इंफाल। भारत के मणिपुर राज्य से AFSPA अभी छह महीने और लागू रहेगा। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे 30 सितंबर को हटाने की घोषणा की थी, लेकिन हालात मणिपुर में हालात दिन ब दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। यह देखकर सरकार ने इरादा बदल दिया है। राज्य के 19 थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। जिन 19 थाना क्षेत्रों को AFSPA से अलग रखा गया है, उनमें इंफाल, लेंफेल, सिटी, सिंग्जमेई, सेकमई, लामसांग, पत्सोई, वांगोई, पोरोमपट, हेंगेंग, लामलाई, इरिलबुंग, लेमखोंग, थोबुल, बिष्णुपुर, नांबोल, मोइरोंग, काकचिंग और जिरिबम शामिल हैं। आपको बता दें कि राज्य में दो लापता स्टूडेंट्स की हत्या के विरोध के बाद राज्य में हिंसा बढ़ गई है। 26 सितंबर को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। जिसमें पुलिस को गोली चलानी पड़ी। बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन हुआ। हजारों छात्र सड़क पर विरोध जताने उतरे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिसमें कुछ स्टूडेंट घायल हुए। वहीं इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) की महिला शाखा ने भी पांच महीने के दौरान आदिवासियों की हत्या और बलात्कार की CBI जांच के आदेश में देरी के खिलाफ चुराचांदपुर में प्रदर्शन किया। वहीं, स्टूडेंट की हत्या की जांच के लिए CBI आज इंफाल जाएगी।


यह जानकारी मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार साथ मिलकर काम कर रही हैं। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। आपको बता दें कि राज्य में 23 सितंबर को मोबाइल इंटरनेट से बैन हटने के बाद दो स्टूडेंट्स के शवों की फोटो सामने आई थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फोटो में दोनों की बॉडी जमीन पर पड़ी हुई नजर आ रही है। साथ ही लड़के का सिर कटा हुआ है। हालांकि दोनों के शव अभी तक नहीं मिले हैं। जुलाई में दोनों स्टूडेंट्स एक दुकान में लगे CCTV कैमरे में दिखाई दिए थे, लेकिन उसके बाद से उनका पता नहीं चल सका है।


