सर्वआदिवासी समाज के पूर्व अध्यक्ष बीपीएस नेताम इसके अलग-अलग कारण बताते हैं. उनका कहना है कि आदिवासी जो सिलगेर में उनके साथ हुआ ,निर्दोष ग्रामीणों को जो नक्सली बताकर हत्या की गई इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि फोर्स लगातार आदिवासियों का उत्पीड़न करते आ रही है. जहां-जहां कैंप की कोशिश की जा रही है वहां तो नाराजगी स्वाभाविक है. वहीं उनका यह भी कहना है कि सर्वआदिवासी समाज के पदाधिकारियों के अभी चुनाव नहीं हुए हैं और कुछ फर्जी लोग नेता बनकर गलते तरीके से आदिवासियों को कई जगह प्रदर्शन के लिए उकसा भी रहे हैं. नेताम का यह भी कहना है कि आदिवासियों के लिए विकास के काम सुस्त पड़े हैं. राजनांदगाव में जो विधायक को विरोध का सामना करना पड़ा उसका कारण यह भी है कि आदिवासियों में यह आक्रोश है कि जो लोग उनके प्रतिनिधि बनकर जीत कर आए वो सरकार तक न ही उनके हक की बात कर रहे हैं ना ही विकास की.
बीजेपी ने साधा निशाना
वहीं, इस पर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेण्डी का कहना है कि सरकार के खुद आदिवासी मंत्री और विधायक सिलेगर में घटना को संभाल नहीं पाए. वो आदिवासियों के हक और हित की लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं. उनका कहना है कि आदिवासी जल,जंगल जमीन की लड़ाई तो लड़ रहे थे. लेकिन अब विकास के काम भी ठप्प पड़े हैं. शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य से लेकर तमाम विकास के काम बाधित हैं. सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है. आदिवासियों का विश्वास नहीं जीत पाई है. यही वजह है कि यह आक्रोश पूरे प्रदेश भर में फैलेगा.
कांग्रेस ने कही बड़ी बात
वहीं कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि जो लोग कैंप का विरोध करवा रहे हैं वो कौन लोग हैं, सब जानते हैं. बस्तर में माओवाद की जड़े कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं. बस्तर में हर वर्ग के हित में कांग्रेस सरकार काम कर रही है. पहले जैसी घटनाओं पर रोक लगी है. माओवादी असंतोष भड़काने का काम कर रहे हैं. कैंप लगना कानून और व्यवस्था का काम है. बस्तर के साथ हीं जो असंतोष भड़काने की कोशिश की जा रही है वो आदिवासी समाज ,पूरा प्रदेश और पूरा देश जानता है.
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