टेंगना ला कोकड़ा हा कहिथे- तोर करा कभू लबारी अउ मजाक करे हौं मितान, आज तक? नइ पतियावत तब झन पतिया अउ पन्दरा दिन के भीतर बड़े-बड़े बुलडोजर पानी खींचे खातिर टैंकर, क्रेन अउ जेसीबी मशीन आही न तब तुमन ला पता चलही. मोर काम बताय के, सावचेत करे. अब एती तुमन ला का करना हे तेला तैं अपनी बिरादरी मं जाके खबर ला पहुंचा दे. बहुत बड़े आफत के पहाड़ टुटइया हे तुंहर मन ऊपर. कोकड़ा खबर दे के चल दीस, अउ एती टेंगना के नींद हराम होगे. ओहर अपना बिरादरी के मुखिया भुंडा मछरी करा जाथे. ओला देख के भुंडा हा अटियावत पूछथे- अरे टेंगना, कइसे डर्राय, अउ झझके कस दिखथस. कुछू खास बात हे का?.
टेंगना के मुंह ले बक्का नइ फूटत रिहिसे. रोआंसी बानी मं कहिथे- मालिक गजब होगे, पहाड़ टूटगे, हमर मन ऊपर, बिंदरा बिनाश होवइया हे. कहां जाबो, का करबों, कइसे जीवन के निरवाह होही, नान-नान लोग-लइका, बिगन मारे के मारे मर जाबो मालिक. अरे का होगे, तउन ला तो बता, के बस अइसने रामायन पढ़त रहिबे? भुंडा के बात ला सुनके टेंगना बताथे- मैं रामायन नइ पढ़त हौं मालिक, जइसे रूस यूक्रेन ला धमकी देवत रिहिसे तोर ऊपर हमला करिहौं, तभे चेतबे. यूक्रेन ओला मजाक समझत रिहिस अउ एक दिन सिरतोन मं यूकरेन ऊपर धावा बोल दीस. वइसने नगर निगम हा बहुत पहिली के धमकावत आवत रिहिसे के बुढ़वा तरिया ला पाट के इहां माल अउ बेवसायिक परिसर बनाबो कइके. ओ धमकी सिरतोन होगे हे. “मेयर इन काउसिंल” के बइठक मं प्रस्ताव पास कर डरे हें. अब बता का करना हे तउन ला?.
भुंडा मछरी भीम कस गरजत कहिथे- नइ हो सकय टेंगना अइसन, कहूं अइसन कदम ओहर उठाही तब हम ओकर बारा ला बजा देबों, ईंट ले ईंट टकरा देबो. का समझे हे नगर निगम वाले मन. हमरे मन के भरोसा मं अतेक बड़े-बड़े भवन, योजना अउ कारोबार कराए हे तेला भुलागे. ओहर कहिथे- नइ पाटन दन तरिया ला. टेंगना जा बिरादरी के जतका झन हे, उहां मुनादी करा दे, दिन बुड़ताहा बइठक करबों. ओमा आगू का करना हे, आंदोलन करना हे, रायपुर, दिल्ली के बड़े-बड़े नेतामन ला ज्ञापन देना हे, तेकर उपर चरचा करे जाही. भुंडा ह जइसे केहे रिहिसे तइसे अपना बिरादरी के पड़हीना, कतला, रोहू, खोखसी, सारंगी, कोतरी, मोंगरी अउ कतको मछरी हे तेकर मन घर जा-जाके बइठक के मुनादी कर दिस.
दिन बुड़ताहा मं जम्मो मछरी मन के बइठका होइस. अध्यक्षता भुंडा मछरी हा करत पूरा घटना के जानकारी अपना बिरदारी मन के सदस्य मन ला दीस. बताथे- “मेयर इन काउन्सिल” के बइठक मं प्रस्ताव पास करे गे हे जेमा ये तरिया ला पाट के माल अउ बेवसायिक परिसर बनाही. मतलब ये तरिया ले हमर मन के छुट्टी.
कतला मछरी हा पूछथे- तब कस जी भुंडा, ये तरिया ला पाट देही, तब हमन कहां जाबो, का होही हमर मन के?
भुंडा हा कहिथे- तब उही खातिर तो बइठका बुलाय हौं जी, अब ऐमा तुंहर मन के का कहना हे, का करना हे, तउन ला बतावौ. वइसने आगू कदम उठाय जाही.
