अंतर्राष्ट्रीय वन्य-जीव तस्कर के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव भारत पहुँचा


अंतर्राष्ट्रीय वन्य-जीव तस्कर के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव भारत पहुँचा


प्रदेश के सागर न्यायालय में हो रही सुनवाई
 


भोपाल : शनिवार, जनवरी 30, 2021, 20:02 IST

प्रदेश में माफियाओं के विरुद्ध चल रही कार्यवाही में एसटीएफ (वन्य-प्राणी) को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाईलैण्ड पुलिस से अंतर्राष्ट्रीय वन्य-जीव तस्कर मनीवन्नम मुरुगेशन के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को प्राप्त हुआ है।

उप वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) श्री रजनीश कुमार सिंह ने बताया है कि अंतर्राष्ट्रीय वन्य-प्राणी तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने में मुरुगेशन की गिरफ्तारी काफी महत्वपूर्ण है। मुरुगेशन को 27 अगस्त, 2012 को तकरीबन 900 दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के साथ बैंकाक एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था, पर तब वह गैर-कानूनी तरीके से छूटने में कामयाब हो गया था।

श्री सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश एसटीएफ द्वारा इंटरपोल से मनीवन्नम मुरुगेशन के विरुद्ध थाईलैण्ड एवं अन्य देशों में आपराधिक रिकार्ड संबंधी जानकारी माँगी गयी थी। इसी दिशा में इंटरपोल द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए उससे संबंधित सभी दस्तावेज साझा किये गये।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वन विभाग की एसटीएफ टीम ने मुरुगेशन को 30 जनवरी, 2018 को चैन्नई से गिरफ्तार कर सागर में विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया था। तभी से आज दिनांक तक सागर जेल में बंद है। उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा चार बार और सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा दो बार जमानत याचिका खारिज की जा चुकी हैं।

इंटरपोल, अन्य देशों की कानून प्रवर्तन संस्थाओं और भारत के वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, अन्य राज्यों की पुलिस सहित वन विभाग को लम्बे समय से इसकी तलाश थी। दुर्लभ प्रजाति के कछुए की तरस्करी में मुरुगेशन का नाम विश्व में तीसरे नम्बर पर था। सिंगापुर के रहवासी मुरुगेशन का अवैध व्यापार सिंगापुर सहित थाईलैण्ड, मलेशिया, मकाऊ, हांगकांग, चीन और मेडागास्कर में फैला है।

सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देश पर इस प्रकरण की सुनवाई सागर के न्यायालय में रोजाना हो रही है। श्री सिंह के अनुसार म.प्र. एसटीएफ (वन्य-प्राणी) भारत सरकार के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकार के निर्देश और विधि-संगत प्रक्रिया का पालन कर इसे थाईलैण्ड पुलिस को प्रत्यर्पण पर सौंपेने की कार्यवाही की जायेगी।


ऋषभ जैन


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