Three kids of COVID 19 positive parents in Australia develop antibodies without being infected | आश्‍चर्यजनक: कोरोना पॉजिटिव पैरेंट्स के 3 बच्चों में बिना संक्रमण बनीं एंटी बॉडी

मेलबर्न:  कोरोना को समझना आसान भी नहीं है. ये खबर आपको भी हैरान कर देगी. कोरोना के बारे में हम सभी ने अभी तक जितना पढ़ा और समझा है उस हिसाब से ऑस्ट्रेलिया में सामने आया ये केस थोड़ा अलग है. मेलबोर्न (ऑस्ट्रेलिया) में कोविड पीड़ित माता पिता के तीन बच्चों के अंदर बिना कोरोना वायरस से संक्रमित हुए ही एंटी बॉडी विकसित हो गए.

‘नेचर कम्युनिकेशंस’ से खुलासा
साइंस जर्नल ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में छपे लेख के मुताबिक, स्टडी के मुताबिक बच्चे विषाणु की चपेट में आए बिना ही इस जानलेवा सार्स सीओवी-2 की प्रतिरोधात्मक क्षमता विकसित कर सकते हैं, इससे ये संभावना बढ़ जाती है कि बच्चों के अंदर मौजूद रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता उन्हें कोरोना संक्रमण से बचा कर रखती है.

रिपोर्ट में क्लीनिकल फीचर्स, वायरोलॉजी, लोंगीट्यूडीनल सेलुलर और साइटोकिन इम्यून प्रोफाइल, सार्स Cov-2 स्पेशिफिक सीरोलॉजी और कोविड-19 से संक्रमित माता-पिता की एंटी बॉडी रेस्पोंस के बारे में विस्तार से जानकारी दी है जिनके तीन बच्चों के की कोरोना रिपोर्ट लगातार कई बार निगेटिव आई.

रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि केस स्टडी के दौरान, ‘हर बार माता पिता और सभी बच्चों के सेलुलर इम्यून प्रोफाइल्स और साइटोकिन रेस्पोंस एक जैसे ही थे’. ये रिसर्च शिडान तौसीफ, मेलेनी नीलैंड, डेविड पी बर्गनर और नाइजल वी क्रॉफोर्ड की अगुवाई में की गई.

वयस्कों के मुकाबले, बच्चो में गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम कोरोना वायरस मुख्य रूप से हलके या कम लक्षणों वाले होते हैं. लेकिन उनमें अंर्तनिहित प्रतिरोधात्मक क्षमता का जो फर्क होते हैं, वो सही रूप से स्पष्ट नहीं हो पाता.

मार्च 2020 की एक केस स्टडी
शोधकर्ताओं ने एक ऐसे परिवार का अध्यन किया, जो मार्च 2020 में एक दूसरे राज्य में आयोजित शादी समारोह से शिरकत करते हुए वापस लौटा था. यहां 47 साल का पिता और 38 साल की मां अपने बच्चों के बगैर शादी में गए थे. वो तीन दिन बाद वापस लौटे और आते ही उन्हें खांसी, नजला और बुखार ने चपेट में ले लिया. उसके बाद उन्हे करीब दो हफ्ते तक शरीर में आलस और सरदर्द की शिकायत भी रही थी.

इसी दौरान सातवें दिन उनके सबसे बड़े 9 साल के बच्चे में भी थोड़ी खांसी, नजला, गला खराब और पेट दर्द के लक्षण दिखे. फिर 7 साल के दूसरे बच्चे को भी खांसी और जुखाम ने अपनी चपेट में ले लिया. हालांकि उनका 5 साल का सबसे छोटे बच्चा एसेंपटोमेटिक (Asymptomatic) था यानी उसमें कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं था.

आठ दिन बाद संक्रमण का खुलासा
शोधकर्ताओं ने बताया कि इन लक्षणों से 8 दिन जूझने के बाद परिवार को अपने कोविड 19 से संक्रमित होने का पता चला, कि वो जिस शादी में गए थे वहीं से कोरोना संक्रमित हो कर लौटे थे. उसी दिन मां बाप के साथ साथ तीनों बच्चों के नसल स्वाब (Nasopharryngeal swabs) भी लिए गए. लेकिन जांच के दौरान तीनों ही बच्चे कोविड नेगेटिव निकले.

नामुमकिन थी फिजिकल डिस्टेंसिग
स्टडी के मुताबिक, ‘उस घर में शारीरिक बनाना संभव ही नहीं था. सबसे छोटा यानी तीसरा सबसे छोटा बच्चा तो मां बाप के साथ ही साथ सोता था.’ बाकी दो बच्चे भी दिन भर मां-बाप के साथ ही रहते थे. 

इस तरह हुआ चमत्कार
सभी परिजन बिना किसी मेडिकल मदद यानी दवा इलाज के कोरोना संक्रमण से पूरी तरह से ठीक भी हो गए. स्टडी के लेखक लिखते हैं, ‘गहराई से हुई इस केस स्टडी जिसमें सार्स-सीओवी2 के संपर्क में आए बच्चों की प्रतिरोधात्मक क्षमता के बारे में कई नई तरह की अंदरूनी जानकारियों का खुलासा हुआ है.

कोरोना पीड़ित माता पिता के इतने करीबी संपर्क में रहने के बावजूद पीसीआर टेस्ट में वो तीनों बच्चे लगातार कोविड 19 नेगेटिव आते रहे, कोविड के लक्षण भी उनके अंदर या तो पैदा ही नहीं हुए या बिलकुल मामूली रहे.

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