पड़हीना मछरी हा कहिथे- नइ होवन दन गा अइसन. बरपेली खदेड़ दिही का. ये तो नगर निगम के क्रूर निरनय हे. ककरो घर-बार ला उजाडऩा, बेघरबार करना कहां के नियम हे, नियाव हे. ये फैसला के खिलाफ जहां तक लड़ाई लडऩा हे, लड़े बर तइयार हन. ये निगम अउ सरकार हा हत्यारा हे. आंदोलन करबो, कोर्ट जाबो, हाई कोर्ट म नइ होही फैसला तब सुप्रीम कोर्ट जाबो. राज्यपाल, मुख्यमंमत्री, राष्ट्रपति अउ प्रधानमंत्री तक ज्ञापन देबो अउ नियाव के गुहार करबों. बिरादरी के जम्मो मछरी पड़हीना के बात के समरथन करिन.
रोहू, केवई अउ मोंगरी मछरी मन किहिन- पड़हीना के बात के तो समरथन करत हन फेर एक बात अउ हे, ये मछिन्दर मन महीना दू महीना नइ जा पाय, तरिया मं जाल मार के हमर लोग लइका मन ला धर के ले जाथे, अउ बाजार मं बेच देथे. पेटी मं बरफ डाल के कोलकोता, मुंबई, आंध्रा अउ देश के कोना-कोना मं बेच देथे. ये मछिंदर मन के अइसन जाल मरई ऊपर रोका-छेका लगाय बर घला कुछ उपाय सोचव.
कोतरी, सुरांगी अउ रुदनी ओकर मन के बात के समरथन करत कहिथे- हां भुंडा महाराज, हमर मन के हाल वइसने हे, जइसे देवकी अउ वसुदेव के संग होवत रिहिसे. कंस आवय अउ देवकी के नान्हें बेटा ला पटक के मार डरय. हमू मन वइसने निरबंशी होगे हन,लोग-लइका के मुख देखे नइ पावन अउ चंडाल मछिंदर मन जाल मारके दुधमुंहा पिलवा मन ला ले जथे. महतारी के आगू ले कोनो ओकर बेटा ला छीन के लेगही तेन समय के पीरा ला ओकर छोड़े कोन जादा जानही? भुंडा मछरी कहिथे- ठीक हे, तुंहरो मन के बात गंभीर हे, सोचे के लइक हे. फेर अभी जउन आफत आये हे, एकर ला निपटे बर कइसे करे जाय?.
नहीं मालिक, ये मामला बहुत ही गंभीर हे, टेंगना हा भुंडा ला कहिथे- हमन पानी के रहइया जीव हन. इहां ले हमन ला बेदखल करे जाही तब एकर बेवस्था नगर निगम हा का करे हे. हमर ये समस्या ला नदी-नरवा, ढोडग़ा, बांधा अउ समुद्र मं रहइया मछरी मन ला तक दे जाही. अरे आज हमर मन ऊपर अइसने आफत आये हे, काल उकरो मन ऊपर आ सकत हे. एकता मं बल होथे, सब जुरमिल के अपन बात ला सरकार कर रखबो. कइसे नइ सुनही. नइ सुनही तब भूख हड़ताल करबो. आखिर मं अदालत के दरवाजा तो खुले हे.
ओती टेंगना हा अपन बिरादरी के निरनय के सबो बात ला ओकर मेर मिले ले आय रिहिसे एक दिन कोकड़ा हा, तब सबो बता ला फोर के ओला बताय रिहिसे. कोकड़ा खुश होके ओकर बात ला सुनके अउ कहिथे- मितान समाज होय तब अइसने. कतेक सुग्घर सुनता अउ एकता हे तुंहर मन मं. अच्छा अब ये बता एती आघू का करे के बिचार हे.
टेंगना बताथे- आंदोलन करबों काहत हें, अउ एमा बात नइ मानही तब अदालत के रसदा तो दीखबे करत हे. सीधा अंगुरी मं घी नइ निकलय मितान. बात तो तोर सोलह आना सही हे. एक सुझाव मोर करा हे, मानिहौ तब बताहूं, नइते फेर राहन दे, तुंहर समाज के मामला हे भई, बीच मं मैं भेंगराजी नइ डालौं. कोकड़ा हा अपन मितान ला कहिथे.
नहीं मितान, तोर बात ला मैां मानिहौं, अउ समाज के मन घला मानही, काबर तैं कभू मोला दगा नइ दे हस.
