लंदन: एक नए अध्ययन (Study) में सामने आया है कि यदि ऑफिस (Office) में आप ऐसी जगह बैठते हैं, जहां पीछे दीवार है तो यह न केवल आपके बल्कि आपकी कंपनी (Company) के लिए भी फायदेमंद है. स्टडी के मुताबिक, इस तरह के सिटिंग अरेंजमेंट से कमर्चारी की प्रोडक्टिविटी (Productivity) बढ़ती है, जो निश्चित रूप से कंपनी के लिए भी फायदे की बात है. जबकि ऐसे कर्मचारियों के लिए अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिनके पीछे अन्य कर्मचारियों की डेस्क हो.
172 Employees से की बात
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) के शोधकर्ताओं ने पाया कि रेस्टोरेंट या पब की तरह ही लोग ऑफिस में भी ऐसी डेस्क पर बैठना पसंद करते हैं, जिसके पीछे दीवार हो. ऐसा बॉस की निगाहों से बचने के लिए नहीं बल्कि खुद को ज्यादा कम्फर्टेबल पोजीशन में रखने के लिए है. शोधकर्ताओं ने इसके लिए लंदन टेक फर्म के 172 कर्मचारियों से बात की, जो एक बड़े ओपन-प्लान ऑफिस (Open-Plan Offices) में काम करते हैं.
यूके में आम हैं Open-Plan Offices
शोधकर्ताओं ने कर्मचारियों से काम पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, अपनी टीम, सामंजस्य और उत्पादकता जैसे फैक्टर के आधार पर अपनी कार्यस्थल संतुष्टि को रेट करने के लिए कहा. प्रमुख शोधकर्ता डॉ. कर्स्टिन सैलर (Dr Kerstin Sailer) ने कहा कि यूके में ओपन-प्लान ऑफिस बेहद आम हैं. हालांकि, ऐसे वर्कप्लेस में काम करना लोगों के लिए काफी मुश्किल होता है.
Desk के पीछे Desk भी गलत
उन्होंने बताया कि ऐसे कमर्चारियों के लिए भी अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है, जिनके सामने दूसरे कर्मचारी काम कर रहे होते हैं. लंदन के अधिकांश कार्यालयों में सिटिंग अरेंजमेंट ऐसा होता है कि एक कर्मचारी अपनी डेस्क से 66 अन्य को देख सकता है. डॉ. कर्स्टिन के मुताबिक, सर्वे में शामिल ज्यादातर कर्मचारियों ने इसकी शिकायत की. साथ ही ऐसे कर्मचारियों ने भी उत्पादकता प्रभावित होने की बात कही, जिनकी डेस्क के पीछे दूसरे लोगों की डेस्क है.
Window के पास बैठना अच्छा
स्टडी में यह भी कहा गया है कि खिड़की के बगल में बैठने वाले कर्मचारी अपने काम पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं, बजाये उनके सीट सबसे किनारे दीवार के नजदीक होती है. सर्वे में शामिल एक कर्मचारी ने कहा कि ओपन-प्लान ऑफिस में काफी शोर होता है और इस वजह से ध्यान केंद्रित नहीं हो पता. यदि इसमें बदलाव किया जाता है तो निश्चित तौर पर प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी.

