Chhattisgarh Coronavirus | Chhattisgarh Coronavirus Ground Report On Lockdown and COVID-19 Cases; Rajnandgaon Bhilai Raipur Bilaspur Korba | छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर महाराष्ट्र से आने वाले लोगाें को दी गई शरण, 5 गांवों के सरपंच ने किया विरोध

  • बॉर्डर के गांवों की शिकायत : बाहर से आए लोग खुले में फैला रहे गंदगी, चार दिन से रुके हैं लोग
  • ग्रामीणों ने गांव में की बेरिकेडिंग, प्रशासन ने व्यवस्था नहीं बनाई तो फैल सकती है महामारी

दैनिक भास्कर

Apr 02, 2020, 08:39 AM IST

राजनांदगांव. कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते चार दिनों से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर फंसे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रशासन ने महाराष्ट्र से आने वाले लोगों को ठहराने का इंतजाम गांवों में किया है। ऐसे में इसके विरोध में पांच गांवों के सरपंच आ गए हैं। तेलीनबांधा, घोरतलाव, भर्रीटोला, सड़क चिरचारी और पेंड्रीडीह के सरपंच ने इस संबंध में कलेक्टर को लिखित में शिकायत की है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र से आए लोग खुले में शौच जा रहे हैं। ऐसे में महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। 

बागनदी में दूसरे राज्यों से आए लोगों के लिए भोजन के लिए ऐसी कतार लगी, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखी।

बागनदी बॉर्डर पर ठहरे लोगों को अलग-अलग जगह शिफ्ट किया गया। इनमें से कुछ को स्कूल तो कुछ लोगों को सड़क चिरचारी के डिपो में शिफ्ट कर दिया गया। इस तरह से सड़क चिरचारी के डिपो में करीब 700 लोगों को ठहराया गया है।  डिपो पास में हाेने के कारण ग्रामीणों ने गांव की सड़क में झाड़ियों को रखकर आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। वहीं बागनदी में भी स्कूल से आने और बाहर निकलने का रास्ता छोड़ा गया है। गांव के प्रवेश द्वार पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं।

प्रशासन को संसाधन बढ़ाने होंगे

बाॅर्डर पर फंसे लोगों को इस तरह शौचालय की व्यवस्था की गई है। 

सड़क चिरचारी के सरपंच प्रतिनिधि मनीष जैन ने कहा कि यह मानवता की मिसाल ही है कि यहां बाहर से आए लोगों की सेवा की जा रही है। अपनी जान की परवाह किए बिना शासन व प्रशासन ने प्रयास किया है। हालांकि प्रशासन को सुविधा बढ़ानी होगी। यहां खुले में लोग शौच जा रहे हैं इससे महामारी की आशंका बढ़ रही है। शौचालय की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। साथ ही पेयजल और प्रसाधन के लिए पानी की आवश्यकता भी बढ़ गई है। 

5 साल की बच्ची के दिल में छेद, रायपुर में करवाना है इलाज
लॉक डाउन के दौरान बॉर्डर पर ऐसे भी लोग मिले जो मौत से लड़ रहे। भंडारा की सान्वी महज पांच वर्ष की है। वह अपनी मां मोनाली मेश्राम के साथ भंडारा से रायपुर जा रही है। आधे घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें आगे रवाना किया गया। इस बीच बच्ची मोबाइल में गेम खेल रही थी। बच्ची के दिल में छेद है, चेकअप के लिए वे रायपुर जा रहे। 

मोबाइल चार्जिंग के लिए ऐसी होड़

इस तरह से लोग मोबाइल की चार्जिंग कर रहे हैं। 

सड़क चिरचारी में मोबाइल चार्जिंग के लिए कुछ पाइंट तो लगाए गए हैं लेकिन यहां चार्जिंग करने की होड़ लगी है। फिलहाल यहां कोई भी अपना मोबाइल बंद नहीं करना चाहता। चूंकि घर वालों से संपर्क साधने का एकमात्र साधन मोबाइल ही है।

सड़क चिरचारी के डिपो में 700 लोगों को ठहराया गया है। उनके रुकने और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था कर दी गई है। साथ ही शौचालय के लिए अस्थायी बॉयो टॉयलेट भेजे गए हैं।

– जयप्रकाश मौर्य, कलेक्टर

गुजरात के सूरत से बिहार तक डेढ़ हजार किमी का सफर

गुजरात के सूरत से पैदल ही बिहार घर जाने के लिए निकले युवक।

घर लौटने के लिए डेढ़ हजार किमी का पैदल सफर। बिहार के 10 युवा पांच दिन पहले सूरत से निकले थे। फिलहाल वे बागनदी बॉर्डर क्रॉस करते हुए चिचोला तक पहुंच गए हैं। गया (बिहार) में रहने वाले निरंजन कुमार, अजय कुमार, नितीश कुमार, रामरतन और धनराज ने बताया कि वे गया नवादा के रहने वाले हैं। पैदल निकले पांच दिन हो गए। सूरत में मजदूरी करते हैं। वहां काम बंद हो गया तो मालिक ने भी घर जाने कह दिया। उनका मोबाइल भी बंद है। इस वजह से वे घर लौट रहे हैं। महाराष्ट्र में कुछ लोगों ने सहयोग किया। इन्हें भोजन भी कराया।


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