बता दें, केंद्र सरकार की योजना में नवा रायपुर भी स्मार्ट सिटी घोषित है. लेकिन यहां पिछले साल 216 करोड़ रुपए का फंड जारी करने के बाद इस बार एक भी पैसा केंद्र ने नहीं भेजा है. जानकारी के मुताबिक, रायपुर देश का इकलौता शहर है, जहां स्मार्ट सिटी के दो मिशन के एक साथ चल रहे हैं. प्रदेश के दो शहरों रायपुर और बिलासपुर के बाद अंतिम चरण में नवा रायपुर को भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है.
पहली किश्त ही नहीं हो सकी खर्च
जानकारी के मुताबिक, नवा रायपुर को स्मार्ट सिटी के लिए पहली बार जनवरी 2020 में 216 करोड़ रुपए मिले थे. आश्चर्य की बात यह है कि पहली किश्त के रूप में दिए गए 216 करोड़ का ही फंड ही पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका. इससे मामला स्मार्ट सिटी मिशन की फंडिंग गाइडलाइन के दायरे में आ गया.
दूसरे फंड के लिए अयोग्य मान ली जाती है स्मार्ट सिटी
नियमों के मुताबिक, पहली किश्त का फंड खर्च न होने की वजह से नए फंड के लिए संबंधित सिटी को अयोग्य माना जाता है. बताया जा रहा है कि इसीलिए केंद्र ने नवा रायपुर का फंड रोका है. केंद्र ने रायपुर और नवा रायपुर, दोनों को ही पांच साल पहले स्मार्ट सिटी घोषित किया था.
ये हैं कारण- आधी-अधूरी टीम के साथ चल रहा काम, योजना ही नहीं
बता दें, नए शहर में भी स्मार्ट सिटी का अलग सीईओ नहीं है. इंजीनियरों-विशेषज्ञों की टीम तक नहीं बनी. 24 पद मंजूर होने के बावजूद सीओओ, जीएम आईटी, जीएम एचआर व मैनेजर जीआईएस जैसे पद खाली हैं. केवल टेक्निकल पदों पर नियुक्ति हुई हैं, वह भी अधूरी. पूरे गैर-तकनीकी पद अभी तक खाली हैं. एनआरडीए के पास नए काम की योजना नहीं. सारा मामला सलाहकार एजेंसियों पर ही निर्भर है.


