Bijapur News: बीजापुर एनकाउंटर; जवानों के शव उठाने में क्यों हुई देरी? नक्सलियों के इरादे जान खड़े हो जाएंगे रोंगटे

बीजापुर-सुकमा की सीमा पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए. 24 घंटे बाद शव उठाने पहुंची पुलिस.

बीजापुर-सुकमा की सीमा पर नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए. 24 घंटे बाद शव उठाने पहुंची पुलिस.

Bijapur Naxal Encounter: बीजापुर में जिस नक्सली कमांडर हिड़मा की तलाश में सुरक्षाबल की टीम पहुंची थी, वह नक्सलियों के जाल में फंसकर रह गई. जवानों के शव के नीचे आईईडी लगाने की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबल को हुई शवों को उठाने में देरी.

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर की सीमा पर स्थित जंगल में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबल के 22 जवान शहीद हो गए. नक्सली कमांडर हिड़मा और उसकी बटालियन की तलाश में गई सुरक्षाबलों की टीम, जब तक कुछ समझ पाती, उससे पहले ही वह नक्सलियों के बिछाए जाल में फंस गई. सुरक्षाबलों को घिरा हुआ देखकर नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में कई नक्सली भी मारे गए, लेकिन सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा आदि के जवानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए. घटनास्थल की तस्वीरें नक्सलियों के खतरनाक मंसूबों को बयां करती है कि किस तरह ये शहीद जवान, साजिश को नहीं समझ पाए.

मुठभेड़ के 24 घंटे बाद न्यूज 18 की टीम सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस की सर्च-पार्टी से पहले पहुंचे न्यूज 18 के संवाददाताओं ने टेकुलगुड़ा और एक अन्य गांव में जो हालात देखे, वह न सिर्फ वीभत्स थे, बल्कि हैरान कर देने वाले भी थे. टेकलगुड़ा गांव में मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों के शव जहां-तहां पड़े थे. कुछ शव गांव में बने घरों के पास, तो कुछ गांव से बाहर के मैदान में खुले आसमान के नीचे पड़े थे. इन शवों को 24 घंटे बाद भी उठाया नहीं जा सका था, इसको लेकर तमाम सवाल किए जा रहे थे. न्यूज 18 की टीम ने जब इसकी पड़ताल की, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई.

शवों के नीचे कहीं बम तो नहीं!

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