Chinese Embassy denied allegations of forced sterilisation of Uighur women, Twitter deleted post | चीन में मुस्लिम वीगरों की हो रही जबरन नसबंदी, रिपोर्ट से उठे सवाल!

बीजिंग: चीन के अमेरिकी दूतावास (China’s US embassy) ने हाल ही में एक आर्टिकल ट्वीट किया था, जिसमें कहा गया था कि वीगर महिलाएं (Uighur women) अब ‘बच्‍चे पैदा करने वाली मशीन’ (Baby-making machines) नहीं हैं. हालांकि अब इस पोस्‍ट को Twitter ने हटा दिया है.

वहीं अमेरिका में चीनी दूतावास (Chinese embassy in US) ने आर्टिकल का लिंक पोस्‍ट किया है जिसमें शिनजियांग (Xinjiang) में जबरन नसबंदी के सभी आरोपों का खुलकर खंडन किया गया था. ट्विटर ने दावा किया है कि इस पोस्‍ट में ‘ट्विटर के नियमों का उल्लंघन किया गया है.’ 

कैप्‍शन बदलकर दोबारा पोस्‍ट किया आर्टिकल 
बाद में उसी आर्टिकल को एक अलग कैप्शन के साथ फिर से पोस्‍ट किया गया. अमेरिका में चीनी दूतावास द्वारा की गई इस पोस्‍ट में लिखा है, ‘अध्ययन से पता चलता है कि उत्तर-पश्चिम चीन के शिनजियांग वीगर स्वायत्त क्षेत्र में जनसंख्या में हुए बदलाव से जनसंख्या की गुणवत्ता में सुधार हुआ है. व्यक्तिगत विकास पर ज्‍यादा समय और ऊर्जा खर्च करने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ी है.’

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मूल रूप से चीनी मुखपत्र शिन्‍हुआ द्वारा प्रकाशित की गई इस स्‍टोरी पर सवाल उठ रहे हैं. इसमें दावा किया गया है कि ये आंकड़े और जानकारियां शिनजियांग डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर के शोधकर्ता ली शियाओक्सिया द्वारा किए गए अध्‍ययन के हैं. इस स्‍टडी का शीर्षक ‘An Analysis Report on Population Change in Xinjiang’ है. 

आबादी की नेचुरल ग्रोथ दर घटी  
इस अध्ययन के अनुसार, ‘शिनजियांग में जनसंख्या की प्राकृतिक विकास दर (natural growth rate) 2017 में प्रति 1 हजार लोगों पर 11.4 थी, जो 2018 में घटकर 6.13 हो गई.’ चीनी मुखपत्र के मुताबिक ऐसा बदलाव परिवार नियोजन की नीति (family planning policy) के कार्यान्वयन और शादी एवं बच्‍चों को पैदा करने की मानसिकता में हुए बदलाव के कारण हुआ है. 

यह आर्टिकल एड्रियन जेनज द्वारा लगाए गए उन आरोपों को नकारता है, जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया है कि शिनजियांग में रह रहे वीगरों की आबादी में बदलाव के पीछे कारण बड़े पैमाने पर जबरदस्‍ती की गई नसबंदी है. अध्‍ययन में दावा किया गया है कि जनसंख्या नियंत्रण में सुधार के कारण यह परिवर्तन हुआ है. इसके लिए स्थानीय लोगों ने स्‍वेच्‍छा से काम किया है, ना कि चीनी सरकार ने उन्‍हें मजबूर किया है. 

यह अध्ययन ऐसे समय में आया है जब एशियाई देश चीन पर वीगरों के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं. इसमें उनसे जबरन श्रम कराना, उनकी धार्मिक गतिविधियों का दमन करना, उनकी निगरानी करना और क्षेत्र की आबादी नियंत्रित करने के लिए जबरन नसबंदी करना शामिल है. 

विभिन्न आरोपों और क्षेत्र में किए गए अध्ययनों के बाद कई कंपनियों ने इस क्षेत्र में प्रोडक्‍शन करने वाली इंडस्‍ट्रीज के साथ अपने व्‍यापारिक संबंध खत्‍म कर दिए हैं. साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सरकारों ने भी इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मदद करने के लिए पेशकश की है. 




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