
नई दिल्ली, ब्यूरो। सोमनाथ मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार हो या चार धाम को जोड़ने वाली परियोजना। केदारनाथ मंदिर का कायाकल्प हो या अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का भव्य स्तर पर नींव पूजन या सोमवार को हुए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का शुभारंभ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि मंदिरों के जीर्णोद्धार करने वाले और सनातन परंपराओं को न सिर्फ संजो कर बल्कि उसको जोड़ते हुए आगे बढ़ाने वाले बड़े नेता के तौर पर उभर रही है। विशेषज्ञों का कहना है हिंदू और हिंदुत्व की परिभाषा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विशेष छवि के साथ हिंदू संस्कृतियों और उनकी परंपराओं को आगे बढ़ाने ब्रांड अम्बेस्डर के तौर पर उभर रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के इंडियन स्टडी ऑफ सोशियोलॉजी के प्रोफेसर जेपी प्रसाद कहते हैं कि बीते कुछ दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खासतौर से देश के अलग-अलग राज्यों के मंदिरों और उनके जीर्णोद्धार को लेकर बनाई जा रही रणनीतियों और पुनरुद्धार की योजनाओं को आगे बढ़ाने वाले बड़े नेता के तौर पर सामने आई है। हालांकि उनका कहना है कि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी उनकी छवि इसी तरह की ही थी। कहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने सोमनाथ मंदिर परिसर का भव्य जीर्णोद्धार कराया था। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही उन्होंने केदारनाथ धाम का कायाकल्प कराया। इसके अलावा केदारनाथ बद्रीनाथ की यमुनोत्री और गंगोत्री के चारधाम परियोजना पर काम शुरू कराया। राम मंदिर का भव्य नींव पूजन और अब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन। प्रोफेसर प्रसाद के मुताबिक हिंदू और हिंदुत्व की लड़ाई में पड़ने से कुछ नहीं होगा। उनका कहना है कि भाषण देने से बेहतर है भारतीय पुरातन और सनातन परंपराओं के प्रतीकों को न सिर्फ बचाया जाए बल्कि उनको आधुनिकता के साथ संरक्षित भी किया जाए। वह कहते हैं इस मामले में भाजपा ने देश के बहुत बड़े समाज की नब्ज पकड़ ली है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्य नेताओं से कई कदम आगे बढ़कर न सिर्फ काम कर रहे हैं बल्कि उसको साबित भी कर रहे हैं। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी उनकी पार्टी अपने आस्था के प्रतीकों का पुनरुद्धार करती रहेगी। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक राम मंदिर तो बहुत जल्द बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन हिंदू आस्था और भारतीय संस्कृति समेत सनातन परंपरा के बहुत से अवशेषों को संवारना और उनका पुनरुद्धार करना बाकी है। वह कहते हैं जल्द ही उनकी पार्टी इन पर भी काम शुरू करेगी। ताकि हमारी विरासत और सनातन परंपरा को न सिर्फ जीवित रखा जाए, बल्कि उसकी भव्यता को बरकरार रखा जा सके। भाजपा नेताओं के मुताबिक मोदी के अंदर पूरा देश अहिल्याबाई होल्कर को देख रहा है। जिन्होंने देश के मंदिरों का न सिर्फ जीर्णोद्धार कराया बल्कि काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होल्कर ने ही कराया था।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक जितनी भव्यता के साथ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का शुभारंभ किया गया है और उसके बाद मनाए जाने वाले उत्सव को एक महीने तक चलाने की योजना बनाई गई है वह भाजपा को राजनीतिक फायदा भी देगी। राजनीतिक विश्लेषक राम दीक्षित कहते हैं कि भाजपा ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक और सनातन परंपराओं और धरोहरों को सहेजने के साथ-साथ लोगों के भावों को छूती है। और जब कोई भी राजनीतिक दल या राजनीतिक व्यक्तित्व किसी भीड़ या व्यक्ति के सेंटीमेंट को छूता है, तो वह बहुत हद तक अपने मकसद में कामयाब होता है। दीक्षित कहते हैं कि भाजपा हमेशा से कहती है कि मंदिर और सनातन परंपरा उसके लिए राजनीति नहीं बल्कि आस्था का विषय हैं। और इसी आस्था के माध्यम से लोगों के सेंटीमेंट को छूकर अपने वोट बैंक को मजबूत करती है।

