काठमांडू: प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली (K.P.Sharma Oli) के संसद में विश्वास मत हारने के बाद नेपाल (Nepal) की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी (Bidya Devi Bhandari) ने बहुमत वाली नई सरकार बनाने के लिए पार्टियों को आमंत्रित दिया है. राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है, ‘राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के तहत बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए पार्टियों को आमंत्रित करने का फैसला किया है.’ उन्होंने सभी पार्टियों को दावा करने के लिए गुरुवार की सुबह 9 बजे तक का समय दिया है.
43 वोट से हार गए ओली
संसद में विश्वास मत साबित करने के दौरान ओली के पक्ष में 93 और विरोध में 124 वोट पड़े. जबकि विश्वास मत जीतने के लिए 136 वोटों की जरूरत थी. ओली 43 वोटों से हार गए. इस सत्र में 232 सांसदों ने भाग लिया था. सोमवार को संसद के विशेष सत्र के तुरंत बाद ही 3 विपक्षी नेताओं, शेर बहादुर देउबा (नेपाली कांग्रेस), पुष्पा कमल दहल-प्रचंड (सीपीएन-माओवादी सेंटर) और उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जनता समाज पार्टी के एक धड़े ने राष्ट्रपति से आग्रह किया था कि सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जल्द आमंत्रण दें.
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गठबंधन सरकार को भी 10 मत की दरकार
नेपाली कांग्रेस में 61 विधायक हैं जबकि संसद में CPN-Maoist Center के 49 सदस्य हैं. उपेंद्र यादव गुट के कुल 32 विधायकों में से केवल 17 विधायक कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन में हैं. ऐसे में गठबंधन की सरकार बनाने के लिए नेपाली कांग्रेस को अभी भी 10 और वोटों की जरूरत होगी. वहीं नेपाल वर्कर्स एंड पीजेंट्स पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और राष्ट्रीय जनमोर्चा पार्टी की संसद में एक-एक सीट है और इन्होंने अब तक पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा नहीं की है. वहीं जनता समाजवादी पार्टी के नेता महंत ठाकुर ने नई सरकार के गठन का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता सरकार बनाने या किसी सरकार का हिस्सा बनने के बजाय अपने एजेंडों को पूरा करने की है.
गुरुवार को होगा अगला सत्र
ओली के विश्वास मत हारने के बाद राष्ट्रपति को नई सरकार (Government) बनाने के लिए अनुच्छेद 76 (2) को लागू करना होगा. ऐसा तब होता है, जब सदन में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता है. ऐसे में राष्ट्रपति सदन के किसी सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगी जो दो या ज्यादा दलों के समर्थन से बहुमत पा सके. सदन की स्पीकर अग्नि सपकोटा ने सोमवार की संसदीय बैठक में बताया कि अगला सत्र गुरुवार को होगा.
बता दें कि संसद को संबोधित करते हुए ओली ने कहा था, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के विकास और राष्ट्र-निर्माण के लिए काम करने वाली सरकार को छोटे और पक्षपातपूर्ण हितों के लिए निशाना बनाया जा रहा था.’
पिछले कुछ हफ्तों में COVID-19 मामलों में आए उछाल से निपटने में मिली विफलता के लिए देउबा, प्रचंड और यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने ओली को जिम्मेदार ठहराया था.

