एड्स की दवाईयां आ चुकी हैं, पूर्णत: जानलेवा नहीं है एचआईवी : डॉ. मनीषा श्रीवास्तव

AIDS Programme In BMHRC Bhopal
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विश्व एड्स दिवस के मौके पर बीएमएचआरसी में आयोजित हुआ जागरुकता कार्यक्रम

एंट्री रेट्रो वायरल थैरेपी से मरीज को पहुंचाना होगा लाभ : डॉ. अंकिता पाटिल

भोपाल। रखने की जरूरत है। ये अच्छी बात है कि मध्य प्रदेश में एड्स पीड़ित संक्रामकता का प्रतिशत कम है। क्योंकि नशा एक ऐसा घातक शत्रु है जो कि आपको पता भी नहीं चलने देगा मगर आप पर पीछे से वार कर देगा। आपको इसका आदी बना देगा। यह बात विश्व एड्स दिवस के मौके पर प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बीएमएचआरसी में एड्स दिवस पर आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए कही। जनसंपर्क अधिकारी कीर्ति चतुर्वेदी ने बताया कि यह कार्यक्रम का आयोजन बीएमएचआरसी के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग और मनोचिकित्सा विभाग ने किया था। कार्यक्रम में डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि एड्स से जुड़ी मिथ्याएं और भ्रांति दूर करना जरूरी है। एड्स पीड़ित मां से ये रोग बच्चे को हो जाएगा ये भ्रांति है। एड्स की दवाईयां आ चुकी है और एचआईवी रोग पूर्णतया जानलेवा नहीं है, लेकिन एड्स पीड़ित व्यक्ति से भेदभाव न करते हुए इसकी रोकथाम आवश्यक है। इस मौके पर मध्यप्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति की डॉ. अंकिता पाटिल ने कहा कि नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के तहत 2021 से 2026 तक नशा मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य हासिल करना हमारी प्राथमिकता है। हम अपने प्रयासों को आगे ले जाए, ताकि एंट्री रेट्रो वायरल थैरेपी से मरीज को लाभ पहुंचा सके। डॉ. पाटिल ने कहा कि वर्तमान में एचआईवी एक्ट 2017 भी आ चुका है। जिसके तहत एडस संक्रमित व्यक्तियों के साथ संवेदनशीलता रखते हुए समानता और सम्मान का व्यवहार करना आवश्यक है।
इस अवसर पर एम्स, भोपाल के डा तमोनुद मोदक ने कहा कि समुदायों में एड्स फैलने से रोकना प्राथमिकता है। इसके लिए समाज के सभी समुदाय कदम मिलाकर आगे आए और सभी को जागरूक बनाने के प्रयास करे।

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