Bench of single judge of the Supreme Court will hear the bail petitions in the cases with sentence up to seven years – सुप्रीम कोर्ट के एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा वाले मामलों में जमानत याचिकाओं पर करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा वाले मामलों में जमानत याचिकाओं पर करेगी सुनवाई

(फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ 13 मई से अग्रिम जमानत और जमानत के ऐसे मामलों की सुनवाई करेगी जिनमें दोषी पाये जाने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है. यह पीठ मुकदमों के स्थानांतरण की याचिकाओं की भी सुनवाई करेगी. उच्चतम न्यायालय के इतिहास में यह पहला अवसर है जब मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी एकल न्यायाधीश को सौंपी जा रही है.अब तक सुप्रीम कोर्ट में एकल जज पीठ का प्रावधान नहीं था.यहां डिवीजन बेंच यानी कम से कम जो जजों की बेंच ही होती रही है लेकिन अब नई व्यवस्था लागू कर दी गई है. 

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नई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट में काम की रफ्तार को बढ़ाने के लिए की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इस व्यवस्था को लागू किया है. पिछले साल सिंतबंर में सुप्रीम कोर्ट नियमों में संशोधन किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ये एकल पीठ जमानत, आपराधिक मामलों के ट्रांसफर पिटीशन जैसे याचिकाओं की सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट में ये कदम केसों की अधिकता के चलते उठाया गया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में 1970 के दशक तक सिंगल जज की बेंच का चलन था. यहां तक कि 24 जून 1975 को तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनाव याचिका पर फैसला भी सुप्रीम कोर्ट के एकल जज ने सुनाया था.


इसके बाद नियमों में संशोधन कर अदालत में कम से कम दो जजों का पीठ का नियम बनाया गया. लेकिन 17 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के 2013 के नियमों में संशोधन कर एकल पीठ के गठन का नियम बनाया गया. अब CJI एस ए बोबडे ने बुधवार 13 मई से सिंगल जज की बेंच की शुरुआत का फैसला किया है. जानकारों के मुताबिक 1970 के दशक में छुट्टियों के समय ही जरूरी मामलों में अंतरिम आदेश के लिए सिंगल जज की बेंच बैठती थी और बाद में दो या तीन जजों की बेंच नियमित सुनवाई करती थी. 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कृष्णा अय्यर ने भी इंदिरा गांधी मामले में इस तरह फैसला दिया था और अयोग्यता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी जिसके बाद देश में इमरजेंसी लग थी. अब इस तरह सुप्रीम कोर्ट में सिंगल जज की नियमित बेंच का गठन कोर्ट के इतिहास में पहली बार किया गया है.


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