छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढिया ओलंपिक चलत हे. इहाँ के अधिकारी मन कभू स्कूल म पढ़ाय बर जाथें. कभू योगा करवाथें. कभू खेलकूद के मैदान म कूद जथें. जनता ल गुड-मार्निंग कथें. खेल म राजनीति अउ राजनीति म खेल के मिंझरे से राजनीति के च्यवनप्राश तियार होथे. जोंन खेल मैंदान म होवत हे ओखर शुभ-दर्शन आँफिस म घलो होथे. खो-खो आँफिस अउ मैदान दुनो जगा प्रसिद्ध हे. बस खो-खो काहव अउ मैदान म जमे राहव. जनता के बुता खो-खो के खेल बरोबर चलथे. ये अधिकारी वो अधिकारी ल खो कहिथे वो ह अउ दूसर ल खो कहिथे आँफिस म कागज दउड़त रहिथे. कोनो जानकार मनखे के सपेड़ा म पड़गें तब खो-खो के खेल इही खेल के पटरी म होथे. कुरसी के गरमी म माते अधिकारी के हुशियारी गच्चा खाथे. फेर सिसरी (सिटी) बाजथे अउ खेल फेर शुरू हो जथे. खेल-खेल म हँसी हे, खेल हे.
एक तीर: कई निशाना
हमर मुखियाजी बड़ चतुरा हे. एक तीर ले कई निशाना साधथे. छत्तीसगढिया ओलंपिक होय ले गाँव-गाँव खुडवा (कबड्डी) खेलत हे. फुगड़ी अउ गिल्ली डंडा, भंवरा, बांटी खेले म भिड़े हे. कुरसी दउड़ छत्तीसगढिया ओलंपिक म नइ हे. बचपन म कुरसी दउड़ खेलकूद के मुख्य आकर्षण होय. स्कूल के लइका, गुरूजी अउ ग्रामीणजन भाग लेंय. बीच म कुरसी अउ चारों खुंट कुरसी बर दउड़इया खिलाड़ी. हाँ, कुरसी के खिलाड़ी रेडी राहंय. कुरसी रानी मुसमुस-मुसमुस हांसे. आउट होवत-होवत आखिर म दु झन बांचे. घंटा बाजे कुरसी दउड़ फेर शुरू होय. जेन डपट के, झटका दे के या मउका मिलते साठ कुरसी म बइठ जाय तेंन विजयी घोषित होय. जेन कुरसी म नइ बइठ पाय तेंन लुलवावत रहि जाय. कभू-कभू रेफरी ह जेन ल कुरसी म बइठारना चाहे ओला कुरसी के तिर म आय देख के झट सिसरी फूंकना बंद कर देय. आख़िरी म सिसरी फूंकइया जेला चाहे वोला कुरसी मिल जाय. राजनीति के कतको कुरसी बीर स्कूली कुरसी दउड़ के देन आंय. राजनीति म कुरसी दउड़ चलते रहिथे. खेल-खेल म टंगड़ी-मार राजनीति लोकप्रिय हे. कुरसी ओखरे होथे जेंन कुरसी-कला म माहिर होथें. छत्तीसगढिया ओलंपिक म कुरसी-दउड़ गायब हे.
