मोदी जी भोपाल को भोजपाल कराएं : रामभद्राचार्य

भोपाल, ब्यूरो। नाम बदलने को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ‘अड़’ गए हैं। पिछले दिनों राजधानी भोपाल में भोजपाल को लेकर बयान देने के कुछ दिन बाद फिर उन्होंने यही मांग दोहराई है। रामभद्राचार्य ने कहा कि अगर शिवराज सिंह चौहान मेरी बात नहीं मानते हैं तो ‘भोजपाल’ के लिए मैं स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करूंगा। रामभद्राचार्य ने संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर से भी कहा कि वे मुख्यमंत्री को समझाएं। गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज इन दिनों भोपाल में 1361वीं श्रीराम कथा का वाचन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘भोजपाल’ नाम होने से संस्कृत के स्वाभिमान की रक्षा होगी। मध्यप्रदेश विधानसभा इसका प्रस्ताव पास करें। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम किया जा सकता हैं तो भोपाल का नाम क्यों नहीं बदला जा रहा है। भोपाल में एक ही अक्षर ‘ज’ ही तो जोड़ना है। नाम बदलने के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा में इसका प्रस्ताव लाने की मांग भी जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने रखी। 23 जनवरी को भोपाल में कथा प्रारंभ होने से पहले नाम बदलने की मांग करने वाले रामभद्राचार्य ने 26 जनवरी को फिर से वही बात दोहराई। इस बार उन्होंने कहा था कि राजा भोज नगरी के राजा भोज पालनहार थे। सरकार पहले ही होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर चुकी है। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज हो चुका है। फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया है। ऐसे में भोपाल का नाम बदलकर भोजपाल करने में क्या दिक्कत है? रामभद्राचार्य जी हिन्दू संत समाज में अग्रणी नाम हैं। वे धर्मचक्रवर्ती, तुलसीपीठ के संस्थापक हैं। केंद्र सरकार द्वारा उन्हें पद्मविभूषण सम्मान दिया गया है। रामभद्राचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में वेद पुराण के उद्धारण के साथ गवाही दी थी। दो महीने की उम्र में ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य की आंखों की रोशनी चली गई थी। आज वे उन्हें 22 भाषा जानते हैं। 80 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं।

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