बीजापुर की कवयित्री पूनम.
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर (Bijapur) की एक कवयित्री अपनी कविताओं के माध्यम से पूरे देश में बस्तर (Bastar) का मान बढ़ा रहीं हैं.
बस्तर की कवयित्री का नाम पूनम वासम विष्वकर्मा है. पूनम मूलतः बीजापुर की रहने वाली हैं. पेशे से शिक्षिका हैं, मगर साहित्य के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं. करीब चार सालों से पूनम बस्तर के आदिवासीयों की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा, सभ्यता, आदिवासीयों के दु:ख, दर्द, तकलीफ, उनपर हो रहे शोषण-अत्याचार को कविताओं के माध्यम से देशभर में सुना रही हैं. बौध्दिक और साहित्यिक क्षेत्र में पिछड़े बीजापुर से निकलकर पूनम ने देशभर के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साथ मंच साझा कर बस्तर के आदिवासियों की आवाज बनकर कविता पाठ कर चुकी हैं.
इन शहरों में कविता पाठ
पूनम अब तक साहित्य अकादमी दिल्ली, रजा फाउंडेशन दिल्ली, ग्वालियर, भारत भवन भोपाल, नीलाम्बर कलकत्ता दारा कलकत्ता में आयोजित लिटरेरिया कार्यक्रम के साथ ही बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में कविता पाठ कर अपनी लेखन प्रतिभा का ढंका बजा चुकी हैं. इतना ही नहीं बल्कि देश की प्रतिष्ठित पत्रिका पहल में भी पूनम की कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं. देश के हर साहित्यकार का सपना होता है कि उसकी रचनाएं पहल जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में छपे. एक साहित्यकार की रचनाओं को जब पहल जैसी पत्रिका में जगह मिलती है तो वो किसी सम्मान से कम नहीं होता. ऐसी प्रतिष्ठित पत्रिका में पूनम की अब तक तीन कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं.किताब छपने की तैयारी
झारखंड, बिहार, उडीसा के शोधार्थी छात्र पूनम विश्वकर्मा वासम की कविताओं पर शोध भी कर रहे हैं. जल्द ही वाणी प्रकाशन से पूनम की कविता संग्रह पर एक किताब भी आ रही है जिसका नाम ”मछलियां गाएंगी एक दिन पंडूम गीत” है. किताब के नाम में भी पूनम ने गोंडी शब्द पंडूम का इस्तेमाल किया है. पंडूम का हिंदी मतलब त्यौहार होता है. अपनी रचनाओं के बदौलत पूनम को अब तक दर्जन भर से अधिक सम्मान मिल चुके हैं. जिसमें से एक है छत्तीसगढ़ साहित्यिक अकादमी द्वारा दिया गया पुनरनवा सम्मान भी शामिल है.