डोर-तिरउनी (रस्सा-खींच) गेम
डोर-तिरउनी खेल (रस्सा-खींच) बहुत लोकप्रिय. ये हा पावर-गेम आय. खींचतान पावर म चिन्गारी कस गरमी आ जथे. मैदान म नेता विरूद्ध-अधिकारी खेल म डोर-तिरउनी खेल (रस्सा-खींच) होवत अक्सर दिखथे. जनता अउ अधिकारी के बीच खींच-तान गेम लोकप्रिय हे. इहाँ नेता-अधिकारी जनता ल देखाय बर अउ नेता मन ल संतुष्ट करे बर हार म सुखी पाथें. राजनीति म बांटी (कंचा) खेले बर निशाना चोक्खा होना चाही. माई अंगरी म बांटी खेले के अभ्यास करे जथे. गोचकुल (बांटी) म बांटी बुड़ोय के अभ्यास जरूरी हे. जेला गोचकुल में बांटी डुबोय या बुड़ोय बर आथे जीत ओखरे होथे. यहू टाईम-गेम आय. नहीं त समय चुके पुनि का पछताने” वाले स्थिति हो जथे. इहाँ इही कार्यक्रम बने चलत हे. एहा गाँव जोड़ो, खिलाड़ी ल जोड़ो, राजीव युवा मितान क्लब के अगुवाई हे. सरकारी खरचा होवत हे. उन जुडत हें. मैंदान म नारी-शक्ति फुगड़ी खेलत हे. फुगड़ी रे!! फुर्र-फुर्र म पूरा छत्तीसगढ़ मगन हे. नोंनी मन बिल्ल्स खेलत हें. ऊँची-कूद नंदागे हे? लंबी कूद आगे. कुश्ती भुलागे. लइका-सियान सब मैदान म दउड़त हें. गेंड़ी दउड़ होवत हे. रस्सा-खींच म आज के राजनीति साँस लेवत हे. कबड्डी बाड-पावर गेम आय. रणनीति, दांव-पेंच वाले होथे. गाँव म कबड्डी बहुत जादा लोकप्रिय हे. रूपिया लगे) न पइसा मैदान म डांड खिंचो अउ कूद परो. टीम अच्छा हे, दांव-पेंच जोरदार हे, खेल अच्छा हे त जीत घलो तय हे. राजनीति म घलो कबड्डी के फार्मूला लागू होथे. राजनीति म घलो मैदान तियार करे बर परथे. कप्तान जानथे के कोन खेलाड़ी ल कहाँ, कब अउ कइसे खेलाना हे.
स्कूल-स्कूल म खेलकूद बीते दिन के बात होगे. पहिली हर स्कूल म रोज आख़िरी काल-खंड म खेलकूद होय. स्कूल म खेले कूदे बिना छत्तीसगढिया ओलंपिक के बड़ महत्व हे. हमर मुखियाजी बड़े बुता करे हे. भूलाय-भुलुय खेल के सुरता तो करव. गाँव खूब खेलत-कूदत हे. पढ़ई के गोठ-बात झन करव. लइका एडवांस म हुशियार हें. गनती के दिन पढ़हिं. सोझे सीढ़िया चढ़हिं. हमर मुखियाजी भंवरा ल नेति म नेत के राजनीति के खूब भंवरा घुमावत हें. ओखर लक्ष्य सीधा अउ साफ़ हे. अपन आँखी ल खोल के देखव चाहे मूँद क देखव. खेल-खेल म भंवरा भुन्नावत हे.आवव अपन छत्तीसगढिया संस्कृति, सभ्यता अउ संस्कार के जर(जड़) ल मजबूत करन. रामायण मंडली गाँव-गाँव ल जगावत हे. राजनीति के जोड़ ह बड़ बारीक होथे देखइयाच ल दिखथे. अभी तो हमर मुखियाजी के वन मेंन शो चलत हे. कौशल्या मह्तारी के मन्दिर निर्माण अउ राम वन गमन पथ के बहाना ओखर संदेश साफ़ हे. बड़े अधिकारी मन बुता करत-करत थके मांदे छत्तीसगढिया ओलंपिक मैदान म आ के आंक्सीजन लेवत हें. सरकार सरक सरक के भले चले फेर चलत-चुलात दिखे. सड़क मलहम-पट्टी बर तरसत हें. जुन्ना जिला के संगे संग नवा जिला/ नवा तहसील समस्या भूला के छत्तीसगढिया ओलंपिक में भीड़े हें.चार महीना खेलना कूदना हे. नवा छत्तीसगढ़ गढ़े जात हे.
(शत्रुघन सिंह राजपूत छत्तीसगढ़ी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)
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FIRST PUBLISHED : October 15, 2022, 17:04 IST
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