Russian President Vladimir Putin may quit amid fear of parkinsons disease | DNA ANALYSIS: क्या इस बीमारी की वजह से पुतिन छोड़ देंगे राष्ट्रपति पद?

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन अगले साल जनवरी में अपना पद छोड़ सकते हैं. हालांकि पुतिन (Vladimir Putin) का अचानक राजनीति से मोह भंग नहीं हुआ है बल्कि उनके इस कथित फैसले के पीछे एक गंभीर बीमारी है. कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि 68 वर्ष के व्लादिमिर पुतिन को पार्किंसन (Parkinson’s Disease) नाम की एक बीमारी हो गई है, इस बीमारी की वजह से शरीर धीरे-धीरे काम करने की क्षमता खोने लगता है और आगे चलकर मरीज की सोचने समझने की क्षमता भी बाधित हो जाती है.

पा​र्किंसन ने पुतिन की महत्वाकांक्षाओं को हरा दिया?
आज पूरी दुनिया में इसी खबर की चर्चा हो रही है और हर कोई पूछ रहा है कि क्या पा​र्किंसन ने पुतिन की महत्वाकांक्षाओं को हरा दिया है. हालांकि रूस की सरकार ने इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया है और कहा है कि पुतिन का स्वास्थ्य एकदम ठीक है और वो अपना पद नहीं छोड़ने वाले हैं. लेकिन इस खबर ने तब और जोर पकड़ा जब कल रूस की संसद में व्लादिमिर पुतिन को आजीवन राजनैतिक इम्युनिटी देने वाला एक प्रस्ताव लाया गया, पुतिन के लिए ये एक तरह का अभयदान है.

इस प्रस्ताव के पास होने पर पुतिन जीवन भर सांसद के पद पर रह पाएंगे और राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन पर किसी भी तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा.

पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका
इसी वर्ष जुलाई में रूस में एक जनमत संग्रह हुआ था जिसके बाद पुतिन का वर्ष 2036 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया था. लेकिन अगर पुतिन के बीमार होने की खबर सही है तो ये न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है. क्योंकि पुतिन के कार्यकाल में रूस ने एक बार फिर खुद को दुनिया की महाशक्ति साबित करने की कोशिश की है और अगर पुतिन अपना पद छोड़ते हैं तो ये अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रूस के लिए किसी बुरी खबर से कम नहीं होगा.

बेटी और प्रेमिका चाहती हैं कि पुतिन पद छोड़ दें
पुतिन के स्वास्थ्य के बारे में जो खबरें चल रही हैं. उनके मुताबिक पुतिन की 35 वर्षीय प्रेमिका और उनकी 34 साल की बेटी चाहती हैं कि पुतिन अगले साल अपना पद छोड़ दें. पुतिन को पार्किंसन नाम की बीमारी है. इसे साबित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कुछ वीडियो भी दिखाए जा रहे हैं. ऐसा ही एक वीडियो 7 मई 2012 का है. इसी दिन पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने थे. इस वीडियो को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि चलने के दौरान पुतिन का सिर्फ बायां हाथ हिल रहा है जबकि दायां हाथ नहीं हिल रहा है. हाथ के मूवमेंट में आई कमी को पार्किंसन का एक बड़ा लक्षण माना जाता है.

दूसरा वीडियो वर्ष 2014 का है जब पुतिन ने रूस के लेनिनग्राद में सैनिकों से मुलाकात की थी. इस दौरान भी पुतिन के दाएं हाथ में मूवमेंट दिखाई नहीं दी.

पुतिन की उम्र 68 वर्ष है और अक्सर ये बीमारी 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को ही अपना शिकार बनाती है. अगर पुतिन सच में इस बीमारी का शिकार हो गए हैं तो आप सोचिए इस खबर में कितना बड़ा सबक छिपा है.

दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं पुतिन
पुतिन न सिर्फ राजनैतिक रूप से दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं, बल्कि शारीरिक रूप से भी उन्हें सबसे फिट नेताओं में गिना जाता है. अपनी शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन अक्सर पुतिन करते रहते हैं, कभी पनडुब्बी के जरिए समुद्र में गोता लगाकर, कभी बर्फीली नदी में स्नान करके तो कभी आईस हॉकी खेलकर, पुतिन खुद को फिट और स्वस्थ साबित करते रहे हैं.

लेकिन कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली हो, वो समय से बलवान नहीं हो सकता और शायद आज पुतिन का सामना भी इसी सच्चाई से हो रहा है. दुनिया की शायद ही ऐसी कोई चीज है जो पुतिन के पास नहीं होगी या जिसे पुतिन हासिल नहीं कर सकते, उनके नाम कई बड़ी बड़ी उपलब्धियां भी हैं लेकिन अगर उन्हें सच में पार्किंसन है तो शायद धीरे धीरे उनकी याददाश्त जाने लगेगी और उन्हें खुद अपनी उपलब्धियां भी याद नहीं रहेंगी.

2036 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कर ली थी तैयारी 
पुतिन ने वर्ष 2036 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहने की तैयारी कर ली थी. 2036 तक वो 83 वर्ष के हो चुके होंगे. लेकिन पुतिन की महत्वकांक्षाओं के सामने पार्किंसन की दीवार खड़ी हो गई है. पुतिन ने अपने पद की तो उम्र बढ़ा ली. लेकिन अगर उनके बीमार होने बात सच है तो वो अपनी खुद की उम्र कैसे बढ़ा पाएंगे. पद, पहचान और प्रतिष्ठा के अमर होने का सपना लगभग सभी लोग देखते हैं. लेकिन सच ये है कि आपके सपने की उम्र आपकी उम्र से ज्यादा नहीं होती. 

ययाति की कहानी
भागवत पुराण में सम्राट ययाति से जुड़ी एक कथा आती है. इस कथा के मुताबिक ययाति की उम्र 100 वर्ष हो गई थी. उनके पास बड़ा महल, दुनिया भर की संपदा थी और उनके कई पुत्र भी थे. जब ययाति के सामने मृत्यु आई तो वो मरने के लिए तैयार नहीं हुए. ययाति ने मृत्यु से कहा कि अभी तो वो बहुत अतृप्त हैं, बहुत प्यासे हैं, वो अभी और कई वर्षों तक जीवित रहना चाहते हैं. इसके बाद उनका मृत्यु से समझौता हो गया. इस समझौते के मुताबिक ययाति को अपने पुत्रों से उनकी उम्र मांगनी थी. लेकिन उनके सबसे छोटे पुत्र पुरु को छोड़कर कोई भी इसके लिए राजी नहीं हुआ 

ययाति ने पुरु को अपना बुढ़ापा देकर उससे उसका यौवन ले लिया. इसके 100 वर्षों के बाद जब फिर से मृत्यु उनके दरवाजे पर आई तो ययाति फिर से गिड़गिड़ाने लगे और कहने लगे कि अभी तो उनकी बहुत सारी इच्छाएं अधूरी हैं और वो इन्हें पूरा किए बगैर वह मरना नहीं चाहते. ये सिलसिला लगातार चलता रहा. कहा जाता है कि ययाति हजार वर्ष तक मृत्यु को टालते रहे लेकिन फिर भी ययाति को वासनाओं से तृप्ति नहीं मिली. आखिरकार उन्हें बात समझ में आई और उन्होंने वैराग्य ले लिया.

ययाति को तो ये बात हजार वर्ष के बाद ही सही समझ आ गई लेकिन क्या हम में से कोई इस बात को आज और अभी समझ सकता है? ये एक कहानी थी इसलिए एक सम्राट को मृत्यु ने कई मौके दिए. लेकिन असल जीवन में ऐसा नहीं होता. असल जीवन में मृत्यु पहली और अंतिम बार आती है और असल जीवन में सामान्यत: कोई अपनी उम्र आपको देकर आपकी मृत्यु को नहीं टाल सकता.

