छत्तीसगढ़ी में पढ़ें – आँसो – पऊर – परिहार तीनों सदादिन रइहीं


धरती के कोख मा सिरजनहार हा सबो रतन ला जतन के राखे हावय. जतनइया के जतन ला जानना हे ते अपन स्वांसा के राहत ले संसारी बनके जीव के रक्षा मा लगे राह.


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