
बालाघाट, भोपाल, ब्यूरो। पूरी दुनिया में इस समय मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क आए चीतों की खबर है। फिलहाल यह चीता आराम फरमा रहे हैं, इस बीच मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक और वन्यप्राणी की खबर सामने आई है। जी हां, हम बात कर रहे हैं तेंदुए की। वैसे तो मध्यप्रदेश के जंगलों में तेंदुओं की भरमार है, लेकिन यह आबादी के बीच पहुंच जाएं तो खतरा ही मानिए। लेकिन बालाघाट में मिले इस तेंदुए से डरने की बात नहीं है। यह एक मासूम शावक है, जो किसी तरह जनहानि करने में सक्षम नहीं है। बताया जा रहा है कि बालाघाट जिले में बुधवार को देवी मंदिर क्षेत्र में तेंदुए का शावक आ गया। गांव के लोगों ने जब इसे देखा तो कुछ लोग डर गए और इसकी सूचना वन विभाग की टीम को दी। वन अमले ने मौके पर पहुंचकर पिंजरा लगाकर शावक को पकड़ लिया है। शावक को पकड़ने के बाद उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कई लोगों ने घर से पूजा की थाली लाकर पिंजरे में बंद तेंदुए का पूजा-अर्चना भी की। मामला बालाघाट जिले के परसवाड़ा के खरपड़िया ग्राम के देवी मंदिर का है। यह मंदिर जंगल के करीब है। यहां लोगों ने सुबह करीब 11 बजे शावक विचरण करते देखा। ग्रामीणों ने उसे देखा तो घबरा गए। सैकड़ों ग्रामीण तेंदुए के शावक को देखने के लिए उमड़ पड़े। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद शावक को पिंजरे में बंद कर लिया। इसके बाद शावक को वन चौकी खरपड़िया लाया गया। वन अमले ने बताया कि शावक की उम्र करीब एक साल है।
शुरू हो गई पूजा-पाठ
नवरात्रि के तीसरे दिन माता के मंदिर के पास शावक का आना देखकर कई लोग इसे धर्म और आस्था से मिलाकर देख रहे हैं। दरअलस, मां दुर्गा की सवारी शेर होती है और तेंदुआ, बाघ, चीता, शेर आदि भी एक ही प्रजाति के सदस्य हैं। कई ग्रामीणों ने पिंजरे में बंद शावक की पूजा की, उसे पानी पिलाया। उधर, वन विभााग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए का शावक जंगल से भटककर गांव के पास पहुंच गया। पशु चिकित्सक विजय मानेश्वर और उनकी टीम ने उसके स्वास्थ्य की जांच की। वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है। फिलहाल शावक को खरपड़िया की टीम ने अपनी देख रेख मे रखा है। जल्दी ही उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

