‘The Berlin Patient’: World’s first patient to beat HIV died due to Cancer | ‘द बर्लिन पेशेंट’: एचआईवी को मात देने वाला दुनिया का पहला मरीज, हार गया इस बीमारी से जंग

नई दिल्‍ली: टिमाथी रे ब्राउन (Timothy Ray Brown) , एचआईवी के ऐसे पहले मरीज थे जो इस बीमारी से पूरी तरह ठीक हो गए थे लेकिन अब उनकी मौत कैंसर से हो गई है. यह जानकारी इंटरनेशनल एड्स सोसायटी ने बुधवार को दी. 

ब्राउन ने 10 साल पहले एचआईवी जैसी खतरनाक बीमारी से ठीक होकर इतिहास रच दिया था और ‘बर्लिन पेशेंट’ (‘Berlin Patient’) के नाम से दुनिया में मशहूर हो गए थे. 

उनके निधन पर IAS की अध्यक्ष आदिबा कमरुलजमैन ने कहा, ‘हमारी सोसायटी के सभी सदस्‍यों की ओर से हम टिमाथी की पार्टनर टिम, उसके परिवार और दोस्‍तों के लिए संवेदनाएं जताते हैं. हम टिमाथी और उनके डॉक्‍टर गेरो हटर के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हैं, जिन्‍होंने यह बताया कि एचआईवी का इलाज संभव है और वैज्ञानिकों के लिए इसके इलाज को लेकर संभावनाओं के द्वार खोले.’ 

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ऐसी है ‘बर्लिन पेशेंट’ की कहानी 
बता 1995 की है, जब बर्लिन के छात्र ब्राउन को पता चला था कि वह एक जानलेवा बीमारी एचआईवी का शिकार हो गए हैं. इसके 10 साल बाद उन्हें एक ब्‍लड कैंसर ल्यूकेमिया के होने का पता चला. 

तब फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन में उनके डॉक्टर ने उनके इलाज के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया. यह स्‍टेम सेल एक ऐसे डोनर से लिया गया था, जिसमें एक दुर्लभ जेनेटिक म्‍युटेशन था, जो उसे एचआईवी से लड़ने के लिए एक प्राकृतिक प्रतिरोध देता था. यानि कि अनुवांशिक तौर पर उसके जींस ही ऐसे थे, जो उसे एचआईवी से लड़ने में सक्षम बनाते थे. 

डॉक्‍टरों को लगा कि ऐसा स्‍टेम सेल ब्राउन को एचआईवी और कैंसर दोनों से छुटकारा दिला देगा. इसके लिए डॉक्‍टरों ने दो बहुत मुश्किल और खतरनाक ऑपरेशन किए और उनका ये तरीका सफल भी हो गया. आखिरकार 2008 में ब्राउन दोनों बीमारियों से उबरकर पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो गये और तभी से वह ‘बर्लिन पेशेंट’ के तौर पर मशहूर हो गए. 

दुनिया को दी प्रेरणा 
इन मुश्किल ऑपरेशनों के बाद पूरी तरह ठीक होकर ब्राउन सार्वजनिक तौर पर दुनिया के सामने आए और सबको अपने अनुभव बताए. इतना ही नहीं उन्‍होंने अपना एक फाउंडेशन भी बनाया. 2012 में उन्‍होंने कहा था कि ‘मैं इस बात का जीता-जागता सबूत हूं कि एड्स का इलाज हो सकता है. एचआईवी से ठीक होना बहुत ही अद्भुत अनुभव रहा है.’ 

निधन से कुछ महीने पहले उन्‍हें फिर से ल्यूकेमिया हो गया था. जिसके बाद उनका कैलिफोर्निया के पाम स्प्रिंग्स में इलाज भी हुआ था. 

 




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