दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बीच आज दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बैंक एफडी घोटला मामले में दोषसिद्ध पूर्व विधायक राजेंद्र भारती द्वारा दायर याचिका पर बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। इस मामले में अदालत पहले ही केंद्रीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर चुकी है। ऐसे में आज आयोग अपना पक्ष रख सकता है, जबकि भारती की ओर से भी अंतरिम राहत की मांग पर जोरदार दलीलें पेश किए जाने की संभावना है।राजेंद्र भारती को बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटले के मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट रिक्त घोषित होने के बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी। अब भारती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए सजा पर रोक और राहत की मांग की है।आज की सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अदालत के समक्ष एक ओर राजेंद्र भारती की राहत याचिका है तो दूसरी ओर केंद्रीय चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आ सकता है। यदि अदालत किसी प्रकार की अंतरिम राहत देती है तो इसका कानूनी और राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो उपचुनाव की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ने की संभावना मजबूत होगी।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजेंद्र भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम पैरवी कर रही है। अदालत में सजा पर रोक, दोषसिद्धि के प्रभाव और चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े कानूनी बिंदुओं पर विस्तार से बहस हो सकती है। दूसरी ओर चुनाव आयोग भी यह स्पष्ट कर सकता है कि अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर उसका क्या रुख है।दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले ही राजनीतिक रूप से काफी चर्चाओं में है। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे समय में हाईकोर्ट की सुनवाई को राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा, लेकिन आज की कार्यवाही से यह संकेत अवश्य मिल सकता है कि आगे इस मामले की दिशा क्या रहने वाली है।फिलहाल पूरे जिले के साथ प्रदेश के राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। सुनवाई के नतीजे के बाद दतिया उपचुनाव की राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


