yellow foods good for health: पीले रंग की फल और सब्‍जियों को खाकर ठीक करें अपना बिगड़ा स्‍वास्‍थ्‍य, बसंत पंचमी पर जानें इनके जबरदस्‍त फायदे – basant panchami 2021 what are the health benefits of yellow fruits and vegetables

ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की देवी, मां सरस्वती का जन्म आज यानी बसंत पंचमी के दिन हुआ था। लोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। भारत के उत्तरी और पूर्वी भाग में बसंत पंचमी को तृप्ति और धार्मिक उत्सव के साथ मनाया गया, जिसमें पीले रंग का विशेष महत्‍व माना जाता है। लोग पीले रंग का वस्त्र पहन कर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। कई संस्थानों में, सरस्वती पूजा के बाद, केसर के हलवे या मीठे चावल को ‘प्रसादम’ के रूप में वितरित किया जाता था।

पीले रंग का आहार में बेहद खास महत्‍व होता है। हर रंग के फल और सब्ज‍ियों में मौजूद पोषक तत्व आपके स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। लेकिन आज हम खासतौर पर पीले रंग के फल और सब्‍जियों की विशेषताओं पर चर्चा करेंगे। पीले रंग के फल और सब्‍जियां जैसे- कद्दू, नींबू, पपीता, संतरा, आम, खरबूजा, शिमला मिर्च, मक्का, अनानास आदि को अपनी डायट में शामिल कर आप न सिर्फ अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं बल्‍कि हृदय रोग, डायबिटीज और अन्‍य बीमारियों से भी खुद को बचा सकते हैं। यहां जानें आप किन-किन पीले रंग की चीजों का सेवन कर सकते हैं…

अनन्नास

अनन्नास में पोटेशियम और एंजाइमों से भरा हुआ फल है, जो शरीर की सूजन यानी की ब्‍लोटिंग को कम करता है और अंदर से डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता है। यह एंटीऑक्सिडेंट से भरा हुआ है, जिसमें फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने के गुण हैं, इसलिए बीमार होने पर यह विशेष रूप से बहुत अच्छा है।

इसका सेवन करने से शरीर की इम्‍यूनिटी बूस्‍ट होती है, आंखों की रौशनी बढ़ती है और मोतियाबिंद को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा, आहार में पर्याप्त विटामिन सी हमारी त्वचा की गुणवत्ता में सुधार करता है।

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कद्दू

इस सब्‍जी में ढेर सारा फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। इसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि आप डायटिंग कर रहे हैं तो यह आपके लिए अच्‍छी मानी जाती है। इससे कैंसर जैसी बीमारी का खतरा भी टलता है। कद्दू में एक ऐसा पोषक तत्व पाया जाता है, जो हमारी आंखों को तेज रखता है और कैंसर की रोकथाम करता है।

पीली शिमला मिर्च

पीली शिमला मिर्च में हरे रंग की तुलना में अधिक एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं। इनमें एक मीठा स्वाद भी होता है। मिर्च में फोलेट की उच्च मात्रा होमोसिस्टीन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है, इससे हृदय रोग का खतरा कम होता है। साथ ही पीली मिर्च में हरे रंग की तुलना में अधिक एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं।

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मक्का

मकई विटामिन बी, विशेष रूप से थियामिन (आपके मस्तिष्क का स्वास्थ्य इस पर निर्भर करता है) में समृद्ध है, नियासिन (खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है), फोलिक एसिड (लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है) और पैंटोथेनिक एसिड (बी 5) शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय के लिए एक आवश्यक विटामिन। यह ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन, कैरोटीनॉयड से भी भरा हुआ है जो हमारी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शकरकंद

यह बीटा कैरोटीन का एक प्राकृतिक स्रोत हैं, जो शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है। यह शरीर को विटामिन सी देते हैं, जिससे बॉडी की इम्‍यूनिटी बढ़ती है और हृदय स्‍वस्‍थ रहता है। इसके अलावा इसमें आवश्यक पोषक तत्व: पोटेशियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं। इसे खाने से दिमाग भी तेज होता है।

केला

यह विटामिन ए, बी, सी, ई, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम का भंडार है। इसमें अमीनो एसिड होता है, जो एलर्जी से बचाव करता है। केले में मौजूद B6 की उपस्थिति से त्वचा की लोच बनी रहती है। यह एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो समय से पहले उम्र बढ़ने के लिए ऑक्सीजन मुक्त कणों की वृद्धि को रोकता है और एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है।

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आम

आम विटामिन-ए का भंडार है और त्वचा को सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाता है। इसमें पॉलीफेनोल होता है, जो विभिन्न प्रकार के कैंसर से बचाता है। आम में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जैसे क्वेरसेटिन, फिसेटिन, आइसोक्वेरिट्रिन, एस्ट्रैगलिन, गैलिक एसिड और मिथाइल गैलेट। ये सभी गुण हमारे शरीर को स्तन कैंसर, पेट के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और ल्यूकेमिया से बचाते हैं।

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नींबू

नींबू में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसमें विटामिन-सी और साइट्रिक एसिड काफी ज्‍यादा मात्रा में पाए जाते हैं। यदि इसे स्‍किन पर लगाया जाए, तो स्‍किन पर चमक आती है और त्‍वचा के दाग धब्‍बे भी दूर होते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट यौगिक रक्त शर्करा के स्तर पर नकारात्मक प्रभाव और इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार करते हैं, जो टाइप 2 मधुमेह के विकास के दो मुख्य कारक हैं।


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