France mulls ban on police images, alarming rights defenders | इस देश में पुलिसकर्मियों की तस्वीर प्रकाशित करना होगा अपराध, मिलेगी यह सजा

पेरिस: फ्रांस (France) की सरकार पुलिस को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक कानून लेकर आ रही है. इस कानून के अमल में आने के बाद पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उनकी फोटो प्रकाशित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. सरकार ने बिल का मसौदा संसद में पेश किया है, जिस पर मंगलवार को बहस हुई.    

मानवाधिकार संगठनों की आशंका
वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने इस बिल पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इससे न केवल प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित होगी, बल्कि बेवजह लोगों को प्रताड़ित करने का खतरा भी बना रहेगा. जबकि सरकार का कहना है कि बिल का उद्देश्य केवल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकना है. 

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ये हैं प्रावधान
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) की सरकार के इस प्रस्तावित कानून में दोषियों को एक साल की जेल और 45,000 यूरो (53,000 डॉलर) के जुर्माने पर प्रावधान है. बता दें कि नेशनल असेंबली में मैक्रों की पार्टी को बहुमत प्राप्त है, लिहाजा माना जा रहा है कि विरोध के बावजूद बिल पारित हो जाएगा.  

आंतरिक मंत्री ने किया समर्थन
प्रस्तावित कानून में कहा गया है कि शारीरिक या मनोवैज्ञानिक रूप से नुकसान पहुंचाने के इरादे से पुलिसकर्मियों की फोटो प्रकाशित करना अपराध माना जाएगा. फिर भले ही इसके लिए किसी भी मीडिया का इस्तेमाल क्यों न किया गया हो. फ्रांस के आंतरिक मंत्री गेराल्ड डार्मैनिन (Gerald Darmanin) ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इस तरह के कानून का अस्तित्व में आना बेहद जरूरी है. 

इसलिए जरूरी है कानून
गेराल्ड ने कहा, ‘पहचान उजागर होने के बाद पुलिसकर्मियों को लगातार धमकी मिलती हैं. यहां तक कि महिला अधिकारियों को बलात्कार की धमकी दी जाती हैं. उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जाता है. इसलिए यह कानून बेहद जरूरी है’. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया को किसी तरह से डरने की जरूरत नहीं है. मंत्री ने कहा कि पत्रकार पहले की तरह पुलिस इंटरवेंशन को फिल्मा सकते हैं.

मौलिक अधिकार होंगे कम
फ्रांस की मानवाधिकार लोकपाल क्लेयर हेडन (Claire Hedon) ने कहा कि इस बिल में प्रेस स्वतंत्रता सहित मौलिक अधिकारों को कम करने के जोखिम शामिल हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस इंटरवेंशन से संबंधित चित्रों का प्रकाशन लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली के लिए वैध और आवश्यक है. वहीं, पत्रकार यूनियनों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है.  

 




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