France new law against religious fanaticism will upset Muslim countries| फ्रांस के इस नए कानून से मुस्लिम देशों को मिर्ची लगना तय, ये रही वजह

पेरिस: फ्रांस (France) कट्टरपंथ के खिलाफ लगातार कदम उठा रहा है. तुर्की के अल्ट्रा नेशनलिस्ट ग्रुप ‘ग्रे वूल्व्स’ (Grey Wolves) पर प्रतिबंध लगाने के ऐलान के बाद अब फ्रांस एक ऐसा कानून पेश करने जा रहा है, जिससे मुस्लिम देशों के साथ उसका विवाद बढ़ना तय है.

भेदभाव की कोई जगह नहीं
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पहले ही कट्टरवादी सोच पर लगाम लगाने के लिए कड़े कानून बनाने की बात कह चुके हैं. अब आंतरिक मामलों के मंत्री गेराल्ड डर्मैनिन (Gerald Darmanin) ने सरकार की इस तैयारी का खाका पेश किया है. उन्होंने बताया कि सरकार एक ऐसा बिल संसद में रखने जा रही है, जो धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव पर पूरी तरह रोक लगाएगा.   

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इलाज से मना किया तो सजा
बिल के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री गेराल्‍ड ने बताया कि यदि किसी पुरुष ने महिला डॉक्‍टर से इलाज करवाने से मना किया तो उसे 5 साल तक कैद हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यही बात महिलाओं पर भी लागू होती है. यानी अगर वह किसी पुरुष डॉक्टर से उसके लिंग के आधार पर इलाज करवाने से इनकार करती है, तो उसे भी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

दबाव डालने वालों पर कार्रवाई 
गेराल्‍ड ने यह भी साफ किया कि सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी जो अधिकारियों पर दबाव डालते हैं या जो शिक्षकों के पाठ को मानने से इनकार करते हैं. फ्रांस के इस कदम का विरोध भी शुरू हो गया है. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्‍या में मुस्लिम ट्वीट करके फ्रांसीसी मंत्री के इस बयान की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि महिलाओं को पुरुष डॉक्टर से इलाज के लिए मना करने का अधिकार है. साथ ही उन्होंने 5 साल की सजा और जुर्माने पर भी सवाल उठाये हैं.

बैन का किया था ऐलान
इससे पहले, गेराल्ड ने तुर्की के ‘ग्रे वूल्व्स’ ग्रुप पर प्रतिबंध का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि इस संबंध में एक प्रस्ताव बुधवार को फ्रांसीसी कैबिनेट में रखा जाएगा. इस समूह पर प्रतिबंध लगाना बेहद जरूरी है. यदि प्रस्ताव पारित होता है, तो समूह के किसी भी कार्य या बैठक आयोजित करने पर जुर्माना या कारावास का रास्ता साफ हो जाएगा. वहीं, फ्रांसीसी सांसद येल ब्रौन-पीवेट ने भी इस पहल पर खुशी जाहिर की है. उनका कहना है कि ऐसे समूहों की हमारे देश में कोई जगह नहीं है.

तुर्की ने जताया विरोध
तुर्की की नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी (NMP) ने फ्रांस के इस कदम की आलोचना की है. तुर्की में ‘ग्रे वूल्व्स’ समूह को डेवले बहस्केली की नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी का करीबी माना जाता है, जिसका राष्ट्रपति एर्दोगन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) के साथ राजनीतिक गठबंधन है. इस लिहाज से फ्रांस सरकार की इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ना तय है. कहा जाता है कि 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में एर्दोगन की जीत में ग्रे वूल्व्स ने बेहद महत्वपूर्ण निभाई थी.इस समूह को MHP की मिलिटेंट विंग भी कहा जाता है.

 




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