ताइपे: प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) के एक नए सर्वे के मुताबिक दुनिया के कई विकसित देशों विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन (Australia and Britain) में चीन के प्रति नकारात्मक धारणाएं तेजी से बढ़ी है. मंगलवार को सामने आए सर्वे में पता चला है कि चीन अपने पड़ोसियों सहित दुनियाभर के कई देशों के साथ विभिन्न व्यापारिक और राजनयिक विवादों में लिप्त है, जो कि अधिक आक्रामक राजनयिक दृष्टिकोण से प्रेरित है.
उन्नत अर्थव्यवस्था वाले 14 लोकतांत्रिक देशों में किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि अधिकांश लोगों का चीन के प्रति प्रतिकूल दृष्टिकोण था. टेलीफोन के जरिए 10 जूसे से तीन अगस्त के बीच किए गए सर्वेक्षण में 14 देशों के 14276 वयस्कों को शामिल किया गया था.
सर्वे में लोगों ने क्या कहा
सर्वे के अनुसार ऑस्ट्रेलिया (Australia) के 81 प्रतिशत लोगों का कहना है कि चीन के प्रति उनका प्रतिकूल दृष्टिकोण है. सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि चीन प्रति लोगों में ऐसा विचार पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत बढ़ा है. ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस (Coronavirus) की उत्पत्ति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय चांज की मांग की थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और चीन ने ऑस्ट्रेलिया से बीफ का आयात बंद कर दिया. इसके अलावा चीन ने ऑस्ट्रेलिया से आयातित जौ पर भारी शुल्क लगा दिया और ऑस्ट्रेलियाई शराब के आयात में एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी.
इन देशों में भी बढ़ा नकारात्मक दृष्टिकोण
सर्वे के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में चीन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण तेजी बढ़ा है, हालांकि अन्य देशों में भी वृद्धि देखी गई है. चीन के प्रति नकरात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों में ब्रिटेन में 74 प्रतिशत, जर्मनी में 71 प्रतिशत और अमेरिका में 73 फीसदी लोग है. पिछले साल के मुकाबले ब्रिटेन में 19 प्रतिशत, जर्मनी में 15 प्रतिशत और अमेरिका में 13 प्रतिशत वृद्धि हुई है.
सर्वेक्षण में इन 14 देशों को किया गया शामिल
प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) के सर्वेक्षण में शामिल 14 देशों में अमेरिका, कनाडा, बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन, यूके, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया थे. सर्वेक्षण किए गए देशों में से नौ देशों स्पेन, जर्मनी, कनाडा, नीदरलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया में नकारात्मक विचार 12 या उससे अधिक वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं.
हॉन्गकॉन्ग में चीन के हस्तक्षेप का आलोचना
प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल कई लोकतांत्रिक देशों ने इस साल की शुरुआत में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के माध्यम से हॉन्गकॉन्ग में चीन के हस्तक्षेत्र की भी आलोचना की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के प्रति नकरात्मक दृष्टिकोण का प्रमुख कारण कोरोना वायरस (Coronavirus) है, जिसकी शुरुआत पिछले साल के अंत में चीनी शहर वुहान (Wuhan) से हुआ था और फिर पूरे विश्व में फैल गया. कोरोना वायरस की शुरू में जानकारी नहीं देने को लेकर चीन की आलोचना हुई. सर्वे में कोरोना को नियंत्रित करने के संबंध में भी लोगों का नकरात्मक दृष्टिकोण था. 14 देश में 61 प्रतिशत लोगों ने कहा की चीन खराब तरीके से कोरोना वायरस से निपटा था, जबकि 84 प्रतिशत लोगों ने कोरोना को नियंत्रित करने के अमेरिका (America) के तरीके को खराब बताया.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर भरोसा नहीं
सर्वे में शामिल देशों के लोग चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग (Xi Jinping) पर भरोसा नहीं करते हैं. 78 प्रतिशत लोगों ने कहा कि विश्व मामलों में सही काम करने को लेकर उनका जिनपिंग पर भरोसा नहीं है. वहीं सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत लोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर भी भरोसा नहीं करते हैं.
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