नई दिल्लीः अमेरिका (USA) की एक निगरानी संस्था ने इस साल रिकॉर्ड संख्या में पत्रकारों को जेल भेजे जाने का खुलासा किया है. कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (Committee to Protect Journalists) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में मीडिया और पत्रकारों का दमन जारी है. कई देशों की सरकारें लगातार मीडिया (Media) की आजादी छीन रही हैं. महामारी के दौरान भी भ्रामक सूचना के आरोप में पत्रकारों को बड़े पैमाने पर जेल भेजा गया.
2020 में 274 पत्रकारों को जेल, 26 की मौत!
रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में कुल 274 पत्रकारों को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया. संस्थान के सर्वे के मुताबिक पत्रकारों के जेल भेजने का ये आंकड़ा एक रिकॉर्ड बन गया है. CPJ ने 1990 के दशक में पत्रकारों पर शोध और अध्यन शुरू किया था. इस साल की रिपोर्ट में 26 मीडियाकर्मियों की मौत की डिटेल शामिल है लेकिन असल आंकड़ा इससे बड़ा हो सकता है.
पत्रकारों के लिए सबसे असुरक्षित Mexico
Committee to Protect Journalists की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मेक्सिको (Mexico) पत्रकारों के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक और असुरक्षित जगह बन चुका है.
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CPJ निदेशक ने बताया चौंकाने वाला आंकड़ा
1990 के दशक में बतौर गैर-लाभकारी संगठन (non-profit organisation) के तौर पर निगरानी और रिसर्च करने वाले संस्थान ने 2020 के फाइनल सर्वे में पत्रकारों को जेल भेजने का जो डेटा जारी किया है वो लगभग 30 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है. सीपीजे (Committee to Protect Journalists) के कार्यकारी निदेशक जोएल साइमन ने एक बयान में कहा, ‘यह आंकड़ा चौकाने वाला है.’
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चीन में सबसे ज्यादा हो रहा मीडिया का दमन
साइमन ने कहा पत्रकारों का दमन, मीडिया सेंसरशिप का रूप है जो सूचना के प्रवाह को बाधित करता है. वैश्विक स्तर पर मीडिया को दबाने में चीन सबसे आगे है. चीन में इस साल 2020 में 47 पत्रकारों को जेल भेजा गया. पिछले हफ्ते ही यहां ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के कर्मचारी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए हिरासत में लिया गया था. चीन में पत्रकारों के खिलाफ बर्बरतापूर्ण अत्याचार होता है. इस सर्वे से कुछ दिन पहले आई CPJ की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में दुनिया में कम से कम 250 पत्रकारों को कैद किया गया. तब चीन की सरकार ने सबसे अधिक 45 पत्रकारों को जेल भेजा था.
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पत्रकारों को जेल भेजने में अव्वल हैं ये देश
पत्रकारों के जेल भेजे जाने की सर्वे लिस्ट में चीन के बाद तुर्की (Turkey), मिस्र (Egypt), सऊदी अरब, बेलारूस, इथियोपिया का नाम शामिल है. बेलारूस और इथियोपिया में तो पत्रकारों की सबसे ज्यादा गिरफ्तारी उनके प्रोटेस्ट के दौरान हुई. CPJ के सर्वे में ग्लोबल प्रेस फ्रीडम को लेकर ट्रंप प्रशासन को भी आंशिक रूप से दोषी बताया गया है. गौरतलब है कि ट्रंप कई मीडिया हाउस को अक्सर खुले आम ‘fake news’ फैक्ट्री करार देते हैं.
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