ऐसा लगा कि सरकार चलाना सार्थक हो गया- मुख्यमंत्री श्री चौहान


ऐसा लगा कि सरकार चलाना सार्थक हो गया- मुख्यमंत्री श्री चौहान


इंदौर में भू-माफियाओं पर कार्रवाई से प्रसन्न हैं आमजन
कलेक्टर इंदौर ने दिया प्रेजेंटेशन
 


भोपाल : बुधवार, मार्च 10, 2021, 20:32 IST

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुसार इंदौर में भू-माफिया के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा भू-माफियाओं के विरुद्ध सीधा एक्शन लेने के स्पष्ट निर्देशों से इंदौर में वे लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं, जो कई दशकों से अपने भू-खण्‍ड का कब्जा नहीं ले पा रहे थे। इंदौर में अब ऐसा वातावरण बन गया है कि कई कॉलोनी में अपूर्ण विकास कार्य बिल्डर्स द्वारा प्रारंभ कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इंदौर में हुए कार्य को देख कर उन्हें यह महसूस हो रहा है कि सरकार चलाना सार्थक हो गया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान के निर्देश पर राज्य-स्तरीय कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस में इंदौर कलेक्टर श्री मनीष सिंह ने प्रेजेंटेशन में बताया कि इंदौर में सहकारी समितियों एवं निजी कॉलोनियों के सदस्यों को पात्रता के भू-खण्ड दिलाने संबंधी सफल कार्यवाही की गई है। कुल 858 सहकारी समितियाँ हैं। इनमें शिकायत वाली समितियाँ 128 हैं। सर्वाधिक शिकायत वाली 12 समितियाँ हैं, जिसमें विवादित भू-खण्ड करीब 10 हजार हैं। शेष 116 समितियों में विवादित भू-खण्ड लगभग 5 हजार हैं। इतने ही निजी बिल्डर्स द्वारा निर्मित निजी कॉलोनियों में भी हैं। इंदौर में इस तरह करीब बीस हजार विवादित भू-खण्‍ड हैं। प्रशासन ने व्यूह रचना बनाकर इंदौर में चरणबद्ध कार्यवाही की।

इंदौर में प्रथम चरण में 5 कॉलोनी, जिसमें 3,578 भू-खण्‍ड हैं और उनका मूल्य लगभग 7 हजार 500 करोड़ रुपये है और द्वितीय चरण में 7 कॉलोनी, जिसमें 6,342 भू-खण्‍ड हैं, जिनका मूल्य 14 हजार करोड़ रुपये है, कार्रवाई के लिए चुने गए। तृतीय चरण में शेष 116 कॉलोनी, जिनमें 5 हजार भू-खण्ड हैं, जिनका मूल्य 10 हजार 750 करोड़ रुपये है। प्रथम चरण में 2 कॉलोनी के 1,519 भू-खण्ड, जिनकी अनुमानित कीमत 3,250 करोड़ रुपये है, मुक्त कराए जा चुके हैं। यह महत्वपूर्ण सफलता है।

कलेक्टर ने बताया कि अनेक नागरिक इस बात से परेशान थे कि उन्हें भू-खण्ड का कब्जा नहीं मिला। गृह निर्माण समितियों की समस्याएँ प्रशासन के ध्यान में आईं। यह ज्ञात हुआ कि 30-35 वर्षों से रजिस्ट्री हो गई, किन्तु सदस्य अपने ही स्वामित्व के भू-खण्‍ड पर जा नहीं सकते थे। सदस्यों के भू-खण्डों के ऊपर माफियाओं द्वारा अन्य को रजिस्ट्री या सोसायटी के कब्जा की समस्या थी। बिना पारदर्शी प्रक्रिया के संचालक मंडल के चुनाव एवं चुनाव में माफिया के गुण्डे-कर्मचारी निर्वाचित थे। सदस्यों पर भू-खण्ड सस्ते में बेचने का निरंतर दबाव रहता था। भू-खण्‍डों की खरीद-फरोख़्त होती थी। बिना वरीयता देखे संचालक मंडल द्वारा इनका विक्रय होता था।

