Assam Election Analysis: असम में कांग्रेस का छत्तीसगढ़िया फार्मूला चला रहे CM भूपेश बघेल! चुनाव परिणाम पर रहेगी नजर

Assam Election: असम चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करते छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल. (फोटो साभारः टि्वटर)

Assam Election: असम चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करते छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल. (फोटो साभारः टि्वटर)

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ‘छत्तीसगढ़िया बूथ स्तरीय रणनीति’ का फार्मूला अगर असम विधानसभा चुनाव में चल गया तो यह बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण होगा. इस चुनाव के नतीजों का असर क्या छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं के कद पर भी पड़ने वाला है, पढ़ें विश्लेषण.

रायपुर. 126 सीटों वाली असम विधानसभा के लिए इस बार तीन चरणों में होने वाले चुनाव के पहले चरण में 12 जिलों की 47 सीटों पर 27 मार्च शनिवार को वोट डाले जाएंगे. इसके लिए कांग्रेस, भाजपा सहित सभी दलों के 267 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसके बाद 1 अप्रैल को 39 सीटों पर दूसरे और 6 अप्रैल को तीसरे व अंतिम चरण में 40 सीटों पर मतदान होगा. 2 मई को चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे. इस चुनाव में कांग्रेस अपनी ‘छत्तीसगढ़िया रणनीति’ को आजमा रही है, जिसकी अगुवाई छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर रहे हैं. कांग्रेस ‘छत्तीसगढ़िया बूथ स्तरीय रणनीति’ का फार्मूला असम में अगर चल गया, तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं. यह ठीक वैसा ही होगा, जैसा छत्तीसगढ़ में हुए 2018 के विधानसभा चुनाव में हुआ था, वहां 15 सालों तक सीएम रहे रमन सिंह की सत्ता चली गई थी.

इस फार्मूले को कामयाब करने के लिए भूपेश बघेल ने कांग्रेस के अपने 100 से ज्यादा बड़े-छोटे-मझोले सिपहसालारों को पिछले दो महीने से असम की चुनावी जंग में उतार रखा है. बता दें कि यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने पूरे असम चुनाव की कमान किसी एक राज्य के नेताओं के हाथ में सौंप रखी है. लिहाजा साफ तौर पर इस चुनाव के नतीजों का असर छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं के कद पर भी पड़ने वाला है.

गौरतलब है कि असम विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा अपना संकल्प पत्र और कांग्रेस ने अपना जन घोषणापत्र पहले ही जारी कर चुकी है. कांग्रेस ने जहां 5 लाख रोजगार, हर गृहणी को हर महीने 2000 रुपये देने, चाय बागान मजदूर का मेहनताना बढ़ाने, जनता की सहूलियतों और सीएए कानून की खिफालत जैसे तमाम वादें किए हैं. वहीं, भाजपा ने सीएए कानून को लेकर चुप्पी साधते हुए एनआरसी व्यवस्थित रूप से लागू करने जैसे वादे किए हैं. बता दें कि भाजपा को सीएए के मुद्दे पर असम में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

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