कार्यकारिणी में नियम कायदों की खुलकर धज्जियां उड़ाई गई. पैसे के लेनदेन से लेकर अपने किराएदार, बिजनेस पार्टनर और महिला मित्र तक को भी कार्यकारिणी में शामिल करने का खुला आरोप लगा. इतना ही नहीं पदाधिकारी नहीं बनाए जाने से क्षुब्ध एक कार्यकर्ता ने प्रदेश कार्यालय में आकर आत्मदाह करने तक की धमकी दे दी.
प्रदेश प्रभारी तक पहुंची थी शिकायत
कार्यकारिणी गठन को लेकर दर्जनों शिकायत प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी तक पहुंची. जिस पर प्रभारी ने अध्यक्ष अमित साहू को तलब कर ना केवल फटकार लगाई बल्कि नियुक्त पदाधिकारियों का प्रोफाइल भी मांग लिया जिसमें आयु प्रमाण पत्र मुख्य रूप से शामिल है. बीजेपी के भीतर मचे बवाल पर सत्ताधारी दल हमलावर है. सत्ताधारी दल के प्रवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि सत्ता से उतरते ही बीजेपी का असली चरित्र सामने आमने आ गया है और भीतरखाने चल रही गुटबाजी अब सतह पर आ गई है.
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सालों बाद विपक्ष में आई बीजेपी को अपनी जिम्मेदारी समझते समझते ही करीब ढाई साल बीत गए, बहरहाल देखना होगा कि सरकार से लड़ाई लड़ने जिन युवा कंधों पर बीजेपी ने जिम्मेदारी दी है वे अपनी जिम्मेदारी विवादों से बाहर निकल कितना निभा पाते हैं.

