The farmer movement in Delhi got the support of the MPs of UK, wrote a letter to UK’s Foreign Secretary | दिल्‍ली में चल रहे किसान आंदोलन को इस देश के सांसदों का मिला सपोर्ट, पत्र लिखकर किया ये आग्रह

नई दिल्‍ली: लेबर पार्टी (Labour Party) के तनमनजीत सिंह धेसी (Tanmanjit Singh Dhesi) के नेतृत्व में ब्रिटेन के 30 से ज्‍यादा सांसदों का एक धड़ा भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में सामने आया है, जो कि बीते 10 दिनों से 3 कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध में दिल्‍ली-हरियाणा और दिल्‍ली-उप्र की सीमाओं पर डटे हुए हैं. 

इन सांसदों ने ब्रिटिश के विदेश सचिव डॉमिनिक रैब से इस मामले को नई दिल्ली के साथ उठाने के लिए कहा है. सांसदों ने रैब को हाल ही में लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ भारत पर दबाव बनाने के लिए कहा है, जो किसानों और खेती पर निर्भर लोगों का ‘शोषण’ करने वाले हैं. साथ ही उन्होंने विदेश सचिव से पंजाब और विदेशों में सिख किसानों के समर्थन के जरिए भारत सरकार के साथ बातचीत करने का आग्रह किया है.

अपने पत्र में धेसी ने लिखा है कि पिछले महीने कई सांसदों ने लंदन में भारतीय उच्चायोग को 3 नए कृषि कानूनों के प्रभावों के बारे में लिखा था. यह ब्रिटेन में सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है, हालांकि यह अन्य भारतीय राज्यों पर भी असर डालता है.

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पत्र में कहा गया है, ‘पंजाबी समुदाय को राज्य की आर्थिक संरचना की रीढ़ माना जाता है.’ इसमें पंजाब में ‘बिगड़ती’ स्थिति और केंद्र सरकार के साथ इसके संबंधों पर चर्चा करने के लिए भी रैब से आग्रह किया.

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किसानों ने किया था सांसदों से संपर्क 
धेसी ने एक ट्वीट में कहा, ‘कई राज्यों विशेष रूप से पंजाब से आने वाले लोगों ने, भारत में कृषि कानून 2020 का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए सांसदों से संपर्क किया है. दर्जनों सांसदों ने इसके लिए विधिवत रूप से क्रॉस-पार्टी पत्र पर हस्ताक्षर किए और शांतिपूर्वक विरोध कर रहे किसानों के लिए न्याय की मांग की.’

बता दें कि किसानों ने दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमाओं पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा है. किसान इस साल संसद में पारित हुए 3 कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉपोर्रेट घरानों की दया पर निर्भर हो जाएंगे.

वहीं सरकार का कहना है कि नए कानून किसानों को बेहतर मौके देंगे. साथ ही सरकार ने विपक्षी दलों पर किसानों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है.




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