दूनो मितान के बीच मं अइसने गोठ बात होवत रिहिसे ते कोन डाहार ले कउंआ आगे, कांव…कांव… करत. ओहर पूछथे- तुंहर दुनो मितान के बीच मं का गुल खिलत हे, कहूं कोनो बड़े शिकार के गुनताड़ा (योजना) तो नइ बनत हे?
टेंगना कहिथे- कोन मरय का के मारे, अउ तोला हरियर-हरियर सुझे रहिथे.
का होगे टेंगना,कइसे मुंह ला अंइठके गोठियावत हस, सब बने-बने तो हे ना?
कउंवा के बात ला सुनके टेंगना कउवा जथे अउ कहिथे- जेकर घर मं आगी लगे रहिथे, पहाड़ गिरे रहिथे उही जानथे दुख ला. तोला का हे, फोकट के तीन दम मरइया ला?
देख टेंगना, मैं एती-ओती के बात ला तोर नइ सुनौ, मैं काबर आय हौं तोर करा तउन ला तैं समझगे होबे?
हौ… हौ… समझगेंव कउंवा, फोकटचंद कहिके, जा पचरी तीर मं सरांगी, कोतरी अउ रुदनी मेंछरावत होही, गटक लेबे. ओतके बर तो तैं आय हस रे दुछुट्ठा . टेंगना के बात सुन के पचरी करा फुर्र ले उड़ागे आगे. ओला कांही अउ ककरो कांही बात बानी नइ लगय. मनपसंद मछरी मन ला गटकिस अउ डकारत जिहां जाना रिहिसे तिहां चल दीस.
एती कोकड़ा कहिथे- ये कउंवा मतलबी अउ सुवारथी हे मितान. एला ककरो दुख-सुख ले कांही लेना-देना नइ राहय. टेंगना कहिथे- अरे छोड़ ना मितान, दुनिया मं सब तरह के जीव रहिथे. सब ला निभावत चले ले परथे. हां, हमन का गोठियावत रेहेन? कोकड़ा मितान ल पूछथे-तब ओहर बताथे इही आंदोलन के तइयारी चलत हे, नइ मानही तब अदालत जायके सोचे हन. बहुत अच्छा निरनय हे. कोकड़ा टेंगना ला बताथे- मोर एक झन मितान हे, हाईकोर्ट मं वकील हे. तुमन कइहौ ते मामला ओकर जरिए हाईकोर्ट मं डलवा सकत हौं.
टेंगना गदगद होके कहिथे- नेकी अउ पुच-पुच मितान, डलवा दे, मैं मोर समाज के मुखिया मन ला ये बात ला फोर के समझा देहौं.
ये डाहर मछरी समुदाय के मुखिया भुंडा के नेतृत्व मं बूढ़ा तालाब करा आंदोलन शुरू होगे अउ मेयर, मेयर इन काउंसिल के विरोध मं नारा लगना शुरू होगे. शहर के पत्रकार मन ला ये आंदोलन के जइसे खबर मिलिस, तब इलेक्ट्रानिक अउ प्रिंट मीडिया वाले मन आगे. धड़ाधड़ कैमरा आन करके फोटो खिंचना शुरू कर दीन. खबर पूरा अधिकारी, नेता, मेयर, मंत्री अउ जज मन करा पहुंच गे.
ये आंदोलन के खबर सुनकर समुंदर के रहइया मछरी सम्राट व्हेल ला मिलिस. तब ओहर अपन स्पेशल हवाई जहाज ‘फिश एयरवेज’ मं बइठके शहर आगे. ओकर आय के खबर सुनिन तहां ले आंदोलन करइया मछरी मन के हौसला बढग़े अउ मछरी सम्राट व्हेल जिंदाबाद के नारा लगना शुरू होगे. इही बीच कोकड़ा हा टेंगना ला लाके हाईकोर्ट के फैसला के एक कापी ओला देथे. फैसला ये रहिथे- अग्रिम आदेश तक “मेयर इन काउन्सिल” के फैसला ला स्थगित करे जाथे. ये फैसला ला सुनके मछरी बिरादरी मं खुशी के लहर फैलगे. तरिया मं मछरी मन उछल कूद करात रिहिन हे अउ फेर खुशी मं फटाखा फोरिन, मिठाई खाइन.
(परमानंद वर्मा स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)
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