जगमोहन ठाकुर के हुनर को सब पसंद करते हैं.
एक 100 फीसदी दिव्यांग (Divyang), जो सिर्फ कक्षा तीसरी तक ही पढ़ा है, लेकिन इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स (Electrical and Electronics) में माहिर है.
जगमोहन ने अपनी मेहनत, अपने जज्बे और अपनी कला से किस्मत की लकीरों का रुख पलट कर रख दिया. जन्म से दिव्यांग जगमोहन बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक में रुचि रखते हैं. तीसरी जमात के बाद उन्होंने पाठशाला छोड़ दी और अपनी रुचि की पाठशाला खुद शुरू कर दी. बहरहाल आज जगमोहन का नाम कई जिलों में विख्यात हो चुका है. इसके पीछे कारण है मोटर वाली ट्राइसिकल की रिपेयरिंग में मास्टरी, समाज कल्याण विभाग जो मुफ्त में ट्राइसिकल बंटता है, उनमें जो भी खराबी आती है उसके लिए जगमोहन को बुलाया जाता है. ये सिर्फ धमतरी में नही बल्कि कई जिलों में होता है.
10 हजार ट्राइसाइकिल किया ठीक
जगमोहन ठाकुर की मानें तो आज तक वो करीब 10 हज़ार ट्राइसिकल ठीक कर चुके हैं. इससे उन्हें ठीक ठाक कमाई भी हो जाती है और वो अपने जैसे दिव्यांगों की मदद भी कर पाते हैं. जगमोहन कहते हैं कि वो ऐसा कम्प्यूटर बनाना चाहते है जो बिना बीजंली बिना बैटरी के चल जाये. जगमोहन रायपुर के भाठा गाव में रहते हैं. जब भी उन्हें किसी जिले से बुलावा आता है वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ निकल पड़ते है.