सहकारिता विभाग से परामर्श प्राप्त कर अथवा बिना परामर्श के सोसायटी की भूमि का अन्य को विक्रय भी होता रहा। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कैसे गृह निर्माण समिति की समस्या का समाधान किया गया। इसके लिए क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधियों एवं संघर्ष समिति सदस्यों के साथ नियमित बैठक हुई। बैठकों से सोसायटी की भूमियों, वरीयता सूची, भू-खण्‍डों की रजिस्ट्री की सत्यता संबंधी जानकारी का संकलन किया गया। गृह निर्माण सोसायटी की भूमि का संयुक्त स्थल निरीक्षण किया गया।

सोसायटी के भय ग्रस्त सदस्यों को जन-प्रतिनिधियों, प्रशासन एवं पुलिस की ओर से प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया। इसके पश्चात राजस्व, नगर तथा ग्राम निवेश, रजिस्ट्रार कार्यालय एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ 3 दिशा में कार्य किया गया। प्रथम दल को हुई समस्त रजिस्ट्री प्राप्त कर वरीयता सूची तैयार करने संबंधी जिम्मेदारी दी गई। द्वितीय दल को माफियाओं द्वारा भू-खण्‍डों के ऊपर की गई अवैध रजिस्ट्री की जांच तथा FIR संबंधी जिम्मेदारी दी गई। तृतीय दल को मौके पर साफ-सफाई कर ले-आउट डालने एवं पुरानी हो चुकी अधोसंरचना को पुनः जीवंत करने संबंधी कार्य दिया गया।

कलेक्टर ने बताया कि प्रत्येक दल का नेतृत्व एसडीएम स्तर के अधिकारी तथा तीनों दलों की मॉनीटरिंग एडीएम स्तर के अधिकारी द्वारा प्रत्येक सोसायटी के लिए निर्धारित की गई। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि भू-माफियाओं द्वारा की गई अवैध रजिस्ट्री के प्रकरणों में क्रेता का चिन्हांकन हुआ, इस बिन्दु पर भी जाँच हुई कि, क्रेता इस अवैध रजिस्ट्री के अपराध में संगमत है अथवा क्रेता के साथ विक्रेता सोसायटी द्वारा छल-कपट किया गया है। ऐसे आरोपियों के विरूद्ध थाने में एफआईआर की गई, जिन्होंने सोयायटी से संगमत होकर सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की है।

सोसायटी की भूमि की सफाई एवं ले-आउट चिन्हांकन

कलेक्टर ने बताया कि संघर्ष समिति के सदस्यों की टीम एवं नगर निगम की मदद से मौके पर सैकड़ों डम्पर मलबा एवं कचरे की सफाई करवाई गई। मौके पर ले-आउट डालने की कार्रवाई की गई, ताकि पात्र सदस्यों को भू-खण्ड़ का आधिपत्य सोसायटी के अध्यक्ष अथवा प्रशासक से दिलवाया जा सके। 20-30 वर्ष पुरानी हो चुकी अधोसंरचना में सुधार के लिए संघर्ष समिति सदस्यों को विभिन्न विभागों का आवश्यक सहयोग था। पात्र सदस्यों को उनके अधिकार का भू-खण्ड़ दिलवाया गया, उसमें बाउण्ड्री वॉल एवं अन्य निर्माण कार्य कराया गया। पात्र सदस्यों की रजिस्ट्री प्रथम होने से इन सदस्यों का प्रबल वैधानिक अधिकार भू-खण्ड़ों पर होना प्राथमिकता में लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनाई गई। सांसद एवं विधायक प्रतिनिधि के साथ सोसायटी के 3 सदस्यों सहित कुल पाँच सदस्यों की पर्यवेक्षण समिति का गठन हुआ।

अब निजी बिल्डर्स भी सुलसा रहे हैं प्रकरण

कलेक्टर इंदौर ने बताया कि भू-खण्‍डों का प्राप्त न होना, विकास कार्य अपूर्ण होना, विभागों से आवश्यक अनुमतियाँ न लेना, इस तरह की श्रेणी में लगभग 5 हजार भूखंड विवादित होना पाया गया है। वर्तमान माहौल को देखते हुए निजी बिल्डर्स दिन-प्रतिदिन ऐसे विवादों को सुलझा रहे हैं, ताकि उनकी शिकायत जन-प्रतिनिधि अथवा प्रशासन का कोई सदस्य न करे।


अशोक मनवानी


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