हमर छत्तीसगढ़ ला जानना हे त गांव ना रहि के जान डारहू. कका – काकी, ममा – मामी, भइया – भौउजी के नता ला सब्बो जात के मन निभाथें अउ सब्बो मान पाथें.
- News18Hindi
- Last Updated:
September 16, 2020, 12:11 AM IST
धरम – करम दुनो जाँवर – जींयर आंवय एक झन ला फरक परथे त दूसर मा असर दिखथे. समाज ला तरो ताजा रखे बर धरम – करम दुनो जरूरी हे. बीच मा एक ठन डांड़ परगे ओतके मा पूरा ब्रह्मांड हिल जाथे. डांड़ हा ऊर्जा अउ रद्दा देखाय के गियान दिही अइसे सोच के विधाता हा धरम के साथ करम ला जोड़ के राखे हे.
हमर छत्तीसगढ़ ला जानना हे त गांव ना रहि के जान डारहू. कका – काकी, ममा – मामी, भइया – भौउजी के नता ला सब्बो जात के मन निभाथें अउ सब्बो मान पाथें.
फूल -ददा अउ फूल – दाई के किस्सा हमर छतीसगढ़ भा प्रसिद्ध हे. हिन्दू – मुस्लिम एकता के मिसाल हे. एक दुसर के धार्मिक आयोजन म बढ़ चढ़ के भाग लेथें. फुल – ददा कहूं आगे त ओखर आगू सब्बो रिस्ता फीका पर जाथे. नियाय के बात होवय चाहे अन्याय के फुल – ददा ला संघरना जरूरी हे.सुख – दुख सब्बो जगा के अपन – अपन नेंग रइथे. नेंग करे मा जाति – पाति के भेदभाव नइ राहय. खेती किसानी , जग – जंवारा सब्बो जगा किसनहा परिवार मान सम्मान पाथें. तिहार बार बारो महिना रइथे. रोटी – पीठा घरो घर रांधे जाथे. इकरे सेती किसान के जात ले कोनो ला भरमाय के काम हमर इहां नइ होवय. सेर- सीधा लेके सब्बो जात के मन आथें. दुख मा गांव भर के मन सकलाथें अउ तुरते निरणय लेके बेवस्था मा लग जाथें. अपन – अपन हिसाब से सामाजिक पूजा पद्धति मा शामिल होना हमर मन के पहिचान हरय. धार्मिक आयोजन मा जेन प्रतिष्ठा होना चाही तेखर पालन होथे. नवरात्रि समिति के अध्यक्ष मुस्लिम भाई ला बनाए जाथे. ओइसने मोहर्रम के सवारी हिन्दु भाई ला चढ़थे. संस्कार के भरपूर रक्षा होथे. पंचइती चुनाव मा आदमी के कुशलता ल परिचय मिलथे अउ नियाय हा सम्मान पाथे.
अइसने सद्भाव सकल जगत मा बने राहय. हिन्दु, मुस्लिम, सिख ,ईसाई अउ जाति , धर्म , पंथ मा एकता पनपय. अतके हमर ईश्वर से बिनती हे.

