what is night eating syndrome causes symptoms diagnosis and treatment – Late night eating: रात में उठ-उठकर खाने की आदत है बड़ी गंदी, ऐसे पाएं नाइट ईटिंग सिंड्रोम से छुटकारा

कई बार डिनर के बाद भी भूख लगने पर हम कुछ भी अनहेल्दी खा लेते हैं। इससे सोने में परेशानी होती है। देर रात तक नींद नहीं आती, तो जाहिर है भूख लगने लगती है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है। अगर हां, तो आप अकेले नहीं है। बल्कि कई लोग ऐसे हैं, तो रात में जागकर खाते हैं। यह कोई मामूली स्थिति नहीं है, बल्कि इसे नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है।

NCBI (1) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार नाइट ईटिंग सिंड्रोम एक प्रकार का डिसऑर्डर है, जिसमें लोग कई बार रात में उठकर खाना खाते हैं। दरअसल, इसमें कई लोगों को महसूस होता है कि अगर वे भूखे रहेंगे, तो उन्हें अच्छी नींद नहीं आएगी। ऐसे में पेट भरने के लिए वे चीनी और कार्ब से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर लेते हैं। जिससे उनका वजन तो बढ़ता ही साथ में उन्हें मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिसीज की शिकायत भी सकती है।

​नाइट ईटिंग सिंड्रोम के लक्षण

  1. देर रात में बार-बार खाना
  2. रात में जागना और खाने की इच्छा को नियंत्रित न कर पाना
  3. रात में 25 प्रतिशत से ज्यादा भोजन करना।
  4. शुगर और कार्ब से भरपूर चीजें खाने का मन करना।
  5. सुबह या दोपहर में भूख न लगना।

​नाइट ईटिंग सिंड्रोम का कारण

बिगड़ जाती है बॉडी की नेचुरल क्लॉक

कभी -कभी ऑफिस में देर रात तक काम करने या पढ़ाई करने के कारण लोग देर रात तक खाने की आदतों को अपना लेते हैं, जिसे लंबे समय बाद बदलना मुश्किल हो जाता है। National Library of Medicine (2) में छपी एक स्टडी के अनुसार सर्केडियम रिदम शरीर को दिन के बजाय रात में हंगर हार्मोन रिलीज करने का कारण बनती है। बता दें कि सर्केडियम रिदम बॉडी की नेचुरल क्लॉक है, जो भूख और नींद को नियंत्रित करने में मदद करती है।

स्ट्रेस और डिप्रेशन भी हो सकता है कारण

कई बार मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जैसे स्ट्रेस और डिप्रेशन भी NES (Night Eating Syndrome) का कारण बरती हैं। इसके कारण लोगों को नींद नहीं आती और रात के बीच में खुद भी खाने की इच्छा जागृत होती है।

​दिन के समय भोजन करना-

जो लोग दिन में अच्छा और हैवी खाना खाते हैं, उन्हें रात में बहुत ज्यादा भूख नहीं लगती। लेकिन खाना न खाने से उनकी नींद डिस्टर्ब जरूर होती है, जो एनईएस का कारण बनती है।

​अगर परिवार में है हिस्‍ट्री

कई बार जीन भी नाइट ईटिंग सिंड्रोम का कारण बनते हैं। जिन लोगों के परिवार में NES की हिस्ट्री है, उन सदस्यों में NES का खतरा बढऩे की संभावना ज्यादा रहती है।

​नाइट ईटिंग सिंड्रोम के लिए इलाज

  1. कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी – इस थैरपी की मदद से रात को देर से किचन में जाने के विचार को बदलने में मदद मिल सकती है।
  2. दवा-डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और अच्छी नींद बनाए रखने में मदद करने के लिए सेरोटोनिन रीपटेक इनहिबिटर को शामिल किया जाता है। बता दें कि यह एक एंटीडिप्रेसेंट है, जो मुख्य रूप से डिप्रेशन केे इलाज के लिए निर्धारित किया गया है।

आमतौर पर रात में खाने के लक्षणों को लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इससे डायबिटीज जैसी क्रॉनिक डिसीज का खतरा बढ़ने के साथ जीवन की गुणवत्ता भी कम हो जाती है। यदि आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति का सामना कर रहा है, तो बेहतर है कि डॉक्टर से इस बारे में बात करें।

​कैसे पाएं नाइट ईटिंग सिंड्रोम से छुटकारा

इस स्थिति का निदान करने के लिए डॉक्टर आपकी नींद और खाने की आदतों के बारे में सावाल कर सकते हैं। जैसे आप रात में कितनी बार जागते हैं। कौन सी चीज आपको सोने में मदद करती है। वे रोगी के मूड, भावनाओं और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भी सवाल पूछ सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आपका स्लीप टेस्ट भी किया जाएगा, जिसमें आपकी ब्रेन वेव्स, ब्लड ऑक्सीजन लेवल और हार्ट व ब्रीदिंग रेट मापी जाती है।

​नाइट ईटिंग सिंड्रोम के जोखिम कारक-

Pubmed Central में छपी एक रिपोर्ट (3) के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पहले से ही अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित है, तो उसे नाइट ईटिंग सिंड्रोम की शिकायत हो सकती है। इतना ही नहीं नाइट ईटिंग सिंड्रोम से जूझ रहे व्यक्ति का मोटापा भी बढ़ सकता है।


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