Dhanteras 2020: Diwali 2020 Dhanteras Resolution: शरीर की लचक बढ़ानी है या सिर्फ बॉडी को टोन करना है, इस धनतेरस को खास बना देंगे सेहत से जुड़े ये रेजोलूशन – how to celebrate dhanteras 2020 for good health and real wealth pot shopping

हम सभी को पता है कि धनतेरस का पर्व दिवाली से पहले मनाया जाता है और इस दिन शुद्ध धातु खरीदने की रस्म होती है। फिर चाहे आप सोने-चांदी के जेवर खरीदें या फिर पीतल, तांबा और कांसे के बर्तन खरीदें। दरअसल, धनतेरस के पावन पर्व पर धातु से बने इन बर्तनों और जूलरी का केवल धार्मिक महत्व नहीं है बल्कि स्वास्थ्य की दुनिया में भी इनका बहुत बड़ा योगदान है।

आपने अपने घर में दादी-नानी के समय के पुराने बर्तन जरूर देखे होंगे। ये बर्तन पीतल, कांसे और तांबे के होते हैं। ना कि स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के। दरअसल, उस जमाने में सभी लोग शुद्ध धातुओं से बने बर्तनों में भोजन करते थे। जो लोग आर्थिक तंगी के कारण इन बर्तनों का उपयोग नहीं कर पाते थे वे मिट्टी के बने बर्तनों में खाना बनाते थे।

दरअसल, इन शुद्ध धातुओं और मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना और उस खाने को शुद्ध धातु से बने बर्तनों में ही खाना हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक लाभकारी होता है। जैसे, लोहे की कड़ाही में बना भोजन हमारे शरीर में खून की कमी को दूर करता है, उसी तरह तांबे के बर्तन में रखा गया पानी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

कांसे और पीतल से बने बर्तन हमारे शरीर को बलिष्ठ बनाने का काम करते हैं। इन बर्तनों में रखा गया खाना बहुत जल्दी खराब नहीं होता है। पुराने समय में लोग कम बीमार बड़ा करते थे और उनका शरीर आज के लोगों की तुलना में कहीं अधिक बलवान हुआ करता था। इसकी एक बड़ी वजह उस समय की रसोई में छिपी है।

शरीर की लचक बढ़ेगी और बॉडी टोन बनेगी

-आज के समय में भी अगर आप चाहते हैं कि आपका शरीर पुराने जमाने के लोगों की तरह लचीला, स्वस्थ, निरोग और आकर्षक बने तो आपको अपने जीवन में आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाना होगा।

-यह और बात है कि पुराने समय में शिक्षा का स्तर बहुत कम हुआ करता था। लेकिन उस समय मौखिक ज्ञान का प्रसार इतना अधिक होता था कि अनपढ़ लोगों को भी सेहत और स्वास्थ्य की रक्षा से जुड़ी उन गूढ़ बातों की जानकारी होती थी, जिन्हें आजकल के मेडिकल स्टूडेंट्स भी नहीं जानते हैं।

-शरीर को निरोग रखने के लिए आप हर दिन रात के समय तांबे के बर्तन में रखा पानी पिएं। दिन के समय में उस पानी का उपयोग करें, जो मिट्टी के घड़े में भरकर रखा जाता है। आप कुम्हारों के पास जाकर देखेंगे तो पाएंगे कि आज के समय में टोटी लगे हुए मटके आने लगे हैं। यानी हाइजीन का पूरा ध्यान रखते हुए आप मिट्टी के पोट्स का उपयोग कर सकते हैं।

-शरीर की लचक बढ़ाने के लिए आपको नियमित रूप से योग करना होगा। इस कार्य की शुरुआत के लिए धनतेरस का दिन सबसे अधिक शुभ है। क्योंकि आज के ही दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरि अवतरित हुए थे। ये ही आयुर्वेद के जनक हैं। योग शारीरिक मानसिक और आंतरिक स्वस्थ्य की रक्षा के लिए एक कंप्लीट पैकेज की तरह है।

-आयुर्वेद एक ऐसी विधा है, जिसके अनुसार जीवन जीने पर मनुष्य का शरीर प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर, सुदृढ़ और गठीला बनता है। सही प्रकार से भोजन करने, पानी पीने का सही तरीका अपनाने और नियमित रूप से योग करनेवाले लोगों का ओरा अलग से दिखलाई पड़ता है। इन्हें बाहरी सौंदर्य पर पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती है।

आज ही लें ये रेजोलूशन
-धनतेरस के अवसर पर खुद को फिट और ऐक्टिव रखने के लिए आप आज भगवान धनवंतरि से यह आशीर्वाद लें कि आप अपने जीवन में अधिक से अधिक आयुर्वेद के नियमों का पालन कर सकें।
-हर सुबह तांबे के बर्तन में रखा गया पानी पीकर दिन की शुरुआत करें।
-नियमित रूप से योग और ध्यान करें।
-शुद्ध धातुओं जैसे तांबा, कांसा और पीतल के बर्तनों में भोजन करें। यदि आपके लिए संभव हो तो चांदी और सोने से बने बर्तनों में भोजन करना सबसे अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है। तो इस धनतेरस सोने-चांदी के जेवर नहीं बल्कि शुद्ध धातु के बर्तन खरीदें।


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