर्तें रख सकता है. आपको बताते हैं कि LAC पर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को क्या करना चाहिए.

– सबसे पहले भारत ये कह सकता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के सैनिकों को मई 2020 से पहले की स्थिति चले जाना चाहिए.

– इसके बाद चीन के सैनिकों के पीछे हटने की एक डेडलाइन तय होनी चाहिए. क्योंकि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत के बाद भी LAC पर तनाव में कोई कमी नहीं आई है.

india china

– और अंत में भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण किया जाना चाहिए. ताकि ये मुद्दा हमेशा के लिए सुलझाया जा सके. बॉर्डर तय होने के बाद भविष्य में चीन की सेना के लिए घुसपैठ करना बहुत मुश्किल होगा.

आपको याद होगा कि पाकिस्तान से बातचीत के में भारत हमेशा कहता रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं. उसी तरह अब चीन से बातचीत में भी भारत ने कहा है कि सीमा विवाद और कारोबार एक साथ नहीं चल सकते.

दोनों देशों के बीच पहले की तरह कारोबार नहीं चल सकता​
चीन सिर्फ ताकत की भाषा समझता है. भारत चाहे तो अपने बाजार को चीन से लड़ने का हथियार बना सकता है. यानी चीन की सरकार को साफ शब्दों में ये बता दिया जाए कि अगर चीन ने अपना रवैया नहीं बदला तो दोनों देशों के बीच पहले की तरह कारोबार नहीं चल सकता. भारत ने पाकिस्तान के साथ भी यही किया था और पाकिस्तान के दोस्त चीन को भी यही भाषा समझ में आएगी.

चीन पर भरोसा न करने की वजह
चीन पर भरोसा न करने की एक और वजह है. ZEE NEWS को एक बड़ी खबर मिली है.

– पहला अपडेट ये है कि अब LAC पर चीन के सैनिक हथियारों के साथ दिखाई दे रहे हैं. भारत और चीन के बीच पहले किए गए समझौतों के मुताबिक दोनों देशों के सैनिक LAC पर हथियार लेकर नहीं जाते हैं.

– LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों के रुकने की व्यवस्था की जा रही है. माना जा रहा है कि चीन ने आने वाली सर्दियों में अपने सैनिकों को LAC पर रखने का इंतजाम शुरू कर दिया है.

– और तीसरी बड़ी बात चीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को LAC के करीब तैनात कर दिया है.

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