Krishna Leela organised for the first time in Kusmi people chants name of Vasudev mpns

बलरामपुर. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी में कृष्ण लीला पहली बार हुई. सनातन धर्म के रक्षक जगतगुरु स्वामी रामानुजाचार्य के अनुयायी अनुरागी जी महाराज की पहल से कुसमीवासियों ने पहली बार कृष्ण लीला को नाट्य रुप में देखा. इस बीच संतो के प्रवचनों ने लोगों का मन मोह लिया. कृष्ण लीला के समापन अवसर पर बुधवार को पूरा कुसमी भक्तिमय हो गया.

इस कृष्ण लीला के दौरान आयोध्या के संत गौतम प्रयदर्शी ने भगवान की कथा सुनाकर लोगों को भक्तिरस में डुबो दिया. लोग लंबे समय तक इस रस में झूमते रहे. उन्होंने कहा कि मानव समाज में लोगों के बीच अगर अच्छी संस्कृति दिखाई जाए, उसके गुण बताए जाएं तो लोग कई तरह के बुरे कामों से दूर हो जाएंगे. इस देश में राम-कृष्ण के प्रमाण मिलते हैं, ऐसे में आप इसके महत्व को कैसे अनदेखा कर सकते हैं.

भक्तों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

इस मौके पर कुसमीवासियों ने बढ-चढ़कर हिस्सा लिया. कृष्ण लीला देख रहे स्थानीय निवासी उमेश्वर ओझा ने कहा कि हमारा भारत देश बहुत बड़ा है. देश का एक राज्य छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ के उत्तर में पड़ने वाला बलरामपुर जिला सबसे अंतिम छोर पर बसा हुया है. उस जिले के कुसमी को पिछड़े इलाके के रूप में देखा जाता है, इसलिए अभी तक यहां कृष्ण लीला जैसा आयोजन नहीं हुआ था. लेकिन, इस बार पहली बार ये आयोजन भी हुआ और लोगों भक्तिरस में डूबे.

संत ही जोड़ सकते हैं संस्कृति से

गौरतलब है कि इस कृष्ण लीला को उत्तर प्रदेश के वृंदावन के कलाकारों ने पेश किया. स्थानीय निवासी विनोद गुप्ता ने कहा कि बात तो यह भी है कि भले ही आज लोगो नें विकास कर लिया हो, कई संसाधन जुटा लिए हों, लेकिन अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिनके पास न टीवी है, न मोबाइल. ऐसे में वह अपनी संस्कृति से कैसे जुड़ सकता है. संस्कृति से जुड़ने का एक ही मार्ग है और वह है सतों के प्रवचन. संत कथा के माध्यम से लोगो  को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं.

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