 ये बीमारी पुतिन को गुमनामी के अंधेरे में ले जा सकती है
फिर चाहे आप किसी देश के राष्ट्रपति ही क्यों न हों. व्लादिमिर पुतिन एक ऐसे राजनेता हैं जिन्हें आज शायद दुनिया के सभी साढ़े सात सौ करोड़ लोग जानते होंगे लेकिन ये बीमारी उन्हें गुमनामी के अंधेरे में ले जा सकती है.

भगवत गीता में भी लिखा है कि मनुष्य इस जीवन में खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है जो आज तुम्हारा है, वो कल किसी और का था और कल किसी और होगा.

पूरा अस्तित्व सिर्फ एक ही कानून के अधीन है और वो है समय का कानून, समय किसी भिखारी को पल में करोड़पति बना सकता है और किसी करोड़पति को पल भर में भिखारी बना सकता है. समय सर्वशक्तिशाली व्यक्ति से भी शक्तिशाली होता है और मृत्यु बहादुर से बहादुर व्यक्ति को भी अपने साथ ले जाती है.

 पुतिन के सपनों का यू-टर्न
आज शायद पुतिन इसी सच्चाई को समझ रहे होंगे. हमें नहीं पता कि पुतिन का स्वास्थ्य सच में कैसा है लेकिन हमें ये बात जरूर पता है कि ये किसी के साथ भी हो सकता है और इसलिए आपको वर्तमान में जीने की आदत डालनी चाहिए. पुतिन आज उस जगह पर खड़े हैं जहां उनके पास सबकुछ है. कुछ लोग कहते हैं कि वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली और अमीर व्यक्ति हैं, यानी उनके पास सब कुछ है. लेकिन आज जो खबर आई है. वो अगर सच है तो ये पुतिन के सपनों का यू-टर्न है. एक ऐसा यू-टर्न जिसके रास्ते पर पुतिन को अकेले चलना होगा, सत्ता से बाहर जाना होगा , उन्हें अपनी शक्ति को क्षीण होते हुए देखना होगा और बहुत संभव है कि जो लोग आज पुतिन के साथ खड़े हैं, वो एक दिन कमजोर हो चुके पुतिन का साथ छोड़ दें.

पुतिन खुद को इस बीमारी से बचाने के लिए क्या कर सकते हैं?
व्लादिमिर पुतिन के साथ जो हो रहा है, उसे आप प्रकृति का नियम भी कह सकते हैं. जिससे कोई भी बच नहीं सकता. लेकिन हम आपको बताएंगे कि व्लादिमिर पुतिन अपने आपको इस बीमारी से बचाने के लिए क्या कर सकते हैं.

इस समय पूरी दुनिया में करीब एक करोड़ लोग पार्किंसन से पीड़ित हैं. ये बीमारी तब होती है जब मस्तिष्क में मौजूद Nerve Cells यानी कोशिकाएं मरने लगती हैं. ये तब होता है जब शरीर में डोपामाइन नामक रसायन की कमी होने लगती है और दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स की संख्या घटने लगती है. इसके लक्षण हैं-

-हाथों और पैरों में कंपन

-शरीर की मूवमेंट में गिरावट

-मांसपेशियों का लचीलापन खत्म होना.

-शरीर का संतुलन बिगड़ने लगना.

-बोलने में परेशानी होना और लिखना भी मुश्किल हो जाता है.

-इस बीमारी के दूसरे चरण में मस्तिष्क की सोचने समझने की क्षमता कम होने लगती है और याददाश्त भी जा सकती है. लेकिन ये जरूरी नहीं है.

-इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन फिजियोथेरेपी और कुछ दवाओं के जरिए इसे कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.




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