पांढुर्णा में आज फिर होगा ‘गोटमार’, जाम नदी में बरसेंगे पत्थर; सुरक्षा के बीच आमने-सामने होंगे हजारों लोग

पांढुर्णा। पोला पर्व के दूसरे दिन पांढुर्णा में सदियों पुरानी और विवादित ‘गोटमार’ परंपरा आज फिर निभाई जाएगी। सावरगांव और पांढुर्णा के लोग जाम नदी के बीच आमने-सामने होकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। इस खूनी खेल में हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं, जबकि पिछले वर्षों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।लोककथा के मुताबिक गोटमार की परंपरा एक प्रेमी युगल की मौत से जुड़ी है। मान्यता है कि सावरगांव की युवती पांढुर्णा के युवक के साथ भाग रही थी। जाम नदी के पास दोनों पर पत्थर बरसाए गए, जिसके बाद दोनों की मौत हो गई। इसी घटना की याद में गोटमार की परंपरा शुरू होने की बात कही जाती है।परंपरा के अनुसार चंडी माई मंदिर में पूजा के बाद जाम नदी के बीच पलाश का पेड़ गाड़ा जाता है। इसके बाद दोनों गांवों के लोग पत्थरबाजी करते हैं और जो पक्ष पलाश के पेड़ को अपनी ओर ले आता है, उसे विजेता माना जाता है। स्थानीय लोगों में यह मान्यता भी है कि गोटमार नहीं खेलने पर क्षेत्र में अकाल पड़ सकता है।प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से इस परंपरा को रोकने और लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन स्थानीय आस्था और मान्यताओं के चलते यह परंपरा आज भी कायम है। गोटमार आस्था है, परंपरा है या अंधविश्वास—यह सवाल हर साल इस खूनी आयोजन के साथ फिर खड़ा होता है।

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