mental disorders and coronavirus: आयुर्वेदिक तरीकों से पाएं मानसिक अवसाद से मुक्ति, खिल उठेगा तन और मन – natural herbs to prevent mental disease and disorders

नैशनल लैबोरेटरी ऑफ मेडिसिन (एनसीबीआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान भारतीय आबादी में तनाव, चिंता, अवसाद, अनिद्रा और आत्महत्या की प्रवृत्ति जैसे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों में बढ़ोतरी हुई है। अब यह एक भयावह स्थिति है, क्योंकि बच्चे, बुजुर्ग, फ्रंटलाइन कार्यकर्ता और इस बीमारी से ठीक हो चुके रोगी, सभी इसके लिे सॉफ्ट टारगेट की तरह हैं।

आयुर्वेद एक समग्र विज्ञान है और मन, शरीर, आत्मा, इंद्रियों और उनके कामकाज के बीच सामंजस्य बनाता है। तनाव के कारण शरीर के तीनों दोष वात-पित्त और कफ में असंतुलन बढ़ता है और शरीर किसी ना किसी रोग की चपेट में आ जाता है। तनाव को बढ़ानेवाले हॉर्मोन्स में पहला नाम है कार्टिसोल का। यह हॉर्मोन रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाकर आपका रक्तचाप बढ़ा सकता है, याददाश्त में कमी कर सकता है, अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। इनसे बचने के लिए आप इन आयुर्वेदिक विधियों को नियमित रूप से अपना सकते हैं…

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आयुर्वेदिक तरीकों से दूर करें मानसिक तनाव

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मालिश का लाभ उठाएं
-आयुर्वेद में, अभ्यंग (तेल मालिश) को नियमित रूप से करने का सुझाव दिया गया है। क्योंकि यह शारीरिक और भावनात्मक रूप से व्यक्ति को बलवान बनाने का कार्य करता है। बाला, अश्वगंधा और चंदन जैसे विभिन्न हर्बल तेलों के साथ नियमित रूप से मालिश करने से शरीर के अंदर हैपी हॉर्मोन्स जैसे, सेरोटोनिन और डोपामाइन का उत्पादन बढ़ता है। इससे अच्छी नीदं में सहायता मिलती है।

योग देता है मानसिक सुकून
-योग एक आत्म-सुखदायक तकनीक है, जो तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है और तंत्रिका तंत्र को आराम करने में मदद करता है। योग अनुशासन तीन पहलुओं पर केंद्रित है- मन, शरीर और आत्मा। वैज्ञानिक रूप से योग (गामा-एमिनो ब्यूटिरिक एसिड), सेरोटोनिन, डोपामाइन और ट्रिप्टोफैन जैसे खुशी बढ़ानेवाले न्यूरोट्रांसमीटर्स के स्तर को बढ़ाता है और कोर्टिसोल स्तर (तनाव हार्मोन) को कम करता है। आयुर्वेद शरीर और मन को नियंत्रित करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए योग के नियमित अभ्यास की सलाह देता है।
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योग से दूर रहता है अवसाद

सात्विक आहार
-आयुर्वेद सात्विक आहार का समर्थन करता है। सात्त्विक आहार एक शुद्ध शाकाहारी भोजन है, जिसमें मौसमी ताजे फल, पर्याप्त ताज़ी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, बीज, शहद, ताज़ी जड़ी-बूटियाँ, दूध और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। जो पशु रेनेट से मुक्त हैं। ये खाद्य पदार्थ सत्व या हमारी चेतना के स्तर को बढ़ाते हैं।
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-सात्विक भोजन प्रेम, कृतज्ञता और जागरूकता के साथ पकाया और खाया जाता है। जैसा कि आयुर्वेदिक क्लासिक्स में कहा गया है कि दैनिक आधार पर इस तरह के आहार को शामिल करने वाला व्यक्ति शांत, सौहार्दपूर्ण और ऊर्जा से भरा होता है। उसमें उत्साह, स्वास्थ्य, आशा, आकांक्षाएं, रचनात्मकता और संतुलित व्यक्तित्व जैसे गुण पाए जाते हैं।

हर दिन करें ध्यान

-ध्यान यानी मेडिटेशन मेंटल हेल्थ और हैपीनेस के लिए बहुत जरूरी है। मन शांत होता है तो व्यक्ति खुशी और संतुष्टि को अंदर से अनुभव करता है। खुश रहना और शांत चित्त होना शरीर के अंदर हॉर्मोन्स के स्तर को सही बनाए रखने में सहायक है। इसलिए मानसिक सेहत और खुशियों भरे जीवन के लिए हर दिन कम से कम 30 मिनट तक ध्यान और श्वांस से संबंधी एक्सर्साइज करें। जैसे, कपालभाति और अनुलोम-विलोम। ये सुझाव मिलेनियम हर्बल केयर के सीईओ और डायरेक्टर चिंतन गांधी द्वारा दिए गए हैं।
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