who on antimicrobial drugs: WHO की बढ़ी चिंता, इन पेथोजेन्स पर नहीं हो रहा है दवाओं का असर – who antimicrobial resistance bacteria virus and antibiotics

दुनियाभर में ऐंटिमाइक्रोबियल्स दवाओं को लेकर एक तरह की रेसिस्टेंस विकसित होती जा रही हैं। यानी ये दवाएं मनुष्य के शरीर पर अब पहले की तरह तेज प्रभाव नहीं दिखा रही हैं। अगर यह स्थिति इसी तरह बढ़ती रही तो आनेवाले दिनों में वैश्विक स्तर पर सेहत से जुड़ा एक बड़ा खतरा खड़ा हो जाएगा।

इस ग्लोबल खतरे पर अपना रुख साफ करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी कह चुका है कि ऐंटिमाइक्रोबियल्स (एएमआर) मानवता के लिए शीर्ष 10 वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है। ऐंटिमाइक्रोबियल्स में वे दवाए शामिल होती हैं जो ऐंटिबायॉटिक्स, ऐंटिवायरल, ऐंटिफंगल और ऐंटिपैरासिस्टिक्स के रूप में काम करती हैं।

क्यों बढ़ रहा है एएमआर का खतरा?
-ऐंटिमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कहा गया है कि इन दवाओं का आवश्यकता से अधिक उपयोग और गलत तरीके से किया गया उपयोग एक बड़ी वजह है कि इनसे संबंधित बीमारियों को फैलानेवाले पैथोजेन्स (बैक्टीरिया और वायरस) पर अब इन दवाओं का असर कम हो रहा है। रेखा के शरीर पर नहीं है एक इंच भी एक्स्ट्रा फैट, यह है उनका फिटनेस और ब्यूटी सीक्रेट

microbes-3

लापरवाही के कारण घट रहा है दवाओं का असर

-इसके अतिरिक्त स्वच्छ पानी का अभाव, सैनिटाइजेशन की कमी और संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी तकनीक का अभाव रोगाणुओं के प्रसार को बढ़ावा देता है। ये भी कुछ ऐसे कारण हैं, जो बीमारी फैलानेवाले रोगाणुओं के अंतर प्रतिरोध क्षमता (रेजिस्टेंस पॉवर) विकसित करने का काम करते हैं।

रोगाणुओं में इस तरह प्रतिरोध क्षमता का विकसित होना केवल मृत्युदर और अयोग्यता को बढ़ाने का काम नहीं करता बल्कि यह अर्थव्यवस्था पर आर्थिक बोझ भी बढ़ाता है। क्योंकि ऐंटिमाइक्रोबियल्स का असर ना होने की स्थिति में व्यक्ति को लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहना पड़ता है। इस दौरान उसे कई गुना महंगी दवाओं और चिकित्सा पद्धतियों की जरूरत होती है, इसका आर्थिक रूप से बुरा असर पड़ता है। बचाव की तो कोई भी गारंटी नहीं है लेकिन कोरोना का रिस्क बेहद कम कर देती है यह एक चीज

इस स्थिति में भी रहेगा खतरा
-यदि ऐंटिमाइक्रोबियल्स का प्रभाव ऐसे ही कम होता रहा तो इसका सीधा असर मॉडर्न साइंस की चिकित्सा पद्धतियों पर भी पड़ेगा। क्योंकि बिना प्रभावी ऐंटिमाइक्रोबियल के कोई सामान्य इंफेक्शंस भी ठीक नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही ऑपरेशन, सर्जरी, कीमोथेरपी जैसी चिकित्सा पद्धतियों के दौरान रोगी के शरीर में संक्रमण फैलने से भी नहीं रोका जा सकेगा। जिससे रोगी की जान को खतरा बढ़ेगा।

यह है वर्तमान स्थिति
-आज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बात करें तो कई अलग-अलग शोध में यह बात साबित हो चुकी है कि कई रोग फैलानेवाले वायरस और बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम हो गया है। इनमें टीबी का रोग फैलानेवाले रोगाणु, मलेरिया का संक्रमण फैलानेवाले वायरस, स्किन डिजीज फैलानेवाले फंगस शामिल हैं। अंडा या पनीर, इन दोनों में से प्रोटीन का बेहतर सोर्स क्या है? जानें

microbes-1

भोजन और पानी में स्वच्छता अभाव बढ़ा रहा है रोगाणुओं की क्षमता

-इस स्थिति से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कई देशों की एक कमिटी का गठन किया गया है, जो इस समस्या का समाधान निकालने पर काम कर रही है। इस क्षेत्र में कई अलग-अलग सेक्टर्स को शामिल करके कोई समाधान खोजने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें फूड और एग्रीकल्चर मुख्य रूप से शामिल हैं। खट्टी डकार से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्खे, दूर होगी गले में जलन की समस्या?

2025 का है लक्ष्य
-विश्व स्वास्थ्य संगठन ड्रग फॉर नेग्लेक्टेड डिजीज के तहत पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर्स को साथ लेकर इस दिशा में काम कर रहा है कि इन ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया का इलाज करने के लिए कुछ नए और अलग तरीकों को खोजा जा सके। इस पार्टनरशिप का लक्ष्य वर्ष 2025 तक लाइलाज होते जा रहे इन बैक्टीरिया का इलाज खोजना है, जिनके इलाज को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना है। बाद में पछताना नहीं चाहते हैं तो थाली में जरूर रखें ‘ब्रेन-फूड’

बोझिल हो चुकी आंखों में आएगी नई चमक, अपनाएं ये घरेलू तरीके


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here