सत्ता म रेहेव तब किसान के आँसू नइ दिखिस
शेखचिल्ली किहिस-जेन किसान भगत होय के रोल म हें, उन जब राजगद्दी म बइठे रिहिन तब उन ल किसान के आँसू काबर नइ दिखिस? सत्ता जाय के बाद उनकर नींद टूटे हे. आघू किसान अउ पाछू म राजनीति हे. आघू,-पाछू के खेल चलत हे. खबरीलाल किहिस-‘सरकार कथे हम कृषि क़ानून म संशोधन करे बर तियार हन. किसान नेता कथें कृषि क़ानून पूरा वापिस लेव. सरकार तीनों कृषि क़ानून ल वापिस ले बर तियार नइ हे. किसान बारा दिन ले आन्दोलन म डटे हें. आठ दिसम्बर के भारत ‘बंद’ के आव्हान करे हे. एक जानकारी के अनुसार देश के 86% किसान करा दु हेक्टेयर ले कम जमीन हे. केवल छह प्रतिशत किसान सरकारी दर म अपन खाद्यान्न उत्पाद ल बेचथें’
औसत खेती घाटा के काबर ? लालबुझक्कड़ किहिस-‘किसान अन्नदाता हे. किसान के एकक बूंद पछीना जेन खेत म गिरथे तेंन हीरा-मोती ले जादा कीमती होथे. अन्न जिंदगी देथे. किसान धरती महतारी के वरदानी सन्तान आय. लइका पिचका अउ दाई, माई-लइका सबो संग किसान दिन-रात खेत-बियारा(खलिहान) म मिहनत करथे. मउसम के हर मार सहिथें. हर संघर्ष करथें. खेती करत-करत जिनगी के साँझ हो जथे. तभो ले औसत खेती घाटा के होथे अइसे काबर? आजादी के बाद ले कतको सरकार अइन अउ गिन. सत्ता के राजनीतिक पालना म नेता मन के जिनगानी तो धन्य-धन्य होवत गिस अउ उनकर तकदीर पलटगे. खबरीलाल किहिस-‘ कतको झन महान होगें. उनकर महानता के डंका आजो बाजत हे. उनकर पूजा होवत हे. कुछ अपवाद छोड़ के उन अपन आघू के दसों पीढी बर धन के जुगाड़ करके, उन लोकतंत्र बर रेडीमेड वारिस छोड़ के बिदा होइंन. किसान के जीवन-रस ल कोन चुसत हे? राजनीति किसान के छाती म खुडवा(कबड्डी)खेलत हे. देश ये तमाशा देखत-देखत दंदरगे, बहुत दुखी हे.ये भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: यहा काय ए आजकाल के खाई खजेनी
राजनीतिक रोटी सेंके के बेरा
शेखचिल्ली हर किहिस-किसान राजनेता मन के हाथ के खेलौना बन के रहिगे हे. खाद्यान्न किसान के दाम बैपारी/कोचिया/सरकार के, अउ ओमा घलो भारी संघर्स. किसान के छाती म सालों-साल ले राजनीति होवत हे. केंद्र सरकार के तीन क़ानून के खिलाफ किसान बारा दिन ले सरलग आन्दोलन करत हे. देश देखत हे के विशुद्ध किसान आन्दोलन म विपक्षी राजनीति के रंग घूरगे (घुलगे) हे. हवा गरम हे. सब अपन-अपन रोटी सेंके बर भीडे हें. सत्ता के चाशनी सुरता आवत हे. समय घलो ख़ास हे.
आम किसान के पीरा?
खबरीलाल किहिस-‘किसान आन्दोलन सुनियोजित,सुविचारित अउ पके राजनीति के खेल आय. एमा केंद्र सरकार के तीनों कृषि क़ानून देश म गोल-गोल घुमत रहीगे. एखर सही व्याख्या आम किसान तक पहुंचाय म केंद्र सरकार फेल होगे. विपक्ष के राजनीति किसान आन्दोलन ल लपक ले हे. कोरोना के सेती उन ल कोनो चोक्खा आन्दोलन के अंदेशा नइ रिहिस होही. मउका के ताक म बइठे विपक्ष के नेता मन ये तीनों कृषि क़ानून ल वापिस ले के मांग करत–करत भरम के सुंदर चक्रव्यूह के रचना कर डरींन. एला के झन किसान जानत होहीं? राजनीति म सत्ता जाय के दुःख ले बड़े कोनो दुःख नइ होय. किसान के सुख-दुःख त एक बहाना आय. राजनीति के नाचा देश देखत हे? नेता सर्वग्य होथें.
किसान के अपन संसाधन
लालबुझक्कड़ किहिस-सरकार ल अब किसान हित म कृषि कानून म संशोधन जरूर करना चाही. कृषि क़ानून के भाषा सरल हो. साधारण किसान के मन म शंका झन रहे. साफ़,स्पष्ट अउ पारदर्शी सोच दिखना चाही. आन्दोलनकारी किसान मन के सब व्यवस्था बहुत चुस्त-दुरूस्त अउ बड़ई के लइक हे. एक लाख ले जादा किसान सड़क म हें. अपन पूरा संसाधन लेके मोर्चा म डटे हें. जाड़ा अउ कोरोनाकाल हे. पोनी (कपास) चुने अउ गेहूं के बोवाई के मउसम के सेती ये आन्दोलन म 25% महिला हें. खेती महिला मन के भरोसा हे. वाह पंजाब ,वाह हरियाणा नारी शक्ति महाशक्ति.जेन आन्दोलन म शामिल हें तउन अउ जेन घर म खेती संभाले हें, तउन महिला जागरण के सुंदर उदाहरन लगत हें. प्रशंसनीय हे, ये सुंदर उदाहरन आय.
किसान,करजा अउ ;आत्म हत्या !!
गरीबदास किहिस-‘देश म छोटे अउ सीमान्त किसान के संख्या 86 %हे. केंद्र अउ राज्य सरकार के सब्सिडी के बाद भी 52.5% किसान के उपर एक लाख ले जादा के करजा हे. सब ले जादा किसान उत्तरप्रदेश म हें ओखर बाद बिहार, महाराष्ट्र, म.प्र., कर्नाटक, आंध्रप्रदेश आदि म हें. ऍन.सी.आर.बी.के 2019 के रिपोट के अनुसार देश म खेती-भरोसा जीवन चलइया 10,281 किसान आत्महत्या कर लिन. जेमा महाराष्ट्र के 3927, कर्नाटक 1992,आंध्रप्रदेश 1024, म.प्र. 541, छत्तीसगढ़ 499, तेलंगाना 499 किसान आत्म-हत्या करिन. लालबुझक्कड़ किहिस-पहिली के कहावत हे के भारतीय किसान करजा म जनम लेथे, करजा म जीथे अउ करजा म मर जथे. का ये बात आज घलो सच हे?

